क्या है वो नई अर्थव्यस्था जो बुढ़ापे को अपनी शर्तों पर जीने का मौका दे रही है?
घर से लेकर घरेलू देखभाल, सैर-सपाटे से लेकर जरूरी सामानों तक एक पूरी अर्थव्यवस्था देश के वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों के इर्द-गिर्द उभरी, जो उन्हें अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की आजादी मुहैया कराने में मददगार

देहरादून के अंतरा सीनियर लिविंग थिएटर में उत्साह का माहौल है. 30 लोगों के बैठने की व्यवस्था वाली यह जगह लोगों से खचाखच भरी हुई है और कर्मचारी हड़बड़ी में और कुर्सियां लगा रहे हैं. यहां के रहने वाले 89 बरस के अनिल सूद और 83 बरस की सीमा सूद खास तौर पर रोमांचित हैं, क्योंकि उन्होंने मशहूर अभिनेता की 100वीं सालगिरह मनाने के लिए साँग सीक्वेंस—'देव आनंद की जिंदगी के 60 साल 60 मिनट में’—तैयार किया है.
ईएमआइ/एचएमवी (अब सारेगामा) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल याद करते हैं कि किस तरह ''एचएमवी ने कई साल देव आनंद की फिल्मों से पैसा बनाया... देव के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन को सबसे ज्यादा रॉयल्टी एचएमवी से मिलती थी.’’ ज्यों ही उनकी फिल्मों के गाने बजना शुरू होते हैं, वहां मौजूद तमाम लोग भी उसमें शरीक हो जाते हैं, कुछ साथ-साथ गा रहे हैं, तो कई दूसरे चीअर और हूट कर रहे हैं.
सूद दंपती गुरुग्राम का अपना पांच कमरों का शानदार मकान छोड़कर करीब दो साल पहले अंतरा आ गए. अनिल को हर्पीज के संक्रमण ने पकड़ लिया, और 80 वर्ष से ऊपर के इस दंपती के लिए सेहत और घर दोनों संभालना मुश्किल हो गया. अनिल कहते हैं, ''अंतरा स्वर्ग नहीं है, स्वर्ग सरीखा है. यह चार बटन का जिंदगीनामा है; बटन दबाओ और काम हो जाता है.’’
ये सोने-से दमकते बूढ़े हैं, आप चाहें तो इन्हें युवा बुजुर्ग भी कह सकते हैं. ये आजादी से जीने, अपने जैसों के साथ रहने, शरीर और दिमाग से सक्रिय रहने, अकेलेपन से लड़ने और रोजमर्रा के चूल्हा-चौके में फंसे बिना स्वास्थ्य सेवा के करीब रहने की अदम्य इच्छा से प्रेरित हैं.
बेशक, उनकी माली हालत ऐसा विकल्प चुनने में मददगार हुई. कोविड-19 महामारी ने उन्हें एहसास कराया कि जिंदगी छोटी है और उसका कोई भरोसा नहीं और बाकी बचे सालों का भरपूर मजा लो. इसलिए सुविधा-संपन्न माहौल में सामुदायिक रहन-सहन सूद दंपती जैसे अनेक बुजुर्गों के लिए एक विकल्प बन गया है.
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 के मुताबिक, भारत में फिलहाल 60 से ऊपर की उम्र की 14.9 करोड़ लोग हैं, जो देश की कुल आबादी के करीब 10 फीसद हैं. 2050 तक इनके 34.7 करोड़ या भारत की आबादी के 20 फीसद तक बढ़ने की उम्मीद है. दरअसल, इस सदी के अंत तक बुजुर्ग 14 साल की उम्र तक के बच्चों की संख्या से ज्यादा हो जाएंगे.
लिहाजा, भारत के युवाओं के जिस ''जनसांख्यिकी लाभांश’’ का इतना ढिंढोरा पीटा जाता है, उसके बावजूद ज्यादा लंबे वक्त का रुझान 'बुढ़ाते भारत’ की तरफ है. बुजुर्गों के अकेले या अपने जीवनसाथी के साथ रहने का रुझान भी बढ़ रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुदैर्घ्य (लांगीट्यूडनल) आयु वृद्धि अध्ययन 2021 के मुताबिक, 45 साल की उम्र से ऊपर के 72,250 लोगों में से 60 वर्ष से ऊपर के 5.7 फीसद लोग अकेले और 20.3 फीसद अपने जीवनसाथी के साथ रह रहे थे (देखें, कैसे रहते हैं बुजुर्ग).
ऐसी जनसांख्यिकी के साथ कारोबारी मौके क्या बहुत पीछे रह सकते हैं? इस उभरते ग्राहक आधार को ध्यान में रखते हुए उद्यमी बुजुर्गों की कुशलता के साथ उनकी जीवनशैली की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली पेशकश विकसित कर रहे हैं. इसलिए चाहे वह आवास हो या स्वास्थ्य देखभाल या सुविधा सेवाएं, पहनी जा सकने वाली टेक्नोलॉजी, जीवनशैली उत्पाद, यात्रा, मनोरंजन या वित्तीय उत्पाद हों, हर पेशकश में एक सुनहरी धार है.
कंसल्टिंग फर्म पीडब्ल्यूसी का अनुमान है कि भारत में बुजुर्ग अर्थव्यवस्था 10-15 अरब डॉलर (83,300-1.25 लाख करोड़ रुपए) का बाजार बन चुकी है, जिसका इसके तमाम सेग्मेंट में साल दर साल 13-15 फीसद की दर से बढ़ना तय है. इनमें होम हेल्थकेयर सेवाएं, सीनियर लिविंग, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट और यात्रा, रुपए-पैसे और सुविधा से जुड़ी गैर-स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं.
पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर और हेल्थकेयर लीडर डॉ. राणा मेहता कहते हैं, ''भारत में एल्डर मार्केट बनिस्बतन नया है, क्योंकि ’90 के दशक के उदारीकरण के बाद की अवधि में संपदा इकट्ठा करने वाले बुजुर्गों की पहली पीढ़ी इस जनसांख्यिकी में दाखिल हो गई है. इस ग्राहक आधार की जरूरतें पूरी करने वाली सेवाओं ने बीते 5-10 साल में सांस्कृतिक स्वीकृति और वित्तीय व्यवहार्यता दोनों दिखाई हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश की रफ्तार तेज होगी.’’
होम रन
ओल्ड-एज होम की बात कीजिए, तो एक ऐसी अवसादग्रस्त रिहाइश की तस्वीर दिमाग में आती है जिसमें अपने हाल पर छोड़ दिए गए माता-पिता कंगाली और वीरानी में जिंदगी के आखिरी दिन बिता रहे हैं. इस नियति को कई माता-पिता पहले से रोक रहे हैं. बीते दशक के दौरान बदलती मानसिकता और खर्च योग्य आमदनी में बढ़ोतरी की बदौलत उनमें से कई और खासकर उच्च मध्य वर्ग और उच्च आय वाले तबकों के बुजुर्ग रिटायरमेंट कम्यूनिटीज या सेवानिवृत्ति समुदायों मंस स्वतंत्र जीवनयापन पर विचार कर रहे हैं.
पीडब्ल्यूसी का अनुमान है कि बुजुर्गों के लिए बनाए गए मकान कुल बाजार का 10-15 फीसद हिस्सा हैं.
बहत्तर वर्षीया रेवती भास्कर के पास अपने फैसले पर पछतावे की कोई वजह नहीं है. एक दशक पहले वे और उनके (अब दिवंगत) पति एस.के. भास्कर बैंक की नौकरी से उनके सेवानिवृत्त होने के बाद कोवइ कोयंबत्तूर के हरे-भरे परिवेश में रहने आ गए. वे कहती हैं, ''हमने अपनी ज्यादातर जिंदगी मुंबई में बिताई. मगर बड़े शहरों में कोई बमुश्किल ही दूसरों से बात करता है.
अक्सर आपको पता नहीं होता कि बगल में कौन रहता है.’’ उन्हें लगता है कि सीनियर लिविंग कम्यूनिटी इस नजरिए से अलग हैं. वे कहती हैं, ''हर कोई रिटायरमेंट और बुढ़ापे के जरिए एक साथ जुड़ा है. परेशानियां मिलती-जुलती और हमदर्दी ज्यादा है. ऐसा कोई नहीं जिसे प्रभावित किया जाए और न ही कोई उम्मीद है जिसे पूरा किया जाए. इसलिए सभी विस्तारित परिवार की तरह साथ रहते हैं, एक दूसरे के सुख-दुख में हिस्सा लेते हैं.’’
इसी जज्बे को आगे बढ़ाते हुए रियल एस्टेट डेवलपर रिटायरमेंट होम को बुजुर्गों के लिए जीवनशैली के नए विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं और अलग-अलग कीमतों के विकल्पों की पेशकश कर रहे हैं. उत्तर में दिल्ली एनसीआर सीनियर लिविंग कम्यूनिटी का बड़ा केंद्र है, तो दक्षिण में खासकर चेन्नै, कोयंबत्तूर और बेंगलूरू में ऐसी संपत्तियों की बहुतायत है.
देहरादून में अंतरा बिल्कुल अलग हटकर है. यह उच्च निवल संपदा वाले ग्राहकों की जरूरतें पूरी करता है, जहां एक घर की औसत कीमत 3.5 से 4 करोड़ रुपए के बीच है, जो आकार पर निर्भर करती है. वहीं आशियाना सीनियर लिविंग, प्राइमस सीनियर लिविंग होम्स, कोलंबिया पैसिफिक कम्यूनिटीज और कोवइकेयर सरीखी दूसरी ज्यादातर कंपनियां किफायती दरों पर अपार्टमेंट की पेशकश करती हैं.
इसलिए राजस्थान के भिवाड़ी में आशियाना का 1बीएचके अपार्टमेंट 40 लाख रुपए और 3 बीएचके अपार्टमेंट 85 लाख रुपए में मिल जाता है, तो कोयंबत्तूर में कोवइकेयर का रिटायरमेंट होम 1,000 वर्ग फुट की 2 बीएचके विला 70-80 लाख रुपए में देता है. अपार्टमेंट की कीमत उसकी बसाहट की जगह, अपार्टमेंट के आकार और दी जा रही सेवाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं.
आशियाना हाउसिंग के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर गुप्ता का कहना है कि ऐसी संपत्ति की मांग करने वाले उपभोक्ता वे हैं जिनकी निवल संपदा रिटायरमेंट के वक्त 3-10 करोड़ रुपए और मासिक आमदनी करीबन 50,000 रुपए से 1.5 लाख रुपए के बीच है.
ये अपार्टमेंट किसी भी दूसरी संपत्ति की तरह खरीदे और बेचे जा सकते हैं. अलबत्ता रहने वाले की उम्र 55 साल से ज्यादा होनी चाहिए. मकान मालिक की मृत्यु की स्थिति में नॉमिनी अपार्टमेंट को रखने, किराये पर देने या फिर से बिक्री के लिए रखने का विकल्प चुन सकता है.
रियल एस्टेट प्रदाता ब्रोकरेज शुल्क के बदले फिर से बेचने में मदद कर सकते हैं. अंतरा, देहरादून में मकान 60 साल की लीज अवधि पर बेचे जाते हैं, जिसे 10,000 रुपए चुकाकर हर 15 साल में बढ़ाया जा सकता है. लीज पर लेने वाले की मृत्यु होने की स्थिति में लीज अतिरिक्त लागत के बिना नॉमिनी को हस्तांतरित कर दी जाती है.
अंतरा सीनियर लिविंग के सीईओ और एमडी रजित मेहता का कहना है कि उम्र की पाबंदी के चलते ग्राहक आधार सीमित होने के बावजूद इस सेग्मेंट में तमाम डेवलपर की दिलचस्पी बढ़ रही है, क्योंकि सीनियर लिविंग सुविधाओं को दूसरे आवासों के मुकाबले 20-30 फीसद प्रीमियम मिलता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन घरों को बुजुर्गों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.
वे कहते हैं, ''इन्हें बुढ़ापे के अनुकूल बनाने के लिए बुनियादी ढांचा सावधानी से डिजाइन किया गया है.’’ अंतरा में घर अमेरिकन विद डिसएबिलिटी ऐक्ट (एडीए) के दिशानिर्देशों के मुताबिक बनाए गए हैं, जिनमें व्हीलचेयर की सहूलत, ऐंटी-स्किड टाइल, बिस्तर के पास और शौचालयों में दीवार पर पकड़ने के लिए सलाखें, आपातकालीन कॉल बटन और सेंसर आधारित प्रकाश व्यवस्था दी गई है. स्विचों की ऊंचाई, बाथरूम के दरवाजे के ताले और रोशनी का स्तर सावधानी से चुने गए हैं. रेजिडेंट डॉक्टर, चौबीसों घंटे नर्सिंग, आपातकालीन प्रणाली, हाउसकीपिंग, रखरखाव, बुजुर्गों के अनुरूप खाने के विकल्प अब सीनियर लिविंग होम में आम बात हैं.
इसका मतलब यह हो सकता है कि यहां रखरखाव का मासिक खर्च उन आम सोसाइटियों के मुकाबले कुछ ज्यादा हो जहां प्रति वर्ग फुट 2 रुपए से 5 रुपए के बीच वसूला जाता है. इसके विपरीत अंतरा देहरादून में रखरखाव का शुल्क 27 रुपए प्रति वर्ग फुट है, जो अपार्टमेंट के आकार के हिसाब से 47,000 रुपए से 75,000 रुपए के बीच पहुंच जाता है, उस पर टैक्स अलग. अंतरा नोएडा बनिस्बतन सस्ता है, जहां रखरखाव के लिए प्रति वर्ग फुट 6 रुपए से 8 रुपए के बीच वसूला जाता है, जो कुल मिलाकर 13,000 रुपए से 22,000 रुपए के बीच पड़ता है (देखें: एक जगह अपनी-सी).
सीआइआइ की सीनियर केयर इंडस्ट्री रिपोर्ट ने 2018 में बुजुर्गों के आवास की मांग 3,00,000 होने का अनुमान लगाया था, जिसमें आपूर्ति 90 समुदायों और 20,000 इकाइयों तक सीमित थी. तब से मांग बढ़ी ही है. इसलिए अंतरा बेंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नै, पुणे, गोवा और चंडीगढ़ में अगले 4-5 साल में 4,500 अपार्टमेंट बनाने के लिए 200 करोड़ रुपए के निवेश का मंसूबा बना रही है.
इसी तरह आशियाना हाउसिंग इस साल का अंत 500 इकाइयों के साथ करेगी, अगले तीन साल में अपनी बिक्री हर साल 900 इकाइयों तक बढ़ाने का मंसूबा बना रही है. आशियाना के जेएमडी, जो एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (एएसएलआइ) के सह-संस्थापक और चेयरमैन भी हैं, कहते हैं, ''सीनियर लिविंग कंपनियों के लिए 30-40 फीसद की वृद्धि असामान्य बात नहीं है.’’
आपकी सेवा में
हालांकि यह सब स्वतंत्र घरों की पेशकश से शुरू हुआ था, पर समय से साथ कोवइकेयर, आशियाना, अंतरा और दूसरे खिलाड़ियों ने अपने बुजुर्ग वासियों को उनकी अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से देखभाल मुहैया करने के लिए विस्तार किया. दक्षिण भारत में फिलहाल 1,000 निवासियों को सेवा दे रही कोवइकेयर के संस्थापक और एमडी कर्नल अचल श्रीधरन कहते हैं, ''आपके निवासियों में निश्चित बीमारियां विकसित होती हैं, तो सेवा प्रदाता होने के नाते उन बीमारियां को संभालने में उनकी सहायता से आप मुंह नहीं मोड़ सकते.’’
वजह जानने के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं. भारतीय ज्यादा लंबे वक्त तक जी रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक औसत जीवनकाल 1970 में 47.7 साल से बढ़कर 2020 में 69.6 साल हो गया.
दिल्ली के बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में आंतरिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख तथा प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल का कहना है कि बुजुर्गों में कई बीमारियां मध्य आयु से जड़ पकड़ती हैं, चाहे डायबिटीज हो या उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां, हड्डी और जोड़ों के मसले या देखने और सुनने की परेशानियां. बीमारियों को संभालने के लिए अब जितने साल मदद की जरूरत होती है, उनकी संख्या भी बढ़ गई है.
यही वह जरूरत है जिसका जवाब चेन्नै स्थित अतुल्य असिस्टेड लिविंग सरीखी विशिष्ट कंपनियां चेन्नै, कोच्चि, बेंगलूरू और कोयंबत्तूर में फैले अपने आठ केंद्रों के साथ दे रही हैं. इसके मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कार्तिक नारायण बताते हैं कि असिस्टेड लिविंग या सहायता-प्राप्त जीवनयापन को चार व्यापक श्रेणियों में बांटा जाता है—मोटे तौर पर आत्मनिर्भर बुजुर्ग जिन्हें फिर भी रोजमर्रा के कामों के लिए मदद की जरूरत है, डिमेंशिया या मनोभ्रंश से ग्रस्त बुजुर्ग जो अकेले नहीं रह सकते.
ऑपरेशन के बाद की देखभाल और पुनर्वास की जरूरत वाले बुजुर्गों के लिए देखभाल, और गहन चिकित्सा उपचार नहीं करवाने का फैसला करने वाले गंभीर रोगों से ग्रस्त बुजुर्गवारों के लिए दर्दनाशक देखभाल. घर के मालिकाने के मॉडल पर काम करने वाले रिटायरमेंट होम के विपरीत असिस्टेड लिविंग जगहें किराये के मॉडल पर काम करती हैं, जहां लोग कमरा किराये पर ले सकते हैं.
अतुल्य में किराया प्रति माह 55,000 रुपए से 75,000 रुपए के बीच और अंतरा केयर होम में 1.25 लाख रुपए से 1.5 लाख रुपए के बीच है, जो इस पर निर्भर करता है कि संपत्ति कहां है, किस प्रकार का कमरा लिया है और कौन-सी सेवाएं ली हैं.
अतुल्य में रहने वालों में 87 वर्षीय कण्णन वी. भी हैं, जो पत्नी के गुजर जाने और अकेले रहना मुश्किल हो जाने के बाद चार साल पहले उनके चेन्नै सुविधाकेंद्र से यहां आए. वे कहते हैं, ''कोई अपना घर छोड़ना नहीं चाहता, पर हमारी उम्र के लोगों के लिए कभी-कभी बिस्तर से बाहर आना या डिलिवरी लेने के लिए दरवाजा खोलना तक मुश्किल होता है. ऐसे में इस सरीखी असिस्टेड लिविंग जगहें हमारे लिए राहत की तरह हैं.’’
कण्णन को कॉल बेल सिस्टम, जो सार्वजनिक स्पीकर प्रणाली है, बहुत काम की लगती है. गर्म पानी की बोतल मंगवाने या आपातस्थिति की इत्तला देने सरीखे छोटे-मोटे काम करवाने के लिए वे इसे दबा सकते हैं. वे कहते हैं, ''मिनटों में सहायता आ जाती है.’’ डॉक्टर के पास या बैंक जाते वक्त वे उनकी एस्कॉर्ट सर्विस का भी फायदा उठाते हैं, जो 100 रुपए प्रति घंटे के न्यूनतम शुल्क पर मिल जाती है.
कण्णन अतुल्य में ज्यादा लंबे वक्त से हैं, वहीं सरकारी स्कूल की पूर्व टीचर 68 वर्षीया रत्ना घोष ने अस्पताल में भर्ती होने के बाद के स्वास्थ्य लाभ के लिए गुरुग्राम के अंतरा केयर होम को चुना. वे कहती हैं, ''मुझे फेफड़े और दिल की परेशानियां हैं और हाइपरटेंशन भी है, इसलिए मुझे जीवनदायी अंगों पर सतत निगरानी, आहार की जररूतों और चलने-फिरने में सहायता के साथ पूरी देखभाल की जरूरत थी, जो घर पर मुमकिन नहीं थी.’’ घर पर हमेशा कोई न कोई उनका ध्यान बंटाता रहता. घर से दूर रहकर वे पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान दे सकती हैं.
होम हेल्थकेयर
पीडब्ल्यूसी इंडिया के अनुमान से एल्डरकेयर मार्केट मंत इस सेग्मेंट की सेवाओं की हिस्सेदारी करीब 40 फीसद है. शीर्ष अस्पताल इन सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं, जिनमें अपोलो, मेदांता, सर गंगा राम, और इनके अलावा पोर्टिया मेडिकल, मेडरैबिट्स और एचसीएएच सरीखे होम केयर प्रदाता हैं. वे बुजुर्गों सहित सभी आयु समूह के उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी करते हैं. फिर होम केयर प्रदाता भी हैं जिनका लक्ष्य खास तौर पर बुजुर्गों को सेवा देना है.
उनमें एमोहा, एल्डरएड और समर्थ हैं. होम अटेंडेंट, नर्स, फिजियोथिरैपी, लैब कलेक्शन और यहां तक कि घर पर आइसीयू लगाने सरीखी क्लिनिकल सेवाओं की पेशकश से शुरू करके समय के साथ उन्होंने अपनी सेवाओं का विस्तार किया और घर के रखरखाव (नल के काम, बिजली के काम, घर की देखभाल), शौफर और यात्रा में सहायता सरीखी सुविधा सेवाएं, टेलीकंसल्टेशन और लैपटॉप व स्मार्टफोन के लिए टेक्नोलॉजी की सहायता सरीखी गैर-नैदानिक सहायता भी देने लगे.
एमोहा एल्डर केयर के सह-संस्थापक और सीईओ सौम्यजीत रॉय कहते हैं, ''घर पर देखभाल की सेवाएं प्रदान करने के पीछे इरादा ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का है जो बुजुर्गों के लिए उनके घर की सुख-सुविधाओं में काम करे और जिसके बल पर वे आत्मनिर्भर जिंदगी जी पाएं.’’ चार से कुछ ज्यादा साल के कारोबार में एमोहा ने 120 शहरों और कस्बों में 60,000 बुजर्गों को सेवा प्रदान की.
उनके मॉडल में बुजुर्ग की नियमित जांच का काम स्थानीय इलाके के देखभाल करने वाले शख्स को सौंपना, उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को समझना और जरूरी सहायता का इंतजाम करना शामिल है. बहत्तर वर्षीया शिक्षाविद् और चाइल्ड काउंसलर रश्मि गौतम को जब इस मार्च में पेट की समस्याएं महसूस हुईं तो इन्हीं के पास आईं और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.
उनके दोनों बच्चे विदेश में हैं और वे गाजियाबाद में अकेले रह रही थीं. पूरे वक्त का एक सहायक उनके पास था, पर वह संयोग से छुट्टी पर गया था. एमोहा के केयरगिवर ने अस्पताल में जांच करवाने, भर्ती होने और बीमे में उनकी मदद की, जब तक कि अगले दिन सिंगापुर से उनकी बेटी नहीं आ गई. रश्मि कहती हैं, ''उन्होंने पूरी तरह संभाल लिया. असल में मुझे उन पर इतना भरोसा था कि मैंने अपने पिन भी उन्हें बता दिए. मैंने जो गहने पहने थे, वह भी उन्हें सौंप दिए, जिसे उन्होंने सुरक्षित मुझे लौटा दिए.’’
दरअसल, बुजर्गों के जीवनयापन से जुड़ी अंतरा और कोवइकेयर सरीखी कंपनियों ने अपनी नैदानिक और गैर-नैदानिक सेवाओं का विस्तार अब न केवल अपने यहां रहने वालों बल्कि उन शहरों के अन्य बुजुर्गों के लिए भी किया है जहां वे काम करती हैं. कोवइकेयर ने इस जुलाई में चेन्नै में बुजुर्गों के लिए होम और हेल्थ मैनेजमेंट सर्विस नग्मा जिनी लॉन्च की और अगले साल इसे कोयंबत्तूर, मैसुरू, बेंगलूरू और हैदराबाद में शुरू करेगी.
अकेलेपन को हराना
एमोहा के रॉय कहते हैं, ''बुजुर्गों की देखभाल को अक्सर बीमारी के चश्मे से देखा जाता है. सबसे बुनियादी सवाल यह पूछा जाता है कि 'आप ठीक हो?’ मगर 'ठीक हो’ के तो कई आयाम हैं.’’ उनका यह भी कहना है कि देखभाल की जरूरतों में शारीरिक सेहत का हिस्सा महज 20 फीसद है; बाकी सामाजिक, मानसिक और मनोवैज्ञाविक जरूरतें हैं.
मेडिकल जर्नल द इंटरनेशनल जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक साइकिएट्री में 2021 में प्रकाशित अध्ययन से पता चला कि भारत में 45 साल से ऊपर के 20.5 फीसद वयस्कों ने मध्यम अकेलापन, और 13.3 फीसद ने गंभीर अकेलापन बताया. मनोचिकित्सक और दिल्ली के मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान के पूर्व डायरेक्टर डॉ. निमेश देसाई कहते हैं, ''मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं, जिन्हें संग-साथ के लिए बनाया गया है.
अपनेपन और समुदाय की भावना से मानसिक कुशलता में काफी सुधार हो सकता है.’’ कई अध्ययनों से मानसिक सेहत पर अकेलेपन के नकारात्मक प्रभावों का पता चला. यह सीधे तनाव का कारण बन सकता है और अवसाद, दुश्चिंता, मनोभ्रंश और अलजाइमर्स सरीखी बीमारियों के आगमन को तेज कर सकता है.
बुजुर्गों की भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इनमें से कई सेवा प्रदाता उन्हें आयोजनों, शिक्षण कार्यक्रमों, सामाजिक समारोहों वगैरह में हिस्सा लेने के मौके देते हैं, ताकि न केवल उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो बल्कि वे भूले-बिसरे शौक और जुनून को आगे बढ़ा सकें.
इस तरह आशियाना, अंतरा और कोवइकेयर बुजुर्गों को हर दिन 2-3 गतिविधियों की पेशकश करती हैं. अंतरा देहरादून में जिस दिन देव आनंद की फिल्में दिखाई जा रही थीं, लोगों ने चेयर योगा सुबह ही खत्म कर लिया. गुप्ता बताते हैं कि आशियाना में लोगों के लिए करीब 150 गतिविधियां होती हैं, जिनमें संगीत, नृत्य, टेबल टेनिस और ताश के पत्ते सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं.
पिछले पांच साल से भिवाड़ी के आशियाना निर्मय में रह रही 70 वर्षीया अंजुला राय चौधरी बताती हैं कि वे धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और खेल सहित कई तरह की गतिविधियां पेश करते हैं. वे कहती हैं, ''अपनी दो बेटियों की परवरिश, पूरे वक्त की नौकरी, और बूढ़ी मां की देखभाल करते हुए मेरे पास दूसरी चीजों के लिए वक्त ही नहीं था.’’ आशियाना में उन्होंने नाटकों में अभिनय शुरू किया और पांच नाटकों में हिस्सा ले चुकी हैं. उनके पति मृणाल कीबोर्ड के सबक ले रहे हैं और अक्सर उनकी साप्ताहिक संगीतमय शामों में प्रस्तुति देते हैं.
होम एल्डरकेयर फर्म समर्थ एल्डरकेयर के सह-संस्थापक आशीष गुप्ता कहते हैं, ''बकेट लिस्ट की अवधारणा उनके लिए बहुत वास्तविक है, और वे लोगों से बात करने और नई जगहों की खोजबीन को लेकर उत्साहित हैं.’’ उनके केयर काउंसलर आते हैं और भूले-बिसरे शौक पूरे करने, नजदीकी एनजीओ में स्वैच्छिक काम करने और समुदाय के भीतर संबंध बनाने में मदद करने के लिए बुजुर्गों के साथ मिलकर काम करते हैं. वे सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करते हैं और उनके पैकेज प्रति माह 7,500 रु. से 15,000 रु. के बीच होते हैं.
एमोहा ने अपनी सेवाएं ऐप के इर्द-गिर्द डिजाइन की हैं, क्योंकि ज्यादा बुजुर्ग स्मार्टफोन के डर से उबर रहे हैं. उनका सबसे लोकप्रिय फीचर एमओएचटीवी या मोहटीवी है, जो हड्डियों की सेहत के बारे में डॉक्टर से बातचीत, घरेलू उपायों, पेट की सेहत, मैजिक शो, सांस लेने की तकनीकों और चक्र आरोग्य पर कार्यशालाओं सहित 4,000 से ज्यादा पेशकश करता है.
रियल-टाइम सत्र ज्यादा दिलचस्पी जगाते हैं. करीब 500 वयस्क सुबह के जरूरी कामकाज निबटाकर 7.30 बजे सुबह के व्यायाम सत्र के लिए स्क्रीन के सामने आ जाते हैं. सबसे ज्यादा वे जिस चीज का इंतजार करते हैं, वह लय में आने से पहले एक दूसरे के साथ 15 मिनट की गपशप है. बचपन के किस्सों से बातचीत शुरू होती है और सेहत से लेकर बिना तैयारी के गानों तक बहती जाती है.
सेवा प्रदाता इस बात के लिए भी ग्राहकों को समझाते हैं कि रुचियों के आधार पर ऐसे सामाजिक और सहायता समूह बनाएं जो एकजुटता की भावना को मजबूत करने में मदद करे. रश्मि बताती हैं कि एमोहा में बॉलीवुड ग्रुप लोकप्रिय सामाजिक समूह है. वे उनके सांस्कृतिक कार्यक्रम में 13 बार प्रस्तुति दे चुकी हैं और उत्साह से बताती हैं, ''मुझे एमोहा की बॉलीवुड क्वीन कहा जाता है.’’
इन सेवाओं के अलावा विशिष्ट सेवाएं देने वाले स्टार्ट-अप भी हैं. रतन टाटा समर्थित गुडफेलोज सेवा के तौर पर बुजुर्गों को संग-साथ प्रदान के लिए युवाओं की सेवाएं लेता है. विजडमसर्किल 50 वर्ष से ऊपर के लोगों को अपने सुनहरे साल में नौकरी खोजने और प्रासंगिक महसूस करने में मदद करता है.
सैर-सपाटा
अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद बुजुर्ग लोगों के पास अब अपने पर खर्च करने के लिए समय और पैसा है. और यात्रा इस आजादी का अहम हिस्सा है, क्योंकि जेन एस पूरे जोश-खरोश से अपने जुनून को पूरा करती है और अपनी भ्रमण पिपासा के आगे घुटने टेकने में कतई संकोच नहीं करती. वाराणसी के 74 वर्षीय पूर्व सेल्स और मार्केटिंग पेशेवर प्रेम नारायण पांडेय अपनी पत्नी मधु पांडेय के साथ सिल्वरविंग्ज सीनियर ग्रुप हॉलीडेज के मार्फत सात यात्राओं पर गए. वे कहते हैं, ''हम आजाद हैं अब और दुनिया देखना चाहते हैं जब तक हमारी सेहत इजाजत देती है.’’
केवल सीनियर ग्रुप हॉलीडेज क्यों? आरामतलब गति, शांत जगहों को तरजीह और खान-पान की उनकी वरीयताओं के अनुरूप उनके हिसाब से तय व्यंजनों की उम्मीद. फ्रॉस्ट ऐंड सुलिवन की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत में बुजुर्ग यात्रियों की संख्या 2030 तक सात गुना बढ़कर 73 लाख हो जाने की उम्मीद है. गृहनगरों से दूर चले गए अपने बच्चों से बुजुर्गवारों के मिलने जाने से भी यात्राओं में इजाफा होगा.
बुजुर्गों के लिए हॉलीडे पैकेज पेश करने वाली केयरवॉयेज की संस्थापक शेफाली जैन मिश्रा कहती हैं, ''बुजर्गों का सबसे बड़ा विवेकाधीन खर्च यात्रा है.’’ दबी हुई मांग की बदौलत कोविड के बाद बीते दो साल में उनकी तरफ से होने वाली पूछताछ में 30 फीसद से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. महिंद्रा हॉलीडेज ऐंड रिजॉर्ट्स इंडिया ने 2017 में सीनियर सिटिजन के लिए सदस्यता उत्पाद ब्लिस भी लॉन्च किया था.
शेफाली कहती हैं कि न्यूयॉर्क में बंजी जंपिंग न भी हो तो हॉट एयर बैलूनिंग या स्पीड बोट की सवारी तो निश्चित रूप से होनी चाहिए. साल में ऐसी 3-4 यात्राएं करने वाले नई दिल्ली स्थित साउंड ऐंड वाइब्रेशन इंस्ट्रूमेंटेशन फर्म बेसलाइन टेक्नोलॉजीज के प्रमोटर 73 वर्षीय नवीन आनंद कहते हैं, ''रोमांच का बोध उम्र के साथ नहीं बदलता. दरअसल, आपको लगता है कि बहुत देर होने से पहले आप यह कर लेना चाहते हैं.
पैंट ऊपर मोड़कर अरुणाचल की नदी के ठंडे पानी में नंगे पांव चलना आज भी उतना ही रोमांचक है जितना पहले था.’’ आनंद दोस्तों के साथ मिस्र की ट्रिप का मंसूबा बना रहे हैं. पिछले साल अप्रैल में वे अरुणाचल और अगस्त में जॉर्जिया और अजरबैजान गए थे. वहीं नारायण पांडेय बाली जा रहे हैं.
खर्च करने से कौन डरता है?
बच्चे जब अच्छी तरह रच-बस गए हैं और खर्च करने योग्य ज्यादा आमदनी हाथ में है, जेन एस ज्यादा सोचता नहीं है. ई-टेलर सीनियरिटी डॉट इन (जिसका अधिग्रहण हाल में होम हेल्थकेयर सेवा प्रदाता एचसीएएच ने किया) वरिष्ठ नागरिकों के लिए सजने-संवरने की जरूरी चीजों से लेकर स्प्लिंट और एडल्ट डायपर तक 10,000 से ज्यादा हेल्थ और लाइफस्टाइल उत्पादों की शृंखला पेश करती है. एचसीएएच इंडिया के सह-संस्थापक और सीईओ विवेक श्रीवास्तव कहते हैं, ''जीरो ब्लॉक, एडल्ट डायपर, मसाजर और व्हीलचेयर हमारे शीर्ष बिकने वाले उत्पाद हैं.’’
संपन्न बुजुर्गों के शौक पूरे करने के लिए उत्पादों और सेवाओं की कोई कमी नहीं. मगर बुजुर्ग आबादी का बड़ा हिस्सा कम आय वर्ग से आता है, और इसी मामले में सरकार और नियामकों को बुजुर्गों के अनुकूल समाज बनाने की जरूरत है, जिसमें फुटपाथ, सहज सुलभ बीमा, सस्ती स्वास्थ्य देखभाल, व्हीलचेयर की सुलभता और बुजुर्गों के अनुकूल परिवहन मौजूद हो. तभी सभी क्षेत्रों के बुजुर्ग गरिमापूर्ण जिंदगी बसर कर सकेंगे.