राज्यों की दशा-दिशाः एक कदम आगे
समग्र क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और सर्वाधिक सुधार के मामले में क्रमश: तमिलनाडु और असम ने लगातार तीसरे साल बाजी मारी है. बारह दूसरी श्रेणियों में 15 अन्य राज्य सर्वश्रेष्ठ रहे.

राज्यों की दशा-दिशा
तमिलनाडुः एक कदम आगे
समग्र और समावेशी विकास
आबादी में देश का छठा सबसे बड़ा और आकार में बारहवां सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद, तमिलनाडु भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से तीसरी सबसे अधिक जीडीपी और सर्वाधिक शहरीकृत होने के साथ मजबूत विनिर्माण आधार और बड़े सेवा क्षेत्र के कारण यह सबसे अधिक औद्योगीकृत राज्य भी है.
औद्योगिक विकास को लेकर एक निरंतर प्रतिबद्धता के कारण राज्य बड़ी संख्या में निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग शृंखलाएं खड़ी करने में सफल रहा है. राज्य की सत्ता दो प्रमुख द्रविड़ दलों के हाथ में ही आती-जाती रही है और दोनों ही दलों में कद्दावर नेता हुए हैं जिनके बीच राजनीतिक खींचतान का इतिहास भी लंबा है, फिर भी एक प्रभावी नौकरशाही ने राज्य की नीतियों को निर्बाध गति से कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम (टिडको) और राज्य उद्योग संवर्धन निगम (सिपकोट) जैसी विशिष्ट एजेंसियों की स्थापना ने राज्य की आर्थिक दृष्टि को मूर्त रूप देने में मदद की है.
'कारोबारी सहूलियत’ में सुधार के लिए सरकार की नोडल निवेश एजेंसी गाइडेंस, संभावित निवेशकों के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण परमिट जैसी चीजों को आसान बनाने के लिए पोर्टल विकसित कर रही है.
13 सेक्टरों में महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की स्थापना के साथ चल रहे अधिकांश कार्य दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल में बने विजन तमिलनाडु 2023 डॉक्युमेंट से प्रेरित हैं. मुख्यमंत्री ई. के. पलानीस्वामी इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और जयललिता की कल्पना को अमली जामा पहना रहे हैं.
लगातार तीसरे वर्ष, तमिलनाडु ने राष्ट्रीय औसत से अधिक आर्थिक विकास दर दर्ज की. 8.03 प्रतिशत विकास दर के साथ, राज्य 2019-20 में अखिल भारतीय औसत 4.2 प्रतिशत से दोगुने दर से विकसित हुआ था. 2019-20 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1,53,853 रुपये थी और इस तरह राज्य पिछले वित्त वर्ष के अपने बारहवें स्थान से सुधार करते हुए देश में अब छठे स्थान पर आ गया है. 1994 से, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गरीबी में लगातार गिरावट आई है.
कल्याणकारी उपायों पर जोर देकर राज्य ने सामाजिक न्याय और वंचित समूहों के उन्नयन को प्राथमिकता दी है. उच्च विकास दर और महत्वपूर्ण आर्थिक परिवर्तन के साथ सामाजिक स्तर में सुधार, विशेष रूप से सार्वजनिक शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा, ने समावेशी विकास को सक्षम किया है और राज्य को एक शिक्षित और तकनीकी रूप से कुशल कार्यबल से लैस किया है.
मानव विकास सूचकांकों पर भी राज्य ने अच्छा प्रदर्शन किया है. शिशु मृत्यु दर में काफी गिरावट आई है, सभी आय
वर्गों में तमिलनाडु सबसे कम कुपोषित राज्यों में शामिल है और यह कुपोषण दर राष्ट्रीय औसत से कम है.
पीएमएवाई-जी के तैयार घरों की संख्या 2018-19 में 11,236 थी वह 2019-20 में 30,162 हो गई
12 में से आठ मानदंडों पर तमिलनाडु देश के पांच शीर्ष राज्यों में शामिल है