''आफताब-सा उदार और धरती की तरह सत्कारवान बनें’’

खुद्दाम-ए-ख्वाजा सूफी समुदाय के रूहानी बुजुर्गों ने हमें हमेशा यही सिखाया कि दरगाह आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसके नाम, धर्म, आस्था या जन्मभूमि के बारे में कभी न पूछें.

हाजी सैयद सलमान चिश्ती
हाजी सैयद सलमान चिश्ती

खुशी की खोज : गुरुवाणी

हाजी सैयद सलमान चिश्ती

अगर आप जनसामान्य में बेहद सम्मान प्राप्त ऐतिहासिक अजमेर शरीफ दरगाह के आसपास के इलाके में पले-बढ़े हों तो आपको पता ही होगा कि मुल्क के विभिन्न हिस्सों से लोग वहां दुआएं मांगने पहुंचते हैं. ये लोग अलग-अलग धर्म-संप्रदायों के होते हैं, अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं और अलग-अलग परंपराओं और सांस्कृतियों को मानने वाले होते हैं.

हम दरगाह शरीफ आने वाले सभी लोगों की खिदमत करना अपनी खुशनसीबी मानते हैं. खुद्दाम-ए-ख्वाजा सूफी समुदाय के रूहानी बुजुर्गों ने हमें हमेशा यही सिखाया कि दरगाह आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसके नाम, धर्म, आस्था या जन्मभूमि के बारे में कभी न पूछें. पूछना ही है तो अजमेर दरगाह दरबार शरीफ आने वाले इन जायरीन से यही पूछें कि उनकी खिदमत कैसे कर सकते हैं?

ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की सबसे बड़ी शिक्षा यही है कि सच्ची खुशी खालिक (क्रिएटर) की नजदीकी हासिल करने की कोशिश में ही मिलती है. इसे हासिल करने के लिए किसी को भी बिना शर्त प्रेम, करुणा के साथ-साथ समान भाव से सभी की सेवा करने में खुद को समर्पित कर देना होता है. हमें प्रकृति के गुणों से सीखकर सूरज की तरह दयालु, नदी की तरह उदार और पृथ्वी की तरह सत्कारशील बनना चाहिए.

असल उद्देश्य तो यही है कि रूहानी स्तर पर एक अलग मुकाम हासिल कर सकें. और खुद को अपने खालिक के हवाले करके ही हम यह लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. इसके बाद जीवन में आने वाले तमाम उतार-चढ़ाव हमें मामूली ही लगेंगे क्योंकि भौतिक संसार तो फानी है.

आपमें यह बदलाव न तो एक दिन में आएगा और न ही ऐसा करना आसान होगा. पर एक बेहतर, खुशहाल जीवन के लिए अगर अभी छोटे-छोटे कदम उठाने शुरू करेंगे तो आगे की राह कम मुश्किल होगी.

हदीस कुद्सी में खुदा ने फरमाया है, 'तुम मेरी तरफ एक कदम बढ़ाओ, मैं तुम्हारी तरफ 10 कदम बढ़ाऊंगा. तुम मेरी तरफ चलकर आओगे तो मैं तुम्हारी ओर दौडूंगा.’ तो पहला कदम बढ़ाओ! आगे चलने की ताकत देने के लिए अल्लाह हमेशा आपके साथ मौजूद रहेगा. इंशा अल्लाह.

खुशी के सूत्र
''पहला कदम उठाओ. अल्लाह आपको इतनी ताकत अता फरमाएगा कि आपका सफर आगे जारी रहे’’.

(हाजी सैयद सलमान चिश्ती दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन और चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हैं)

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