क्यों सनी देओल की Border 2 के बॉक्स ऑफिस पर छाने के पूरे आसार हैं?

सनी देओल की Border 2 भी गदर की तर्ज का ही फॉर्मूला अपनाती है : देशभक्ति के नाम पर उग्र राष्ट्रवाद जो आजकल खूब बिक रहा है

Border 2 में सनी देओल

कुछ साल पहले सनी देओल ने गदर 2 के ज़रिये अपने करियर को फिर से ज़िंदा किया था. क्या वे एक बार फिर किसी लोकप्रिय फिल्म के दूसरे संस्करण के साथ बॉक्स ऑफिस पर किस्मत आज़मा पाएंगे? यही सवाल हर किसी के ज़ेहन में है, क्योंकि Border 2  गणतंत्र दिवस के ठीक मौके पर सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है.

गदर के उलट, Border 2 सिर्फ एक अभिनेता के कंधों पर टिकी फिल्म नहीं होगी. साठ की उम्र पार कर चुके देओल के साथ इस बार वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे मिलेनियल कलाकार भी नजर आएंगे. ढांचा कमोबेश वही है- देओल का चीखकर भारतीय सेनाओं का हौसला बढ़ाना, साथ ही भारत के पसंदीदा पंचिंग बैग पाकिस्तान को नीचा दिखाना. इस फिल्म में युद्ध के दृश्य भरपूर हैं- जिनमें से कई कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी (CGI) से रचे गए हैं, या फिर कहें AI से,  साथ ही 1971 के भारत-पाक युद्ध में लड़ रहे अपने प्रियजनों को लेकर चिंतित महिलाएं भी हैं.

पहली बॉर्डर के सिनेमाघरों में आने के बाद से बहुत कुछ बदल चुका है. 1997 में आई यह वॉर ड्रामा फिल्म सैनिकों को मानवीय रूप में दिखाने और संतुलित देशभक्ति के लिए दर्शकों के दिलों को छू गई थी. बीते 25 से अधिक वर्षों में यह जॉनर काफी बदल चुका है. अब फोकस एक नए भारत पर है- जिसे आदित्य धर की धुरंधर में मशहूर तौर पर कहा गया, “ये नया हिंदुस्तान है; घर में घुसेगा भी और मारेगा भी.”

टीज़र को देखकर लगता है कि Border 2 का पहला ही संवाद उसी उग्र राष्ट्रवादी भावना को दोहराता है, जो इन दिनों दर्शकों के बीच खूब चल रही है. धुरंधर की जबरदस्त सफलता इसकी पुष्टि करती है. देओल गरजते हुए कहते हैं, “तुम जहां से भी घुसने की कोशिश करोगे- आसमान से, ज़मीन से या समुंदर से- तुम्हारे सामने एक हिंदुस्तानी फ़ौजी खड़ा मिलेगा. जो आंखों में आंखें डालकर, सीना ठोककर कहेगा- हिम्मत है तो आओ, यहां खड़ा है हिंदुस्तान.”

धुरंधर की तरह ही Border 2  भी सच्ची घटनाओं पर आधारित है. वरुण धवन का किरदार 1971 के युद्ध नायक, दिवंगत कर्नल होशियार सिंह दहिया से प्रेरित बताया गया है. काग़ज़ पर देखें तो फिल्म में वे तमाम तत्व मौजूद हैं जो दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं- वीरता, बलिदान और गर्व. मूल फिल्म से जुड़ी अपनेपन की भावना, ऊंचा सुर, दुश्मन के रूप में पाकिस्तान और इस बार आसमान और समुंदर में घटित होते हुए ढेर सारे एक्शन सीक्वेंस.
 
बॉर्डर के निर्माता जे.पी. दत्ता के साथ साझेदारी करते हुए, T- Series ने फिल्म को बड़े स्तर पर पेश किया है. पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए क्लासिक गीत “संदेसे आते हैं” को “घर कब आओगे” के रूप में फिर से पेश किया गया है, जिसमें अरिजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और विशाल मिश्रा ने सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ का साथ दिया है. यह गीत पहले ही यूट्यूब पर 80 मिलियन व्यूज़ बटोर चुका है.

हाल ही में आई इक्कीस ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को कहीं अधिक संवेदनशील ढंग से पेश किया था.  इसमें युद्ध की निरर्थकता और भावनात्मक कीमत पर उतना ही ध्यान था जितना उसके भौतिक पहलू पर. लेकिन उसे उतना उत्साहपूर्ण स्वागत नहीं मिला. इसके उलट, Border 2 वही रास्ता अपनाती है जो बिकता है. दुश्मन से डरने के बजाय उससे नफरत, और पूरे शेखीभरे अंदाज़ के साथ. यही आज देश का मिज़ाज है.

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