भविष्य पर बड़ी बाज़ी

मोदी सरकार ने 10 अत्याधुनिक सेक्टरों पर दांव लगाकर भारत को वै‌श्विक आर्थिक शक्ति बनाने की रणनीति साफ कर दी.

Cover Story Union Budget 2026-27
वित्त मंत्री ‌‌निर्मला सीतारमण

जब वित्त मंत्री ‌‌निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करने के लिए खड़ी हुईं तो उम्मीद थी कि उद्योग और नौकरियों को मजबूती देने वाले बड़े सुधारों का ऐलान होगा. लेकिन इस बार फोकस कुछ अलग रहा.

बजट ने उन नए दौर के सेक्टरों पर दांव लगाया, जिन्हें विकसित भारत की यात्रा का इंजन माना जा रहा है. वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए इन सेक्टरों के लिए लक्षित नीतिगत समर्थन और बरसों, कई मामलों में दशकों तक चलने वाले निवेश की रूपरेखा पेश की गई. वित्त वर्ष 27 में वित्तीय घाटा जीडीपी के 4.3 फीसद पर रहने का अनुमान है.

बजट में बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ जैसे सेक्टरों को रणनीतिक प्राथमिकता दी गई है. नरेंद्र मोदी सरकार का मकसद ऐसे नेशनल चैंपियन खड़े करना है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाएं और धीरे-धीरे देश को ग्लोबल वैल्यू चेन में मजबूत खिलाड़ी बना दें.

पहली बार ऑरेंज इकोनॉमी को भी औपचारिक तौर पर भारत की आर्थिक रणनीति के एक अहम स्तंभ के रूप में मान्यता दी गई है. यह ऐसे समय में हुआ है, जब भारत 2026 में ग्लोबल एआइ समिट की मेजबानी की तैयारी कर रहा है,जिसमें एआइ गवर्नेंस और इनोवेशन पर चर्चा होगी.

रणनीति का अगला बड़ा हिस्सा हुनर के साथ नौकरियों को जोड़ने पर है. शिक्षा को एक बार फिर सर्विस-ड्रिवन इकोनॉमी के लिए प्रोडक्टिव इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा गया है. जोर इस बात पर है कि अलग-थलग कैंपस नहीं, बल्कि पूरे अकादमिक इकोसिस्टम तैयार किए जाएं.

तीसरा फोकस लॉजिस्टिक्स, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्ट पर है. 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों को उभरते आर्थिक केंद्र माना जाएगा. यहां कनेक्टिविटी सात हाइ-स्पीड कॉरिडोर के जरिए बढ़ाई जाएगी, ताकि लेबर कैचमेंट एरिया बड़ा हो, आवाजाही आसान हो और रियल एस्टेट की नई संभावनाएं खुलें.

इन सब कदमों को एक साथ देखें तो यह बजट पुराने दौर के 'सबको खुश करो’ वाले बजट से साफ अलग दिखता है. सोच आगे की है. अगर इसे लगातार और ईमानदारी से लागू किया गया, तभी यह दांव भारत को सच में नई ऊंचाई पर ले जा पाएगा.

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