फिर भी दिल है इंग्लिश्तानी
भारतीय मूल के पहले ब्रितानी प्रधानमंत्री बनकर ऋषि सुनक ने इतिहास रचा, पर अब उन्हें लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा

अन्य सुर्खियों के सरताज
ऋषि सुनक
प्रधानमंत्री, ब्रिटेन
आप क्या वाकई ये सवाल करेंगे? ऋषि सुनक भारत में सुर्खियों के सरताज इसलिए हैं क्योंकि इंग्लैंड की गद्दी पर विराजमान सुनक गर्व से कलावा पहनने वाले देसी हैं! अक्तूबर में जब सुनक को हिज मैजेस्टी की सरकार का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया, तो हमारे मैजेस्टी अमिताभ बच्चन ने चुटकी ली, ''जय भारत... मातृभूमि से आए प्रधानमंत्री के रूप में ब्रिटेन को अब आखिरकार नया वायसराय मिला.''
कुछ अजीब, थोड़ा भदेस, लेकिन चलो.. कुछ ऐसा ही तो हम सभी सोच रहे थे. लेबर लीडर पॉल बोटेंग ने दूसरे नजरिए से ऐसी ही खुशी जाहिर की, ''ब्रिटेन ने दुनिया को दिखा दिया कि बहु-नस्लीय लोकतंत्र संभव है और यही देखने के लिए मैंने जीवन भर संघर्ष किया है.''
जी हां, उनका जन्म पश्चिमी पंजाब से पूर्वी अफ्रीका के रास्ते साउथेम्प्टन पहुंचे मां-बाप के घर हुआ. लेकिन सच यह है कि ऋषि के प्रधानमंत्री बनने पर ब्रिटेन को नीचा दिखाने की भारतीय खुशी से सभी नस्लों के समानांतर आने की खुशी का यह विरोधाभास वैश्विक नेता के रूप में उन्हें खास बनाता है. मसलन, एक तरफ वे थैचरवादी कंजरर्वेटिव हैं, महामारी के दौरान बतौर चांसलर ऑफ एक्सचेकर (वित्त मंत्री) 'जॉब रिटेंशन स्कीम', लेवलिंग अप और 'ईट आउट टू हेल्प आउट' जैसे कार्यक्रमों से जिसने ईमानदार और सम्माजनक छवि बनाई.
दूसरी तरफ संसाधनों और प्रतिभा (वेस्टमिंस्टर कॉलेज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, नारायण मूर्ति के दामाद, अरबपति, सांता मोनिका में पेंटहाउस वगैरह) के दम पर यहां तक पहुंचे आप्रवासी. 1812 के बाद से ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के पीएम सुनक अक्सर हकीकत से दूर दिखते हैं (क्रिसमस वीडियो में एक बेघर आदमी से पूछना कि क्या वह कारोबारी था), लेकिन ब्रेग्जिट और बोजो के दौर में उनके जोरदार उभार से लगता है कि वे महत्वाकांक्षी हैं और सियासी जोड़तोड़ भी जानते हैं.
प्रधानमंत्री बनने के दो महीने में ही (जो उनकी पूर्ववर्ती से ज्यादा ही है) सुनक कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों के बीच लोकप्रियता खोने लगे हैं और देश लोकमत जनमत सर्वेक्षणों में लेबर नेता कीर स्टारमर से पिछड़ रहे हैं. देश में जीवन-यापन खर्च के गहरे संकट, माइग्रेशन, कराधान और ऊर्जा के पेचीदा मुद्दों से निपटने के लिए सुनक अभी तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि वे अपने दिलचस्प विरोधाभासों से आगे कुछ और भी हैं.
संकट से घिरे सुनक की लोकप्रियता भले टूट रही है, मगर वे ब्रितानी प्रधानमंत्री बने तो भारत खुशी से झूम उठा था