कौशल विकास के कॉरिडोर

इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास बनने वाले नए यूनिवर्सिटी टाउन का फोकस भविष्य की स्किल्स पर होने वाले ताजा रिसर्च पर होगा, पढ़ाई सीधे उद्योगों और खास तरह की नौकरी की जरूरतों से जोड़ी जाएगी.

Union Budget: Lab to w orkstation
सांकेतिक तस्वीर

बजट 2026-27 में शिक्षा को सर्विस आधारित अर्थव्यवस्था के लिए प्रोडक्टिव इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर पर पेश किया गया है. सोच यह है कि उच्च ‌‌शिक्षा को उद्योग, लॉजिस्टिक्स, रिसर्च और रोजगार के हब्स के और करीब लाया जाए. इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव.

ये इलाके ऐसे इकोसिस्टम होंगे, जहां यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थान, स्किल सेंटर और रहने की सुविधाएं एक साथ हों, ताकि पढ़ाई, इनोवेशन और नौकरी एक ही जगह पर जुड़ सकें. इन यूनिवर्सिटी के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी.

पूर्व यूजीसी चेयरमैन ममिडला जगदीश कुमार इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय शिक्षा नीति या एनईपी 2020 के तहत क्वालिटी सुधार का मौका मानते हैं, बशर्ते इन्हें साझा और इंडस्ट्री-लिंक्ड प्लेटफॉर्म की तरह डिजाइन किया जाए. हालांकि कुछ जानकारों की दलील है कि यूनिवर्सिटी टाउनशिप से अकादमिक गुणवत्ता पर ध्यान भटकने का जोखिम है.

के.आर. मंगलम यूनिवर्सिटी के चांसलर दिनेश ‌सिंह चेतावनी देते हैं कि इससे भारत वही गलती दोहरा सकता है, जहां कैंपस असल दुनिया से कटे हुए रह जाते हैं. उनके मुताबिक, स्टैनफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसी यूनिवर्सिटीज इसलिए फलती-फूलती हैं क्योंकि वे बड़े आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क में गहराई से जुड़ी होती हैं. 

यह बजट शिक्षा को उभरते सेक्टरों से जोड़ने की भी कोशिश करता है. स्कूलों और कॉलेजों में एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स लैब्स) इसका उदाहरण हैं. हाइ-पावर्ड एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट ऐंड एंटरप्राइज स्टैंडिंग कमेटी का प्रस्ताव है कि काम शिक्षा, स्किल्स और उभरती टेक्नोलॉजी, खासकर एआइ, को भविष्य के लेबर मार्केट से जोड़ना होगा. कुल मिलाकर शिक्षा उस पाइपलाइन की पहली कड़ी के रूप में देखी गई है, जो लर्निंग से होते हुए सर्विस एक्सपोर्ट, रोजगार और एंटरप्राइज तक जाती है.

खर्च के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षा बजट बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो पिछले साल करीब 1.34 लाख करोड़ था. स्किल डेवलपमेंट का बजट भी उछलकर 9,885.8 करोड़ रुपए पहुंच गया है, जो 2025-26 के बजट अनुमान 6,100 करोड़ रुपए से काफी ज्यादा है. लेकिन 2025-26 में संशोधित अकलनों में शिक्षा के लिए आवंटन करीब 6,700 करोड़ रुपए घटा दिया गया था. और जिस स्किल डेवलपमेंट को सबसे अहम बताया जाता है, उसी पर खर्च आधे से भी ज्यादा कम कर दिया गया था.

कुल केंद्रीय व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपए का है, जिसमें शिक्षा का हिस्सा 2.6 फीसद है. स्किल डेवलपमेंट जोड़ने के बाद भी यह आंकड़ा करीब 2.8 फीसद ही होता है, जो पिछले साल से बदला नहीं है. कुल मिलाकर बजट 2026 मौजूदा ढांचे को मजबूत करता है.

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