रणबीर कपूर की ‘रामायण’ बॉलीवुड के लिए टर्निंग प्वाइंट क्यों कही जा रही है?
हॉलीवुड की तकनीक और 4000 करोड़ रुपए का बजट; रणबीर की 'रामायण' भारतीय सिनेमा को पूरी तरह बदल सकती है

फिल्म ‘धुरंधर’ के दूसरे हिस्से ‘धुरंधर : द रिवेंज’ का खौफ अगर फिल्म निर्माताओं में देखना हो, तो फिल्म रिलीज का कैलेंडर देखें. आज तीसरे हफ्ते बाद भी ‘धुरंधर’ के रास्ते में रेड कार्पेट बिछा हुआ है. सिनेमाघर 18-18 घंटे चल रहे हैं. इसके बावजूद जनता रात 12 बजे के शो देखने से पीछे नहीं हट रही. ‘धुरंधर’ नाम के इस हैवी व्हीकल के सामने कोई भी फिल्म निर्माता कुचला नहीं जाना चाहता.
अक्षय कुमार से लेकर सलमान खान तक की फिल्मों ने फिलहाल शांत रहने में ही भलाई समझी है. जब तक ‘धुरंधर’ की यह लहर अपने आप शांत नहीं होती, कोई फिल्म तो छोड़िए, ट्रेलर तक रिलीज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा. लेकिन इसी बीच धूमधाम से ‘रामायण’ ने अपनी आमद दर्ज कराई है.
पिछले कई वर्षों से बार-बार यह माहौल बनाया जा रहा था कि रामायण पर 'लार्जर देन लाइफ' प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है. अब यह बात पक्की हो गई है, क्योंकि 2 अप्रैल को ‘रामायण’ का टीजर आ गया. मेकर्स ने इसके लिए हनुमान जयंती का दिन चुना.
टीजर में राम के किरदार में रणबीर कपूर दिखाई दे रहे हैं. रावण और सीता के किरदार का लुक अभी रिवील नहीं किया गया है. हालांकि खबर यह है कि ‘सुपरस्टार’ का खिताब पा चुके यश रावण का और साई पल्लवी सीता का किरदार निभा रही हैं.
‘रामायण’ को किस बात का भरोसा है?
इस प्रोजेक्ट के पीछे नमित मल्होत्रा हैं. यह वही नाम है जिसने हॉलीवुड के विजुअल इफेक्ट्स में भारत की पहचान बनाई. उनकी कंपनी DNEG आठ ऑस्कर जीत चुकी है. ‘इंटरस्टेलर’, ‘इंसेप्शन’ और ‘डून’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकी यह टीम अब भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सपने पर काम कर रही है.
टीजर की पहली झलक ने साफ कर दिया है कि यह फिल्म पारंपरिक बॉलीवुड टेम्पलेट से बाहर है. यहां स्केल अलग है, टेक्नोलॉजी अलग है और सबसे बड़ी बात, सोच अलग है. अब तक जो चर्चा थी वह अधूरी थी. ‘रामायण’ को 1000 या 1200 करोड़ की फिल्म कहा जा रहा था, लेकिन असल कहानी इससे कहीं बड़ी है. खुद नमित मल्होत्रा ने यह जानकारी साझा की है कि यह प्रोजेक्ट दो पार्ट्स में बन रहा है और दोनों का कुल बजट करीब 4000 करोड़ रुपए है. इसका मतलब है कि यह सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल होने वाला प्रोजेक्ट है.
अब तक भारतीय सिनेमा में 500 या 600 करोड़ की फिल्म को मेगा बजट कहा जाता था, लेकिन यहां दांव सीधा 4000 करोड़ का है. यानी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से कहीं आगे की सोच के साथ बनाई जा रही है. इसे इंडस्ट्री का नया बेंचमार्क सेट करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. जब पूरी इंडस्ट्री ‘धुरंधर इफेक्ट’ से सतर्क है, तब नमित मल्होत्रा ने सबसे बड़ा जोखिम उठाया है.
सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ जैसी फिल्म चर्चा में तो आई लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी. अक्षय कुमार जैसे अभिनेता भी अब प्रोजेक्ट्स चुनने में काफी सतर्कता बरत रहे हैं.
भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी कमजोरी लंबे समय तक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) रही है. बड़े सपने अक्सर स्क्रीन पर छोटे नजर आते थे. यही वह जगह है जहां ‘रामायण’ सबसे मजबूत दिखती है. DNEG का अनुभव इसे अलग स्तर पर ले जाता है, क्योंकि यह वही टीम है जिसने हॉलीवुड में जटिल से जटिल दुनिया तैयार की है. अब वही टेक्नोलॉजी भारतीय पौराणिक कथाओं (मिथोलॉजी) पर लागू की जा रही है.
इस फिल्म में वर्चुअल प्रोडक्शन का इस्तेमाल हो रहा है. LED वॉल्स पर रियल टाइम बैकग्राउंड, CGI से जीवंत होते किरदार और रियल टाइम लाइटिंग का प्रयोग किया गया है. यानी पहली बार रामायण को उस स्केल पर दिखाने की कोशिश है जो अब तक सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में ही मुमकिन माना जाता था.
म्यूजिक में भी यही रणनीति दिखाई देती है. ए आर रहमान और हैंस जिमर का साथ आना इस फिल्म को अलग ऊंचाई पर ले जाता है. भारतीय संवेदनाओं और अंतरराष्ट्रीय साउंड का मेल निश्चित रूप से संगीत को उस स्तर तक ले जाएगा, जिसकी हकदार 'रामायण' जैसी महागाथा है.
इससे पहले किसने कितने बड़े दांव लगाए हैं?
अगर इस प्रोजेक्ट की विशालता को समझना है, तो पिछली बड़ी फिल्मों से इसकी तुलना करना जरूरी है. ‘ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन - शिवा’ का बजट करीब 400 से 450 करोड़ रुपए था. यह हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा कदम था. ‘आदिपुरुष’ लगभग 600 करोड़ में बनी थी. फिल्म का विषय रामायण से जुड़ा था, लेकिन VFX और प्रस्तुति को लेकर इसे काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी.
‘RRR’ करीब 550 करोड़ की फिल्म थी. इसने वैश्विक स्तर पर सफलता पाई और साबित किया कि भारतीय फिल्में दुनिया जीत सकती हैं. ‘कल्कि 2898 AD’ भी लगभग 600 से 650 करोड़ के बजट के साथ आई और स्केल को आगे बढ़ाया.
अब इन सभी फिल्मों के सामने ‘रामायण’ को रखिए. 4000 करोड़! यानी यह सिर्फ अगला कदम नहीं है, बल्कि कई सीढ़ियां एक साथ चढ़ने जैसा है.
क्या हो सकता है?
क्या रामायण भारतीय सिनेमा का टर्निंग पॉइंट बनेगी? अगर ‘रामायण’ सफल होती है, तो इसका असर व्यापक होगा. बड़े बजट की फिल्मों को लेकर हिचक खत्म होगी और VFX में निवेश बढ़ेगा. भारतीय कहानियां वैश्विक स्तर पर नए आत्मविश्वास के साथ सामने आएंगी. लेकिन यह असफल रहती है, तो इसका असर भी उतना ही गहरा होगा. आने वाले कई सालों तक कोई भी निर्माता इतना बड़ा जोखिम लेने से बचेगा.
कुल मिलाकर, फिल्म इंडस्ट्री ने घर-घर में सुनी जा चुकी रामायण पर जो दांव लगाया है, वह कामयाब हुआ तो किसी सपने से कम नहीं होगा. भारत सिर्फ फिल्में ही नहीं बनाएगा, बल्कि अपना एक 'यूनिवर्स' और 'फ्रेंचाइजी' खड़ी करेगा.
और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह एक ऐसा सपना होगा जिसे याद तो रखा जाएगा, लेकिन दोहराने की हिम्मत शायद ही कोई कर पाए.