सुंदरबन के सेवादार

ऐसे बांटी खुशी : घोर गरीबी में जी रहे सुंदरबन के सुदूर तटीय गांवों के लोगों की कुछ बुनियादी जरूरतें पूरी कर रहे हैं बैकुंठपुर तरुण संघ के लोग.

वन मैन आर्मी : सुशांत गिरि सुंदरबन की एक क्रीक में अपनी बोट पर सवार. सुंदरबन में ऐसी बहुतेरी क्रीक हैं
वन मैन आर्मी : सुशांत गिरि सुंदरबन की एक क्रीक में अपनी बोट पर सवार. सुंदरबन में ऐसी बहुतेरी क्रीक हैं

खुशी की खोज

लिवर की बीमारी से पीड़ित सुशांत गिरि की मां तिल-तिल मरीं थीं. पश्चिम बंगाल में सुंदरबन के सुदूर बैकुंठपुर गांव में रहने वाले परिवार के पास उनके इलाज के लिए 49 किलोमीटर दूर स्थित जॉयनगर के निकटतम अनुमंडलीय अस्पताल तक लेकर जाने का कोई साधन उपलब्ध नहीं था. उन रातों को याद करके गिरि की आंखें नम हो जाती हैं जब उनकी मां को असह्य दर्द होता था और वे कुछ दर्द निवारक दवाओं के लिए गांव के नीम-हकीमों के चक्कर लगाते थे.

उनकी मां का निधन जिस दिन हुआ, उसी दिन वे बोर्ड स्कूल परीक्षा का आखिरी पेपर देकर आए थे. अंतिम संस्कार से लौटकर इस 18 वर्षीय युवा ने संकल्प लिया कि वह भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक रूप से बहुत ही वंचित तट के किनारे रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार के लिए कुछ न कुछ जरूर करेगा ताकि उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें. 

सुंदरवन के हजारों वंचित ग्रामीणों को दैनिक जीवन का संघर्ष केवल गरीबी और स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और सड़क व संचार सेवाओं की अनुपलब्धता से होने वाली दिक्कतों से निपटने भर तक सीमित नहीं है, उनका जीवन चक्रवात, अचानक बाढ़, समुद्र के खारे पानी से खेतों की बर्बादी और भूमि का कटाव जैसे प्रकृति के साथ निरंतर चलने वाले संघर्ष से भी भरा हुआ है. 

1983 में स्थानीय एकता यूथ क्लब द्वारा संचालित एक प्राथमिक विद्यालय के साथ, संस्था की शुरुआत बहुत साधारण थी. अपनी शिक्षा छोड़ने को मजबूर वंचित वर्ग के छात्रों के लिए स्कूल के रूप में बैकुंठपुर तरुण संघ (बीटीएस) की शुरुआत हुई. गिरि बताते हैं, ''हमने 25 छात्रों के साथ शुरुआत की थी. हमारा मुख्य उद्देश्य स्थानीय बच्चों को बुनियादी शिक्षा देना और उच्च शिक्षा के लिए उन्हें अच्छे स्कूलों से जोड़ना था.

शिक्षा बहुत कम शुल्क में उपलब्ध कराई जाती थी-5-7 रुपए की ट्यूशन फीस, और दूध के साथ मुफ्त भोजन.’’ आज बैकुंठपुर तरुण संघ लगभग 100 छात्रों के साथ आठवीं कक्षा तक का प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल है. पहले शिक्षक स्वैच्छिक सेवाएं देते थे; लेकिन सहायता और दान मिलने के कारण गिरि अब उन्हें 2,000 रुपए का मासिक मानदेय देने में सक्षम हैं.

आज डॉक्टर, वकील, शिक्षक और नर्स जैसे पेशेवर के रूप में काम करने वाले बीटीएस में 500 पूर्व छात्र हैं जो अपनी मातृ संस्था को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं. वे कहते हैं, ''प्राथमिक विद्यालय 1996 में एफसीआरए (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) पंजीकरण प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कदम था.’’ लेकिन गिरि यहीं नहीं रुके. बीटीएस आज सुंदरबन के सात ब्लॉकों के 14 ग्राम पंचायतों के 52 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं, सामुदायिक विकास और रोजगार सृजन की गतिविधियां चला रहा है. अनुमानत: करीब 55,000 लोग इसके लाभार्थी हैं. 

यूनेस्को ने सुंदरबन को विश्व विरासत स्थल घोषित किया है. इसकी 85 प्रतिशत आबादी बीपीएल श्रेणी में आती है. तटीय क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर में कम से कम 10 प्रतिशत की वृद्धि ने गिरि को राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से एनआरएचएम के तहत एक सामुदायिक प्रसव केंद्र शुरू कराने के लिए प्रेरित किया. पिछले वर्षों में इसने 922 ग्रामीण महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया है.

बीटीएस 10 बिस्तरों वाला मैटरनिटी (प्रसूति) क्लिनिक चलाता है. जिन किसानों के पास केवल एक एकड़ कृषि भूमि है, उन्हें बीटीएस ने पेशेवर सहायता प्रदान की है ताकि उनके खेत सब्जियों और दालों के लिए अत्यधिक उत्पादक खेतों में परिवर्तित हो जाएं. बीटीएस ने ग्रामीणों को उनकी अतिरिक्त जैविक उपज बेचने में भी मदद की है. एकीकृत खेती के दृष्टिकोण ने अब खेती से होने वाली आय को महज 2,500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर तीन गुना कर दिया है.

इन सबके अलावा, प्राकृतिक आपदाएं जो सुंदरबन का अभिशाप हैं, के त्वरित और ऑन-द-स्पॉट प्रतिक्रिया के लिए बीटीएस के पास अपना स्वयं का आपदा कार्य बल है जो मुसीबत में लोगों की मदद करता है. अम्फान और यास चक्रवातों के दौरान, उन्होंने कई लोगों की जान बचाई. सुशांत गिरि आज एक खुशमिजाज आदमी हैं. उनके प्रयासों ने हजारों लोगों का जीवन बदल दिया है.ठ्ठ

बैकुंठपुर तरुण संघ
स्थापना:  1983
सुंदरबन, पश्चिम बंगाल

खुशी के सूत्र
''मैं जब देखता हूं कि स्कूल जाने को मोहताज एक लड़का जब डॉक्टर, वकील, टीचर बनता है या एमएनसी में काम करता है तो खुशी से मेरे आंसू निकल आते हैं’’
—सुशांत गिरि, संस्थापक, बीटीएस

Read more!