मान न मान मान पहलवान 

हास्य अभिनेता से नेता बने मान को पंजाब में मिली शानदार जीत राज्य के लिए ही नहीं, आम आदमी पार्टी के लिए भी निर्णायक थी.

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

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भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

इन दिनों, पंजाब में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे-किनारे ड्राइव करते हुए अगर ग्रामीण इलाकों से गुजरें तो हरे-भरे गेहूं के खेतों के आंखों को सुकून पहुंचाने वाले नजारे देखने को मिल जाएंगे और कस्बों तथा शहरों से गुजरें तो लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदमकद होर्डिंग दिखेंगे. वे होर्डिंग गर्व के साथ बताते हैं कि आम आदमी पार्टी (आप) ने मुफ्त बिजली देने का अपना चुनावी वादा पूरा करके दिखाया है.

मार्च 2022 में 92 विधायकों के साथ आप ने पंजाब में प्रचंड जीत हासिल की और मान मुख्यमंत्री बने. शायद कॉमेडियन से नेता बने मान की जीत पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं थी—प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अकाली दल पहले से ही अपने बड़े भीतरी संकटों में उलझे थे. फिर भी, यह आप के लिए यह जीत महत्वपूर्ण थी और उस राज्य के लिए भी जिसके संघर्ष साल-दर-साल बढ़ते ही जा रहे थे.

पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद मान आप के दूसरे मुख्यमंत्री हैं. पिछले 18 महीनों में, पार्टी ने उन्हें इटली के बेप्पे ग्रिलो या यूक्रेन के व्लोदिमीर जेलेंस्की बनाने की कोशिश की है. पेपे और जेलेंस्की दोनों कॉमेडियन से राजनेता बने हैं. ग्रिलो अपनी ही पार्टी पर नियंत्रण पाने की जद्दोजहद में हैं, तो जेलेंस्की व्लादिमीर पुतिन की आक्रामकता से लड़ते हुए यूरोप के सबसे बुरे संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं. इस लिहाज से शायद मान के साथ उनकी तुलना पूरी तरह से गलत नहीं होगी, आखिर वे भी तो पंजाब में पांव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

मान को मुख्यमंत्री बने नौ महीने हो चुके हैं. वे राज्य की खराब आर्थिक स्थिति, अपने प्रशासन पर नियंत्रण की कमी, कथित तौर पर शराब के नशे में धुत्त रहने के लिए आलोचना और राज्य में घटते निजी निवेश जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं. ऊपर से चुनावों के दौरान आप की ओर से मुफ्त सुविधाएं प्रदान करने के किए गए वादों के प्रति प्रतिबद्धता मुश्किलें और बढ़ा रही है. पंजाब 'कर्ज का दबाव झेल रहे राज्य’ से 'कर्ज के दलदल में धंसे’ राज्य में बदल गया है.

अनुमान के मुताबिक, इस साल के अंत तक उस पर का कर्ज बोझ 2.84 लाख करोड़ रुपए तक हो सकता है. जून 2022 में, आप को पहला झटका तब लगा जब उपचुनाव में वह संगरूर लोसकभा सीट अकाली दल के सिमरनजीत सिंह मान से हार गई. लोगों ने इसे पार्टी के अब तक के प्रदर्शन पर जनता की पहली प्रतिक्रिया बताया. विडंबना यह है कि विशेष रूप से दिसंबर में गुजरात में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद पूरे देश में पांव पसारने की कोशिश कर रही आप के लिए पंजाब पार्टी की एक प्रयोगशाला हो सकता था, जिसके शासन का मॉडल लेकर वह पूरे देश में जाती.

मान के चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले से ही पंजाब ड्रग्स जैसी खतरनाक समस्या, हठी नौकरशाही और दशकों के कट्टरपंथी आतंक से जूझ रहा था. उन्होंने बदलाव लाने का वादा करके मतदाताओं को अपने पक्ष में किया, जिनका पारंपरिक दलों से मोहभंग हो चुका था. अब जबकि वे जिम्मेदारी भरे पद पर हैं, तो उन्हें जल्द ही एहसास हो जाएगा कि एक जटिल सीमांत राज्य का नेतृत्व करना इतना आसान नहीं है और अपनी सरकार पर नियंत्रण हासिल किए बिना वे आगे नहीं बढ़ सकेंगे.

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