अति-आत्मविश्वास की हार

कुढ़नी विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत ने महागठबंधन को बुरी तरह चौंकाया है.

मुश्किल जीत: कुढ़नी विधानसभा सीट जीतने वाले भाजपा के उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता
मुश्किल जीत: कुढ़नी विधानसभा सीट जीतने वाले भाजपा के उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता

पुष्यमित्र

अपने वोटबैंक की ताकत की वजह से महागठबंधन मानकर चल रहा था कि बिहार में कुढ़नी विधानसभा के उपचुनाव में जीत उसी की होगी. उसे राजद के माय (मुस्लिम और यादव) समीकरण और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कोर समर्थक अति पिछड़ा समुदाय के वोटरों पर पूरा भरोसा था.

इस आत्मविश्वास की वजह से जदयू ने एक कुशवाहा उम्मीदवार मनोज कुमार सिंह को मैदान में उतार दिया, जबकि यह सीट निषाद जाति के उम्मीदवार की थी. यहां राजद के अनिल सहनी विधायक थे, जिन्हें आर्थिक अनियमितता के एक मामले में दोषी पाए जाने की वजह से विधायकी छोड़नी पड़ी थी.

8 दिसंबर को आए चुनाव नतीजों के मुताबिक महागठबंधन की जीती हुई सीट इस बार जदयू 3,632 वोटों से हार गई. भाजपा प्रत्याशी केदार प्रसाद गुप्ता ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जीत दर्ज की.

जदयू की हार के कई कारण बताए जा रहे हैं. ऐसा माना जा रहा कि विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) ने जिस प्रत्याशी नीलाभ कुमार को भाजपा का वोट काटने के लिए मैदान में उतारा था, उसने 10,000 वोट पाकर भाजपा से कहीं अधिक जदयू को नुक्सान पहुंचाया.

इसके अलावा एमआइएम उम्मीदवार गुलाम मुर्तजा को 3,206 और एक स्वतंत्र प्रत्याशी संजय कुमार को 4,250 वोट मिले. पूरे 4,448 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया जो कि जीत-हार के अंतर से ज्यादा है. बताते हैं टीईटी परीक्षार्थियों ने जमकर नोटा का बटन दबाया क्योंकि वे सरकार से नाराज हैं.

इससे पहले नवंबर में मोकामा और गोपालगंज में भी उपचुनाव हुए थे. इनमें से गोपालगंज सीट भाजपा के हिस्से में गई थी तो मोकामा महागठबंधन के. कुढ़नी को भी शामिल कर लें तो महागठबंधन कागज पर तीनों सीटों पर मजबूत था लेकिन भाजपा के चुनावी प्रबंधन ने उसे दो सीटों पर मात दी. यह बताता है कि भाजपा से मुकाबले के लिए महागठबंधन को कागजी तैयारी से आगे बढ़ना होगा.

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