क्या होता है 'बॉक्सिंग डे' मैच? ऐसे ही एक मैच में खतरे में आ गया था मुरलीधरन का क्रिकेट करियर!

बॉक्सिंग डे मैचों के दौरान कई घटनाएं हुई हैं. साल 1995 की ऐसी ही एक घटना है, जब अवैध गेंदबाजी एक्शन के आरोप में श्रीलंकाई दिग्गज मुथैया मुरलीधरन के 3 ओवरों के भीतर 7 नो बॉल करार दिए गए थे

एक मैच में गेंदबाजी करते मुथैया मुरलीधरन
एक मैच में गेंदबाजी करते मुथैया मुरलीधरन

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दो टेस्ट मैचों की सिरीज का पहला मैच आज से सेंचुरियन में खेला जा रहा है. अभी तक दक्षिण अफ्रीका में भारतीय पुरुष टीम टेस्ट सिरीज जीतने में असफल रही है.

इस बार दक्षिण अफ्रीका की अपेक्षाकृत कम अनुभवी टीम को देखते हुए भारतीय प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि अगले 13 दिनों में टीम इंडिया वो कारनामा कर सकती है, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार है. 

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में बल्लेबाजी करते विराट कोहली

पिछले साल इसी मैदान पर जब दोनों टीमें भिड़ी थीं, तो भारत ने वह टेस्ट 113 रनों से जीता था. लेकिन इस बार के सेंचुरियन मुकाबले की एक और खास बात है, यह 26 दिसंबर यानी 'बॉक्सिंग डे' पर शुरू हो रहा है. अक्सर बॉक्सिंग शब्द सुनने पर हमारे जेहन में यह ख्याल आता है कि दो खिलाड़ी हाथों में बॉक्सिंग ग्लव्स पहने एक-दूसरे पर घूंसे बरसाने की तैयारी में हैं. लेकिन यहां क्रिकेट में, भले ही दो टीमें आपस में भिड़ रही हैं, इससे दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है.

तो फिर इसे बॉक्सिंग डे क्यों कहा जाता है? कब से शुरू हुआ ये सब? इन सारे सवालों के जवाब तो हम जानेंगे ही, साथ में 1995 में बॉक्सिंग डे मैच का वो किस्सा भी जानेंगे, जब श्रीलंकाई महान गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन को ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डेरेल हेयर ने संदिग्ध गेंदबाजी के आरोप में तीन ओवर के भीतर 7 नो बॉल दे डाले थे.

क्या है बॉक्सिंग डे टेस्ट? 

क्रिसमस के एक दिन बाद यानी 26 दिसंबर को शुरू होने वाले क्रिकेट टेस्ट मैच को बॉक्सिंग डे टेस्ट कहा जाता है. आमतौर पर इसका आयोजन हर साल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में होता है. इसमें भी जो बॉक्सिंग डे टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पर खेला जाता है, उसका विशेष आकर्षण होता है. फिलहाल एमसीजी में बॉक्सिंग डे पर ही पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया से भिड़ रही है.

देखा जाए तो बॉक्सिंग डे के पीछे कई कहानियां सामने आती हैं. एक कहानी यह है कि इस दिन परंपरागत रूप से चर्चों में गरीबों के लिए दान पेटियां (आम्स बॉक्सेस) खोली जाती थीं. वहीं दूसरी कहानी ये कहती है कि इस दिन उन नौकरों-मुलाजिमों को उपहारों से भरे बॉक्स दिए जाते थे, जो क्रिसमस के दिन भी काम करते थे. इसके अलावा बॉक्सिंग डे को सेंट स्टीफन के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है. स्टीफन के बारे में कहें तो इन्हें घोड़ों के संरक्षक, एक संत के रूप में देखा जाता है.

बहरहाल, इस दिन (26 दिसंबर को) दक्षिणी गोलार्द्ध में आने वाले कई राष्ट्रमंडल देशों में विभिन्न खेल प्रतियोगताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें क्रिकेट भी शामिल है. 

इतिहास में बॉक्सिंग डे टेस्ट

क्रिकेट इतिहास में पहली बार साल 1892 में हमें बॉक्सिंग डे मैच के बारे में जानकारी मिलती है, जब एक शेफील्ड शील्ड मैच में विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स की टीम आमने-सामने थी. हालांकि वह मैच 26 दिसंबर को शुरू नहीं हुआ था, बल्कि टेस्ट के शेड्यूल्ड दिनों में से एक था. साल 1950-51 में भी जब एशेज सिरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड टीमें आमने-सामने थीं, तो इस दौरान भी मेलबर्न में 22-27 दिसंबर के बीच टेस्ट का आयोजन हुआ, यानी अभी-भी इसे अपने तय दिन यानी 26 दिसंबर से शुरू होना था.

साल 1952 से 1980 तक मेलबर्न में केवल चार बॉक्सिंग डे टेस्ट खेले गए. इस दौरान एडिलेड को भी तीन बॉक्सिंग डे टेस्ट मैचों की मेजबानी मिली. हालांकि अभी तक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड और मेलबर्न क्रिकेट क्लब की ऐसी कोई योजना नहीं थी कि इसे हर साल नियमित तौर पर शुरू किया जाए. लेकिन साल 1980 से यह सुनिश्चित किया गया कि बॉक्सिंग डे टेस्ट को हर साल एमसीजी पर आयोजित किया जाना चाहिए. 

बॉक्सिंग डे मैचों ने दिए हैं कई यादगार पल

साल 1985 में स्टीव वॉ के डेब्यू से लेकर 1988 में मैल्कम मार्शल के 300 विकेटों का सफर हो, या फिर साल 1994 में शेन वार्न की इंग्लैंड के खिलाफ हैट्रिक, या फिर शेन वार्न का ही 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ 700 विकेटों का माइल स्टोन, ये सारे यादगार पल बॉक्सिंग डे मैचों में देखने को मिले हैं. इन्हीं में से एक चर्चित किस्सा है साल 1995 के बॉक्सिंग डे मैच का, जब ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका की टीमें आमने-सामने थीं. गेंदबाजी कर रहे थे दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन. क्या हुआ था तब, आइए जानते हैं.

गेंदबाजी एक्शन में मुथैया मुरलीधरन

मुरलीधरन के 3 ओवर में 7 नो बॉल

मेलबर्न में वह दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा था. पहली पारी में स्टीव वॉ और डेविड बून ने शतक लगाकर ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत की टोन सेट कर दी थी. मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे. लेकिन अंपायर डेरेल हेयर के मन में उनकी गेंदबाजी एक्शन को लेकर दुविधा चल रही थी. मुरलीधरन गेंद डाल रहे थे, लेकिन हेयर संदिग्ध एक्शन करार देकर उन्हें नो बाल करार दे रहे थे. मुरली के तीन ओवर के भीतर ही 7 नो बाल दे दिए गए. अंपायर से परेशान श्रीलंकाई टीम के कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने फील्ड छोड़ने की धमकी दी. इधर मुरलीधरन ने अपना गेंदबाजी छोर बदला. मैच तो पूरा हो गया लेकिन दोनों टीमों के बीच खटास पैदा हो गई थी.

मुरलीधरन ने इस घटना के बारे में एक इंटरव्यू में कहा था, "मैं बहुत हद तक मेरे कप्तान रहे नुवान कल्पागे (श्रीलंकाई खिलाड़ी) की तरह बॉलिंग करता था. मेरे यहां टेलीविजन नहीं था, जिसमें खुद को बॉलिंग करता देख पाऊं. 17 साल की उम्र में ही खुद को बॉलिंग करते देखा था. मैं हेयर की दुविधा समझ सकता था. लेकिन मुझे सबसे ज्यादा निराशा तब हुई जब हेयर ने मुझे बॉक्सिंग डे टेस्ट पर टोका, उन्होंने पहले भी मेरी गेंदबाजी देखी थी, लेकिन उस समय कुछ नहीं कहा था." 

इस घटना के बाद आईसीसी ने मुरलीधरन के एक्शन की जांच कराई. साल 1996 में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बायोमैकेनिकल परीक्षण के बाद मुरलीधरन के गेंदबाजी एक्शन को क्लीनचिट मिल गई. परीक्षण में सामने आया कि उनके स्वाभाविक एक्शन ने 'थ्रो करने का भ्रम' पैदा किया, लेकिन वास्तव में ऐसा था नहीं. मुरली पर बाद में भी अवैध एक्शन के आरोप लगे, लेकिन वे हर बार सही सलामत बाहर आए. 

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