जीवन में संतोष का रसायनशास्त्र

ऑक्सीटोसिन अंतरंग क्षणों के दौरान भी प्रेमियों के बीच मुक्त होकर बहता है, जब आप अपने मित्र के साथ बंधे होते हैं, और तब भी जब आप अपने पालतू जानवर से लिपटते हैं या अपने पौधों को प्यार करते हैं.

भरत ठाकुर
भरत ठाकुर

खुशी की खोज : गुरुवाणी

भरत ठाकुर

संतोष के इतने सारे आयाम, घटक, रस और स्वाद हैं कि इसे परिभाषित करना कठिन है, खासकर क्रियात्मक और भौतिक शब्दावली में. इसका कुल अर्थ इन सबकी अंत:क्रियाएं और उनसे उत्पन्न विशुद्ध प्रभाव है. यहां तक पहुंचने के लिए आपके शरीर में हॉर्मोनों का स्राव होता है.

एंडोर्फिन न्यूरोट्रांसमिटर या तंत्रिका संचारक हैं जो शरीर के प्राकृतिक दर्दनिवारक हैं. ये ताकतवर दर्दनाशक हैं जो तनाव और दर्द के जवाब में मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस और पिट्युटरी ग्लैंड या पीयूष ग्रंथि से निकलते हैं. लंबी दूरी की दौड़ लगाते वक्त मुमकिन है आप थकान से चूर होकर रुकना चाहें.

पर अगर आप दौड़ते रहें तो ऊर्जा में उछाल महसूस करते हैं. इसे 'धावक का नशा’ कहा जाता है. जब आप अपनी सीमा से बढ़कर कोई काम करते हैं तो एंडोर्फिन का स्राव होता है, ताकि आप दर्द को अनदेखा कर वह काम करते रहें. नियमित व्यायाम, योग, तेज चाल, धूम में रहना, ध्यान, संगीत, नृत्य, ठहाके और अंतरंगता एंडोर्फिन की राह को सुदृढ़ और सक्रिय बनाए रखते हैं.

डोपामाइन भी न्यूरोट्रांसमिटर है. जब हमें भूख लगती है, हम मनपंसद भोजन लेते हैं, यह सोचकर कि इससे हमारी भूख मिटेगी. मिटने पर यह काम हमें सुखद लगता है और हम इस तरह ढल जाते हैं कि भूख लगने पर हमारा हाथ भोजन की तरफ बढ़ता है. यह सुख डोपामाइन के स्राव से प्राप्त होता है.

जब हम पहली बार कोई पहेली हल कर लेते हैं तो उसे महसूस करके अच्छा लगता है. लेकिन यही नशा तब नहीं महसूस होता जब हम इसे दोहराते हैं. इसलिए हम नए नशे को तरसते हैं. डोपामाइन आपके भीतर सीखने की भूख भी जगाता है और आपको चौकस बनाता है, यह आपकी याददाश्त को तेज बनाए रखता है और आपको अत्यधिक आत्मविश्वास देता है.

सेरोटोनिन को 'हैपी हॉर्मोन’ कहा जाता है. यह मुख्य ''फीलगुड’’ रसायन है क्योंकि यह हमारी मनोदशाओं को दुरुस्त करने में जबरदस्त भूमिका निभाता है. अगर सेरोटोनिन सामान्य स्तर पर है, तो आप केंद्रित, भावनात्मक रूप से स्थिर, आशावादी और शांत महसूस करते हैं.

इसके उलट निम्न स्तर को डिप्रेशन या अवसाद से जोड़कर देखा जाता है. आपको पता है? शरीर का 90 फीसद सेरोटोनिन आंत में बनता है, जहां यह आपके बॉवेल फंक्शन को नियंत्रित करता है और पाचन की रफ्तार तेज करता है. यह हमें अच्छे भोजन के बाद तृप्ति का एहसास देता है और अपने पसंदीदा खाने के लिए भी 'बस’ कहने को मजबूर कर देता है.

ऑक्सीटोसिन को 'लव हॉर्मोन’ कहा जाता है, क्योंकि यही वह हॉर्मोन है जो मां और शिशु के बीच बंधन को पुख्ता करता है. जब भी मां शिशु को दूध पिलाती है, ऑक्सीटोसिन मां के रक्तप्रवाह को आप्लावित कर देता है, जिससे जच्चा-बच्चा का बंधन गहरा हो जाता है.

ऑक्सीटोसिन अंतरंग क्षणों के दौरान भी प्रेमियों के बीच मुक्त होकर बहता है, जब आप अपने मित्र के साथ बंधे होते हैं, और तब भी जब आप अपने पालतू जानवर से लिपटते हैं या अपने पौधों को प्यार करते हैं. ऑक्सीटोसिन आपको उन लोगों की ओर खिंचे चले जाने के लिए भी प्रोत्साहित करता है जिनसे आप तादात्म्य महसूस करते हैं और जिनसे नहीं करते उनसे अलग होने के लिए बढ़ावा देता है.

इनमें से हरेक हॉर्मोन हमारी अच्छी भावनाओं के अलग-अलग पहलुओं का ख्याल रखते हैं. हरेक बहुआयामी है और बुनियादी तौर पर हमारे अहम अंगों की सेहत से जुड़ा है. कुदरत हमारी सीधी-सादी पसंद और कार्यों से इन फीलगुड रसायनों को सक्रिय करती मालूम देती है. लगता है भले-चंगे होने का तात्पर्य सूत्र के रूप में उसे समझना या हल करना नहीं बल्कि उसे जीना, महसूस करना और उसमें डूब जाना है.

खुशी के सूत्र
''हमारा सुख और संतोष ऐसी चीज नहीं है जिसे हम किसी फॉर्मूले की तरह क्रैक करके हासिल कर लें, बल्कि हमें उसी में डूबना-उतराना होता है’’.

(भरत ठाकुर आध्यात्मिक गुरु और योग विशेषज्ञ हैं)

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