बायोफार्मा को बढ़ावा
बजट में बायोसिमिलर दवाओं के निर्माण में भारत को विश्व का दिग्गज बनाने के लिए बुनियाद तैयार की गई.

भारत में बीमारियों का बोझ तेजी से डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की तरफ बढ़ रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में दवा निर्माण के अगले मोर्चे यानी बायोफार्मा पर फोकस किया.
बजट में घोषित बायोफार्मा शक्ति (स्ट्रेटजी फॉर हेल्थकेयर एडवांसमेंट थ्रू नॉलेज, टेक्नोलॉजी ऐंड इनोवेशन) का मकसद भारत को बायोलॉजिक्स का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है. बायोलॉजिक्स वे दवाएं होती हैं जो इंसान, जानवर या सूक्ष्म जीवों की जीवित कोशिकाओं से बनती हैं.
वित्त मंत्री ने इस प्रोग्राम के लिए 10,000 करोड़ रुपए का आवंटन करते हुए कहा कि बायोलॉजिक दवाएं लंबी उम्र और बेहतर जीवन-स्तर के लिए अहम हैं, वह भी किफायती कीमत पर. भारत की सबसे बड़ी ताकत बायोसिमिलर्स में मानी जाती है. ये ऐसी दवाएं हैं जो मौजूदा बायोलॉजिक दवाओं की बनावट और कामकाज की नकल करती हैं, इसलिए कीमत में सस्ती होती हैं. यह कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि भारत पहले ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पेटेंट दवाओं के जेनरिक वर्जन बनाने में दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है.
आज भारत का बायोसिमिलर बाजार करीब 12 अरब डॉलर (1.08 लाख करोड़ रुपए) का है, जो कुल 55 अरब डॉलर के फार्मा बाजार का करीब 22 फीसद है. इसमें बायोकॉन, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक, रिलायंस लाइफ साइंसेंज और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जैसे बड़े नाम शामिल हैं. बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआइआरएसी) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, बायोसिमिलर बाजार हर साल करीब 20 फीसद की रफ्तार से बढ़ रहा है.
बायोफार्मा शक्ति का लक्ष्य सिर्फ दवाएं बनाना नहीं है, बल्कि बायोसिमिलर प्रोडक्शन के लिए पूरा इकोसिस्टम खड़ा करना है. इसके तहत तीन नए नाइपर (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च) बनाए जाएंगे और सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा.
इसके अलावा, देशभर में 1,000 से ज्यादा मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क तैयार करने का प्रस्ताव है. ड्रग रेगुलेटर सीडीएससीओ (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन) को भी मजबूत किया जाएगा ताकि अप्रूवल की प्रक्रिया ग्लोबल स्टैंडर्ड के मुताबिक तेज और भरोसेमंद बन सके.
पीडब्ल्यूसी में ग्लोबल हेल्थ एडवाइजरी लीडर सुजय शेट्टी इसे भारतीय बायोफार्मा के लिए मजबूत और भरोसेमंद कदम मानते हैं. उनके मुताबिक, बायोफार्मा एक जटिल सेक्टर है, जिसमें ज्यादा पूंजी और बेहतर लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है. बजट के ये कदम भारत को ग्लोबल बायोफार्मा बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाएंगे.
चीन इस सेक्टर में पहले ही आगे है और अमेरिकी फार्मा कंपनियां वहां से बायोलॉजिक्स दवाए तैयार करने और उन पर शोध करने के लिए लाइसेंस हासिल कर रही हैं. भारत को वहां तक पहुंचने में वक्त लगेगा, लेकिन यह बजट एक हौसला देने वाली शुरुआत है.
बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने एक्स पर लिखा, ''बायोफार्मा के लिए शानदार दिन. भारत को बायोमैन्युफैक्चरिंग और बायोसिमिलर्स में ग्लोबल लीडर बनने की क्षमता को पहचानने के लिए धन्यवाद.’’
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश में कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियां बढ़ रही हैं, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स लोगों की लंबी उम्र और बेहतर जिंदगी में अहम भूमिका निभाएंगे. उनके मुताबिक, इस साल के बजट की यह पहल भारत को मजबूती से एक ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है.