'है जवानी तो इश्क होना है' कॉमेडी है या 90 के दशक का हैंगओवर!
डेविड धवन की कॉमेडी वाली दुनिया ने कम से कम दो पीढ़ियों के दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है लेकिन उनके आजमाए हुए कॉमेडी फॉर्मूलों का असर अब फीका पड़ता दिख रहा है

वरुण धवन लंबे समय से ऐसे किरदारों के सहारे अपना करियर चलाते आए हैं जो बड़े होने से मानो इनकार कर देते हैं. अपनी बताई जा रही आखिरी डायरेक्टोरियल फिल्म में डेविड धवन एक बार फिर बेटे को ऐसा रोल सौंपते हैं जिसमें उसे पूरी फिल्म के दौरान बिना रुके, लगातार उछलते-कूदते रहने वाले अंदाज में रहना पड़ता है
ठहराव और सुकून जैसे शब्द डेविड धवन की कॉमेडी वाली दुनिया में लगभग मौजूद नहीं हैं. यही दुनिया दो पीढ़ियों के दर्शकों को खूब पसंद आई थी. लेकिन उन्हीं पुराने फनी खेलों का असर अब फीका पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी मिसाल फिल्म का हीरो है जिसे अपने किसी भी गलत काम पर अफसोस नहीं होता और जो खुद को हर सहानुभूति का हकदार समझता है.
जस (वरुण) की शादी को पांच साल हो चुके हैं लेकिन उसका रिश्ता मुश्किल दौर से गुजर रहा है. वजह यह है कि वह अपनी पत्नी (मृणाल ठाकुर) के साथ ‘हर समय’ रोमांस करना चाहता है ताकि जल्द बच्चा हो और परिवार शुरू किया जा सके. दूसरी तरफ पत्नी जो कथित तौर पर किसी कंपनी की सीईओ है और जिसका काम पूरे दो घंटे की फिल्म में शायद ही कभी चर्चा में आता है, फिलहाल बच्चे की जगह अपने करियर को तवज्जो देना चाहती है.
दोनों के बीच बढ़ता तनाव आखिरकार कोर्ट तक पहुंचता है. वहां एक जज, जो जज से ज्यादा रिलेशनशिप काउंसलर लगते हैं, उन्हें समझाते हैं और रिश्ता बचाने के लिए छह महीने का समय देते हैं. दोनों खुशी-खुशी अलग होते हैं और इस दौरान खूब शराब भी पीते हैं.
जस कई तरह की ‘खूबियों’ वाला इंसान है. उसकी नजर भटकती रहती है और उसे प्यार में पड़ने की आदत है. जब एक युवा महिला (पूजा हेगड़े) अपने दोस्त की चुनौती पर लंदन की सड़क पर उसे किस कर देती है क्योंकि उसने भारत में उसकी जान बचाई थी तो जस तुरंत नए रिश्ते में कूद पड़ता है. पूजा का किरदार बानी अपने दबंग भाई (जिमी शेरगिल) के साथ आता है. भाई को यह रिश्ता खास पसंद नहीं है लेकिन वह ज्यादा विरोध भी नहीं करता.
डेविड धवन की फिल्मों में हीरो को मुश्किल हालात में फंसा देखना ही असली खेल होता है. यहां जस को पता चलता है कि उसकी होने वाली पूर्व पत्नी और उसकी नई गर्लफ्रेंड, दोनों गर्भवती हैं.
फिल्म का एक घंटे से ज्यादा हिस्सा यह दिखाने में निकल जाता है कि वह कैसे दोनों महिलाओं को एक-दूसरे के बारे में पता नहीं चलने देता और ऐसी स्थिति से बचता है जहां वे एक ही जगह पर पहुंच जाएं. यह करना जितना मुश्किल लगता है, फिल्म में उतना नहीं है. साथ ही यह दर्शकों को हंसाने का बहुत पुराना तरीका भी है. एक सीन में जस अपना चेहरा छिपाने के लिए हेलमेट पहनता है. फिर वह एक कमरे और एक महिला से बचकर दूसरी महिला और दूसरे कमरे में भागता फिरता है.
चूंकि यह 1990 के दशक के कॉमेडी किंग डेविड धवन की आखिरी फिल्म है इसलिए इसमें पुराने दौर के लगभग सभी मशहूर कॉमेडी कलाकारों के कैमियो मौजूदगी है. राकेश बेदी और चंकी पांडे से लेकर जॉनी लीवर और राजपाल यादव तक. अफसोस की बात यह है कि इनमें से कोई भी अपने सीन में जान नहीं डाल पाते जो कभी उनकी पहचान हुआ करती थी.
'है जवानी तो इश्क होना है' को देखते हुए लगातार ऐसा महसूस होता है कि यह सब पहले भी देखा जा चुका है. फिल्म की परेशानियां, स्थितियां और चुटकुले सब कुछ जाना-पहचाना और पुराने दौर का लगता है.
दो महिलाओं के बीच फंसे पुरुष वाली इसकी मूल कहानी डेविड धवन की 'बीवी नंबर 1' की याद दिलाती है. शायद इसी वजह से ‘चुनरी चुनरी’ का नया वर्जन भी फिल्म में है जो पुराने गाने जितना असरदार नहीं बन पाया.
फिल्म की कथित कॉमेडी मोटे लोगों का मजाक उड़ाने, समलैंगिकता के जोक और स्लैपस्टिक सिचुएशन पर टिकी है. लेकिन जो चीजें दो दशक पहले मजेदार लगती थीं वे आज पुरानी और कई बार असहज करने वाली महसूस होती हैं.
यहां महिलाओं का अस्तित्व सिर्फ हीरो से प्यार करने या उसके आकर्षण का हिस्सा बनने तक सीमित है. मौनी रॉय का किरदार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जो सिर्फ क्रिंज ही नहीं बल्कि बिल्कुल भी मजेदार नहीं है.
फिल्म का रंग-बिरंगा, बबलगम जैसा विजुअल स्टाइल भी जरूरत से ज्यादा लगता है. जस के नीयॉन रंग वाले छोटे बॉक्सर शॉर्ट्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं.
अगर फिल्म में कोई राहत देने वाली चीज है तो वह है टिप्स म्यूजिक के गानों का चतुर इस्तेमाल जो कई स्थितियों को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है.
एक मौके पर बानी, जस से कहती है, "तुम कितना बात करते हो." वह उसे थोड़ा शांत रहने को कहती है. लेकिन पुरानी आदतें इतनी आसानी से कहां जाती हैं. जाहिर है आखिरी बात भी जस को ही कहनी होती है.
फिल्म के अंत तक जस पिता बन चुका है लेकिन उसकी बचकानी हरकतें खत्म नहीं होतीं. ऐसे में दर्शक यही उम्मीद करता है कि जवानी हमेशा नहीं रहती और शायद इश्क भी हमेशा के लिए नहीं होता.