चैंपियंस ट्रॉफी-2025 : अगर भारत या पाक में से कोई एक भी न खेले, तो टूर्नामेंट पर क्या असर होगा?

भारत ने फरवरी 2025 में प्रस्तावित चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान का दौरा करने से मना कर दिया है. उधर पाक भी बीसीसीआई के तटस्थ जगहों पर कुछ मैच कराने के प्रस्ताव को मानने से लगातार इनकार कर रहा है

एक मैच के दौरान गुफ्तगू करते बाबर आजम (बाएं) और रोहित शर्मा
एक मैच के दौरान गुफ्तगू करते बाबर आजम (बाएं) और रोहित शर्मा

अगले साल फरवरी में प्रस्तावित आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच 'जिद की लड़ाई' चल रही है. दरअसल, यह टूर्नामेंट पाकिस्तान में आयोजित होना है, लेकिन भारत ने सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अपनी पुरुष क्रिकेट टीम को वहां भेजने से मना कर दिया है. भारत ने सुझाव दिया कि 2023 में हुए एशिया कप की तरह इस टूर्नामेंट को भी 'हाइब्रिड मॉडल' में आयोजित किया जाए. यानी भारत के मैच पाकिस्तान में न कराकर दुबई जैसी तटस्थ जगहों पर आयोजित किए जाएं.

लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने इस प्रस्ताव को मानने से साफ इनकार कर दिया. उसका रुख अभी भी कायम है. ईएसपीएन-क्रिकइन्फो से बातचीत में पीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरा टूर्नामेंट पाकिस्तान में खेला जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि, "हाइब्रिड मॉडल पर विचार किए जाने की कोई संभावना नहीं है." इसके अलावा खबरें ये भी सामने आईं कि पाकिस्तान ऐसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें भारत के बिना टूर्नामेंट की मेजबानी करना या टूर्नामेंट से उसका बहिष्कार करना शामिल है.

बहरहाल, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के लिए यह कितनी बुरी खबर साबित हो सकती है, अगर भारत या पाकिस्तान दोनों में से कोई भी एक टीम चैंपियंस ट्रॉफी-2025 में हिस्सा नहीं लेती? या अगर भारत के हिस्सा नहीं लेने से यह टूर्नामेंट स्थगित या फिर स्थानांतरित होता है तो यह पाकिस्तान के लिए कितना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है, आइए इसे समझते हैं. पर उससे पहले इस 'जिद की लड़ाई' का पूरा माजरा समझ लेते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2024 का एक दृश्य (पीटीआई)

भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्डों में कैसे ठनी?

दरअसल, पिछले साल सितंबर में भी एशिया कप के आयोजन से पहले दोनों देशों के बीच कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला था. वो टूर्नामेंट भी पाकिस्तान में ही हो रहा था और पीसीबी ही उस आयोजन का एकमात्र मेजबान था. पीसीबी चाहता था कि भारत टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान की यात्रा करे, लेकिन भारत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सामने रखते हुए यात्रा न करने के अपने रुख पर अड़ा रहा. इधर, पाक भी अपने रुख पर कायम था. गतिरोध की ये स्थिति एशिया कप की शुरुआत के करीब तक बनी रही.

टूर्नामेंट शुरू होने में जब कुछ ही दिन बचे थे तब पाकिस्तान ने नरम रुख अपनाया. उसने भारत के मैच श्रीलंका में स्थानांतरित कर दिए. इसके बाद वो टूर्नामेंट बिना किसी और विवाद के संपन्न हुआ. लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा पेचीदा लग रहा है. चैंपियंस ट्रॉफी-2025 अगले साल 19 फरवरी से 9 मार्च के बीच लाहौर, कराची और रावलपिंडी में खेली जानी है. हालांकि अभी तक इसके आयोजन पर कोई सहमति नहीं बन पाई है. और अनिश्चिचतता की वजह से न ही मैच शेड्यूल अभी तक सार्वजनिक किया गया है.

पीसीबी हाइब्रिड मॉडल के खिलाफ अपने रुख पर अड़ा हुआ है. ईएसपीएन-क्रिकइन्फो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाक क्रिकेट बोर्ड की हठ के साथ-साथ यह एहसास भी बढ़ रहा है कि इस पूरे मामले में अब पाकिस्तान सरकार भी शामिल हो गई है. यानी मेजबानी और हाइब्रिड मॉडल पर अब कोई भी फैसला पूरी तरह पीसीबी नहीं लेगा, बल्कि पाक सरकार का इसमें सीधा दखल होगा.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी

रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीबी के इस समय अडिग रहने की एक वजह यह है कि वो पिछले साल की घटनाओं से दुखी है. एशिया कप की मेजबानी में हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होने के बाद पाकिस्तान विश्व कप के लिए भारत की यात्रा करने के लिए सहमत हो गया था. यह फैसला सरकार के साथ परामर्श के बाद लिया गया था और काफी विरोध के बावजूद अंतत: इस उम्मीद पर अनुमति दी गई थी कि इसके बदले में भारत चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाक का दौरा करके आगे बढ़ेगा.

पाकिस्तान में अभी भी वही सरकार मौजूद है. मोहसिन नकवी पीसीबी के अध्यक्ष हैं जो देश के संघीय आंतरिक मंत्री भी हैं. आठ नवंबर को आईसीसी ने पीसीबी को बताया कि भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान का दौरा नहीं कर सकती, क्योंकि भारत सरकार ने उसे अनुमति नहीं दी है. आईसीसी की यह सूचना लाहौर में टूर्नामेंट के आधिकारिक लॉन्च इवेंट से तीन दिन पहले आई, जिसमें 100 दिन का काउंटडाउन शुरू होना था. इसके बजाय, अब इस इवेंट को स्थगित कर दिया गया है, जिससे आठ टीमों के इस टूर्नामेंट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

भारत या पाक की गैरमौजूदगी पड़ सकती है आईसीसी को भारी!

अगर भारत या पाकिस्तान में से कोई भी एक टीम चैंपियंस ट्रॉफी-2025 में हिस्सा नहीं लेती है तो यह आईसीसी के लिए बुरी खबर साबित हो सकती है. एनडीटीवी स्पोर्ट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीसी ने पहले ही 2027 तक के प्रसारण अधिकार सुरक्षित कर लिए हैं, जिसकी कीमत 320 करोड़ रुपये है और अन्य स्ट्रीम से 100 करोड़ रु. अतिरिक्त मिलने की उम्मीद है. दोनों टीमों के पास बहुत बड़ा प्रशंसक आधार है और उनकी गैरमौजूदगी दर्शकों की संख्या के साथ-साथ प्रतियोगिता की लोकप्रियता के लिए भी बहुत बड़ा झटका होगी.

हालांकि भारत आईसीसी के लिए सबसे अधिक राजस्व पैदा करने वाला देश बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान की अनुपस्थिति भी एक समस्या हो सकती है. आईसीसी कार्यक्रम के मुताबिक, भारत 2024 और 2031 के बीच चार अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करेगा. इनमें 2025 में महिला विश्व कप, 2026 में टी-20 विश्व कप, 2029 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 में क्रिकेट विश्व कप शामिल हैं.

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का पोस्टर

अगर पाकिस्तान भी भारत के चैंपियंस ट्रॉफी से इनकार करने के बदले के रूप में प्रतियोगिताओं के लिए अपनी टीम नहीं भेजने का फैसला करता है, तो इससे इन टूर्नामेंट के दर्शकों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. क्रिकेट पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, "इन मैचों का महत्व 2023 विश्व कप के दौरान रिकॉर्ड तोड़ 17.3 करोड़ भारतीय टीवी दर्शकों और 22.5 करोड़ डिजिटल दर्शकों की संख्या से समझा जा सकता है."

बहरहाल, अगर पाकिस्तान 'हाइब्रिड' मॉडल पर सहमत हो भी जाता है, तो भी टूर्नामेंट के लिए आवंटित फंड में समस्या हो सकती है. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने खुलासा किया कि टूर्नामेंट के लिए सात करोड़ अमरीकी डॉलर (5.90 अरब रुपये) आवंटित किए गए थे, जबकि अतिरिक्त खर्चों के लिए आईसीसी ने सिर्फ 45 लाख अमरीकी डॉलर (करीब 38 करोड़ रु.) का बजट तय किया था. ऐसे में अगर पाकिस्तान भारत के मैचों को दुबई में कराने के लिए राजी हो जाता है, तो इससे टीमों के खर्चे बढ़ेंगे और यात्रा का समय भी बढ़ेगा.

हालांकि आईसीसी अपनी योजना में बदलाव की स्थिति में अपना बजट बढ़ा सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में भारत और पाकिस्तान सहित सभी टीमों के लिए लॉजिस्टिक संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

टूर्नामेंट स्थगित या स्थानांतरित होने से पाक को कितना नुकसान?

चैंपियंस ट्रॉफी-2025 को लेकर अगर भारत और पाकिस्तान के बीच गतिरोध जारी रहा, और इसके चलते यदि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को स्थगित कर दिया जाता है या किसी अन्य देश में स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो इससे पीसीबी पर भारी वित्तीय असर पड़ सकता है. क्रिकबज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर टूर्नामेंट को स्थगित या किसी अन्य देश में स्थानांतरित किया गया तो पीसीबी को आईसीसी के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. अगर पीसीबी टूर्नामेंट से अपना नाम वापस लेता है तो उसे आईसीसी फंडिंग में पर्याप्त कटौती का भी सामना करना पड़ सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पीसीबी चैंपियंस ट्रॉफी की तारीख आगे बढ़ाता है या स्थगित करता है तो उसे मेजबानी शुल्क के रूप में संभावित रूप से साढ़े छह करोड़ अमरीकी डॉलर (5.48 अरब रु.) का नुकसान हो सकता है जो पाक क्रिकेट बोर्ड के लिए काफी बड़ी रकम है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह नुकसान और भी अधिक परेशान करने वाला होगा, क्योंकि पीसीबी ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए तीन निर्धारित स्थलों - कराची, रावलपिंडी और लाहौर में बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर निवेश किया है.

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