चिप की ग्लोबल महत्वाकांक्षा
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का लक्ष्य भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत करना है.

- अजय सुकुमारन
देश के नए सिलिकॉन चिप हब गुजरात के साणंद में पहली सेमीकंडक्टर यूनिट अब कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए तैयार है. फरवरी के आखिर तक यहां से चिप्स बनना शुरू हो जाएगा. यह उस हाइ-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा मील का पत्थर है जिसे भारत बरसों से खड़ा करने की कोशिश करता रहा है. इसी मौके पर केंद्रीय बजट में अगले चरण इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आइएसएम) 2.0 के एलान के साथ इसकी दिशा साफ कर दी गई.
साणंद में माइक्रोन अपने 2.75 अरब डॉलर (22,516 करोड़ रुपए) के एसेंबली, टेस्ट, मार्क ऐंड पैक (एटीएमपी) प्लांट से चिप्स रोल आउट करेगा. यह उन 10 प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिन्हें 2021 में शुरू हुए 76,000 करोड़ रुपए के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आइएसएम) के तहत मंजूरी मिली थी. इनमें माइक्रोन के अलावा टाटा, मुरुगप्पा और एचसीएल जैसे भारतीय समूहों से जुड़े प्रोजेक्ट्स भी हैं. कुल मिलाकर इस साल चार आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर एसेंबली ऐंट टेस्ट (ओसैट) यूनिट्स से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है.
आइएसएम के पहले चरण के लिए लगभग पूरा फंड पहले ही कमिट हो चुका है. इस फेज में सरकार ने किसी प्रोजेक्ट की लागत का करीब 70 फीसदी तक सपोर्ट दिया. अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में दूसरे चरण की रूपरेखा रखी है, हालांकि इसके लिए फंड आवंटन का आंकड़ा अभी नहीं बताया गया. अगर पहला फेज भरोसा और विश्वसनीयता बनाने पर था, तो आइएसएम 2.0 का मकसद सेमीकंडक्टर सप्लाइ चेन को मजबूत करना है.
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अशोक चंडक कहते हैं कि इसका लक्ष्य भारत को सिर्फ एक भागीदार से आगे ले जाकर ग्लोबल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का स्ट्रक्चरल प्लेयर बनाना है.
अब फोकस सिर्फ फैब और ओसैट यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेगा. अगले चरण में मटीरियल्स, टूल्स और आरऐंडडी पर भी जोर होगा. बजट के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आइएसम 2.0 में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट और मटीरियल्स पर बड़ा फोकस होगा. इसके लिए भारत के केमिकल और गैस उद्योग को सेमीकंडक्टर ग्रेड क्वालिटी की तरफ मोड़ा जाएगा.
सेमीकंडक्टर के मामले में डिजाइन इकोसिस्टम भी एक अहम मोर्चा है. वैष्णव के मुताबिक, सरकार चाहती है कि देश में 50 बड़ी डिजाइन कंपनियां उभरें. आइएसएम 1.0 के तहत डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के जरिए 278 कॉलेजों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन टूल्स की पहुंच दी गई थी, ताकि स्किल्ड टैलेंट तैयार किया जा सके.
इसी के साथ बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के लिए इंसेंटिव लगभग दोगुना कर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है. इसकी वजह सितंबर 2025 तक मिले 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव हैं जबकि टारगेट 59,350 करोड़ रुपए का था. अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू हुई यह स्कीम मल्टी-लेयर पीसीबी, हाइ-डेंसिटी इंटरकनेक्ट पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म जैसे हाइ-इंपोर्ट कंपोनेंट्स को देश में ही बनाने पर फोकस करती है.
चांडक के मुताबिक, ऐसा होने पर ईसीएमएस को आयात करने की मजबूरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. उनका कहना है कि आइएसएम के तहत बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक चिप्स और ईसीएमएस के जरिए बनने वाले कंपोनेंट्स देश को इसमें काफी आगे ले जा सकते हैं. ऐसे उपकरण भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू एडिशन को 35 से 40 फीसद से ऊपर ले जा सकते हैं. मोदी सरकार ने अपने बजट के जरिए दिशा तय कर दी है. अब असली कसौटी आवंटित धन का उचित इस्तेमाल करते हुए योजना पर अमल की होगी.