चलती का नाम इलेक्ट्रिक गाड़ी

गडकरी ऐसे मंत्री हैं जिन्होंने दिल्ली से चंडीगढ़ या देहरादून की सड़क यात्रा को पांच घंटे से घटाकर दो घंटे करने या राष्ट्रीय राजधानी से मुंबई की सड़क यात्रा की अवधि को 12 घंटे करने का सपना दिखाया

नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री
नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों, वैकल्पिक ईंधन और राजमार्ग के बुनियादी ढांचे में सुधार के बारे में बात करने के लिए सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बेहतर व्यक्ति कोई दूसरा नहीं हो सकता. गडकरी ऐसे मंत्री हैं जिन्होंने दिल्ली से चंडीगढ़ या देहरादून की सड़क यात्रा को पांच घंटे से घटाकर दो घंटे करने या राष्ट्रीय राजधानी से मुंबई की सड़क यात्रा की अवधि को 12 घंटे करने का सपना दिखाया है. वे अगले दशक तक लिथियम आयन और वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों के परिचालन पर बड़ा दांव लगा रहे हैं, जिससे न केवल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में कमी आएगी बल्कि देश के चालू खाते का संतुलन भी सुधरेगा. गडकरी के साथ दो नए जमाने के उद्यमी, ओकिनावा के संस्थापक और एमडी जीतेंदर शर्मा, और केतन मेहता (संस्थापक और सीईओ, हॉप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) शामिल हुए, जिन्होंने बदलाव के इस पथ की कई चुनौतियों और अवसरों के बारे में चर्चा की.

''हमारे देश के सामने जो समस्याएं हैं वे प्रदूषण और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर हैं. हमारा आयात बिल 8 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. और पांच साल के भीतर यह बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा. पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल से हम देश में ज्यादा वायु प्रदूषण पैदा कर रहे हैं. आज हमें इस देश को वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण से बचाना है. इसलिए हमें लागत प्रभावी समाधान चाहिए जो आयात का विकल्प बने और प्रदूषण मुक्त तथा स्वदेशी हो. समाधान ऑटो सेक्टर से आएगा''

''वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में सालाना 140% की वृद्धि हुई. दुनिया भर की सरकारों ने इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ाने के लिए 40 अरब डॉलर खर्च किए. विश्व स्तर पर, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन 13 लाख यूनिट तक पहुंच गए हैं और दुनिया भारी वजन खींचने वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे वाहनों के लिए चार्जिंग विकल्प तलाश रही है, 1 मेगावाट क्षमता के मेगा चार्जर तैयार कर रही है. भारत के लिए यहां अपनी प्रखर इंजीनियरिंग क्षमता, प्रतिभाशाली जनशक्ति, कच्चे माल की उपलब्धता, कम उत्पादन लागत जैसी खूबियों के इस्तेमाल के लिए अपार संभावनाएं बनतीं हैं''

''लगभग 81% लिथियम-आयन बैटरी भारत में निर्मित होती हैं. कीमतों में 40-50% की गिरावट आई है और हमारे पास वेहिकल स्क्रैपेज पॉलिसी है जो लिथियम और एल्युमिनियम को रिसाइकल करने में मददगार हो सकती है. हमारे बंदरगाहों पर न्यूनतम ड्राफ्ट 18 मीटर तय किया गया है जो प्रचलन से बाहर हो गए दुनिया भर के जहाजों को तोड़ने के काम में मदद करेगा. तांबे और एल्युमिनियम का आयात करने के बजाए, हम इसे इन जहाजों से निकाल सकते हैं. लिथियम खदानों पर चीनी एकाधिकार की बात हो रही है... तथ्य यह है कि लिथियम की कोई कमी नहीं है''

''दुर्घटनाओं के लिए, हमेशा तेज गति ही जिम्मेदार नहीं होती. एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीन हाइवे पर, मोटर चालकों के अलावा दूसरा कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है, इसलिए वहां गति सीमा बढ़ाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. मेरी निजी राय है कि हम ऐसे हाइवे पर 120-140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा रख सकते हैं. फोर लेन वाले एनएच पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. मैं 'गति सीमा' वाली फाइल आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन अदालत के फैसले हमारे आड़े आते हैं. अब मैं संसद जाऊंगा, इस पर एक विधेयक लाऊंगा  और हम गति के मापदंडों को बदल देंगे''

जीतेंदर शर्मा, एमडी और संस्थापक, ओकिनावा

''इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर उपभक्ताओं के मन में दो चिंताएं उभरती हैं. पहली, चार्जिंग स्टेशन जैसे बुनियादी ढांचे को लेकर. एक अन्य चिंता यह रहती है कि मैं घर से बाहर जाऊं तो वापस लौट पाऊंगा या नहीं. देखा जाए तो चौपहिया वाहन में आप दिन भर में 400 किमी से ज्यादा नहीं जा सकते. अगर टू-व्हीलर से चलें तो आप कभी भी एक दिन में 60-70-80 किमी से ज्यादा नहीं चलेंगे''

केतन मेहता, संस्थापक और सीईओ, हॉप इलेक्ट्रिक मोबिलिटी

''दोपहिया वाहनों के हमारे स्टॉक रातोरात खत्म हो जाते हैं, लोग इनके लिए पागल हैं. 105 रु. प्रति लीटर के भाव पर बिक रहे पेट्रोल ने भी हमारी मदद की है. फेम पॉलिसी, स्क्रैपेज पॉलिसी, यह सब हमें भविष्य की गाड़ियों की ओर लोगों को लेकर जाने में मदद कर रही हैं. कोविड से बाहर आने के बाद एहसास होता है कि हमें एक टिाकऊ विाकास वाले भविष्य के लिए काम करने की जरूरत है''

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