कोविड के दौर में क्रिकेट

इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) का 13वां संस्करण यूएई में शुरू होने वाला है. 53 दिनों के इस टूर्नामेंट में दुबई, शारजाह अबू धाबी में मैच होंगे, और इसका फाइनल 10 नवंबर को होगा

इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) का 13वां संस्करण
इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) का 13वां संस्करण

इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) का 13वां संस्करण 19 सितंबर से यूएई में शुरू होने वाला है. खबर लिखे जाने तक टूर्नामेंट का आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है लेकिन कयास हैं कि पहला मैच चार बार के चैंपियन मुंबई इंडियंस और तीन बार के खिताब विजेता चेन्नै सुपरकिंग्स के बीच होगा. 53 दिनों के इस टूर्नामेंट में दुबई, शारजाह अबू धाबी में मैच होंगे, और इसका फाइनल 10 नवंबर को होगा.

इस पैमाने के खेल आयोजन के लिए लॉजिस्टिक्स का प्रबंध करना मुश्किल काम है और खासकर विदेशों में आयोजन ने इस महामारी के दौर में चुनौती को कई गुना बढ़ा दिया है. हैरत नहीं कि सारा ध्यान उस कथित जैव-सुरक्षित बुलबुले पर है जो कोविड के जोखिम को कम करने के लिए बनाया जा रहा है. 'बुलबुले' से मतलब इन तीनों शहरों के तीन मैच स्थलों और दो ट्रेनिंग स्थलों में बनाए जा रहे उस कड़े कंटेनमेंट जोन से है जो होटलों, स्टेडियम और खिलाडिय़ों, कर्मचारियों और आयोजकों को ढोने वाले परिवहन के साधनों के चारों ओर बनाया जाएगा. तमाम किस्म के प्रतिबंधों के बावजूद सैकड़ों खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, ग्राउंड स्टाफ और सुरक्षाकर्मी और मीडियाकर्मी होंगे जिन्हें कंटेनमेंट जोन में जाने देने से पहले क्वारंटीन करना होगा और उनकी कोविड जांच करनी होगी, जहां उन्हें पूरे आइपीएल के आयोजन के दौरान रहना होगा.

बुलबुले बनाने वाले
यूके की सुरक्षा कंपनी रेस्ट्रेटा आइपीएल के लिए जैव-सुरक्षित बुलबुला बनाने और उसके प्रबंधन का काम देखेगी. इस कंपनी ने इससे पहले 2012 के लंदन ओलंपिक के समय सुरक्षा सेवाएं प्रदान की थीं और हाल में इसने इंग्लैंड में वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में भी जैव-सुरक्षा की व्यवस्था का इंतजाम किया था. यह निविदा हासिल करने में रेस्ट्रेटा ने कथित रूप से टाटा मेडिकल ऐंड डायगनोस्टिक्स को पीछे छोड़ा क्योंकि उसके पास अनुभव अधिक था और बोली की कीमत कम.


मैदान पर उतरे खिलाड़ी
23 अगस्त को सभी आठ आइपीएल टीमें दुबई पहुंच चुकी हैं. खिलाडिय़ों और उनके सपोर्ट स्टाफ को उस 'बुलबुले' में तभी जाने दिया जाएगा जब वे हफ्ते भर का क्वारंटीन पूरा कर लेंगे. इस दौरान पहले, तीसरे और छठे दिन उनकी कोविड जांच होगी. एक बार अंदर आने के बाद, उन्हें इस बुलबुले—जिसमें उनका होटल, परिवहन सुविधाएं और स्टेडियमों के कुछ हिस्से शामिल होंगे—से 80 से अधिक दिन तक यानी आइपीएल पूरा होने तक बाहर निकलने की इजाजत नहीं होगी.


खोज और पता
इस जैव-बुलबुले की मुख्य विशेषता यह तय करना होगा कि प्रतिभागी-खिलाड़ी, कोच, ग्राउंड स्टाफ, अंपायर, मीडियाकर्मी और अन्य कंटेनमेंट जोन न तोड़ें. अंदाजा लगाया जा रहा है कि सभी प्रतिभागियों के जीपीएस वाले पहचान-पत्र/ ब्रेसलेट दिए जाएंगे और उनकी गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी. इस व्यवस्था की अहमियत के बारे में बताते हुए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने टीम मीटिंग में बताया कि अगर एक भी खिलाड़ी ने सुरक्षा घेरे को तोड़ा तो इससे न हर किसी की सुरक्षा पर खतरा होगा बल्कि इससे उस टीम के साथियों को नीचा भी देखना पड़ेगा.

सटोरियों की सांसत
इस जैव-बुलबुले का एक अच्छा असर यह भी होगा कि इससे सटोरियों और दलालों के लिए अपनी चालें चलने के मौके सीमित हो जाएंगे. टीम के होटल आम लोगों के लिए सील रहेंगे, ऐसे में सटोरियों को कम से कम आमने-सामने खिलाडिय़ों से साठगांठ का मौका नहीं मिल पाएगा. हालांकि, खिलाडिय़ों के सोशल मीडिया अकांउट्स पर निगाह रखना और उनकी सुरक्षा एक अलग ही चुनौती होगी ताकि उन्हें कोई ललचाता हुआ प्रस्ताव ऑनलाइन न भेजा जा सके.

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