भारत और पाकिस्तान के पक्षी प्रेमियों ने मिलकर कैसे एक घायल गिद्ध को बचाया
भोपाल के पास छोड़ी गई दो साल की मादा सिनेरियस वल्चर उड़कर पाकिस्तान के खानेवाल जिले तक पहुंच गई और वहां डॉक्टरों की देखरेख में ठीक हो रही है

भारत और पाकिस्तान के बीच संरक्षण के एक सुखद सहयोग ने एक घायल प्रवासी गिद्ध को बचाने की उम्मीद जगाई है. यह मादा सिनेरियस वल्चर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर रायसेन जिले से छोड़ी गई थी.
यह गिद्ध सैकड़ों किमी दूर पाकिस्तान में पहुंचा और वहां इसकी मौजूदगी का पता चलने से पक्षी प्रेमी खुश हैं. इससे भी अच्छी खबर यह है कि ओलावृष्टि में घायल हुई इस गिद्ध का पड़ोसी देश में पशु चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है.
22 जनवरी को, लगभग दो साल की इस सिनेरियस वल्चर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में घायल पाया गया था और इलाज के लिए भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क लाया गया था. बाद में इस पक्षी को भोपाल के एक गिद्ध प्रजनन केंद्र में भेज दिया गया और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) इंडिया की तरफ से इसके शरीर में GPS ट्रैकर लगाया गया.
गिद्ध को 30 मार्च को रायसेन जिले के हलाली बांध के पास एक स्थान पर छोड़ा गया था. 6 अप्रैल को, GPS सिग्नल ने इसकी लोकेशन पाकिस्तान में दिखाई. वन विहार नेशनल पार्क के निदेशक विजय कुमार बताते हैं, "6 अप्रैल को हमने देखा कि सिग्नल पाकिस्तान के खानेवाल जिले से आने लगे हैं. हमने WWF इंडिया से बात की, जिन्होंने गिद्ध का पता लगाने के अनुरोध के साथ WWF पाकिस्तान से संपर्क किया."
भेजे गए आखिरी सिग्नल के आधार पर, पाकिस्तान के वन विभाग और WWF पाकिस्तान की एक टीम ने एक गांव में गिद्ध को खोज निकाला. पक्षी को रेस्क्यू किया गया और इलाज के लिए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र, चांगा-मांगा में गिद्ध प्रजनन सुविधा में रखा गया.
सिनेरियस वल्चर मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली गिद्धों की सात प्रजातियों में सबसे बड़ी है. कुमार ने कहा कि सिनेरियस वल्चर, हिमालयन वल्चर और यूरेशियन ग्रिफॉन वल्चर प्रवासी होते हैं और मध्य एशिया की ओर यात्रा करते हैं. अगर पाकिस्तान उड़ी यह गिद्ध घायल न होती, तो सबसे अधिक संभावना थी कि वह किसी मध्य एशियाई देश की ओर जाती.