अव्वल आदिवासी

आदिवासी समुदाय से आने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बार-बार वंचित समुदायों के प्रति सरोकार जताती रही हैं.

द्रौपदी मुर्मू , भारत की राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू , भारत की राष्ट्रपति

अन्य सुर्खियों के सरताज

द्रौपदी मुर्मू , भारत की राष्ट्रपति

ओडिशा के मयूरभंज जिले के सुदूर उपरबेड़ा गांव से रायसीना हिल का सफर लंबा और बीहड़ रहा. आदिवासी समुदाय से भारत की पहली राष्ट्रपति होने का अर्थ द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति के रूप में राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में साझा किया, ''इस पद पर पहुंचना मेरी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सभी गरीब लोगों की उपलब्धि है. मेरा चुनाव इसका सबूत है... कि भारत में गरीब सपने देख सकते और उन्हें पूरा कर सकते हैं.’’

मुर्मू आदिवासियों के लिए काम कर रही थीं. बीजेपी के राज किशोर साव ने उनमें जबरदस्त संभावनाएं देखीं, जिनसे पार्टी को आदिवासियों के बीच बढऩे में मदद मिल सकती थी. पार्षद से विधायक और फिर बीजेडी-बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री तक करियर के हर पायदान पर उनकी प्राथमिकता ग्रामीणों की हालत में सुधार लाने की थी.

मसलन, परिवहन मंत्री के तौर पर उन्होंने 58 पिछड़े उपखंडों में दफ्तर खोले और दूर-दराज के इलाकों को बस सेवा से जोड़ा. औद्योगिक इस्तेमाल के लिए आदिवासी जमीन का स्थानांतर आसान और सुगम बनाने के लिए, उनके झारखंड की राज्यपाल (2015-2021) रहते बीजेपी सरकार ने छोटा नागपुर और संथाल परगना किरायेदारी कानूनों में संशोधनों को मंजूरी दी. इनके पारित होने से आदिवासियों के हितों को चोट पहुंचती. मुर्मू ने पार्टी को नाराज करने का जोखिम उठाते हुए, जून 2017 में विधेयक लौटा दिए.

राष्ट्रपति मुर्मू ने मुकदमेबाजी की ऊंची लागत के कारण गरीबों को न्याय न मिल पाने की बात कही. मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को उन्होंने सभी के लिए समान अधिकार पक्के करने की खातिर सारे जीवित प्राणियों और उनके वासस्थानों को सुरक्षित बनाने की जरूरत पर बल दिया: ''हमें प्रकृति के साथ गरिमा से पेश आना सीखना ही होगा. यह केवल नैतिक कर्तव्य नहीं है; याद रखें हमारे अपने जिंदा रहने के लिए भी यह जरूरी है.’’ 

मुर्मू स्नेहिल व्यवहार  के लिए जानी जाती हैं. उन्हें मिठाई खाना, खिलाना पसंद है.

Read more!