आयुष शेट्टी : भारतीय बैडमिंटन का अगला बड़ा सितारा
20 वर्षीय शटलर आयुष शेट्टी के बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के बाद यह माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में इस खेल के बड़े सितारे बन सकते हैं

दो बार के ओलंपिक बैडमिंटन चैंपियन विक्टर एक्सेलसन जब आयुष शेट्टी को खेलते देखते हैं, तो उन्हें अपने बीते समय की याद आती है. इसी तरह दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पी.वी. सिंधु, शेट्टी को वर्तमान पीढ़ी का प्रतिभाशाली खिलाड़ी कहती हैं. प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी के कोच सागर चोपड़ा को लगता है कि आयुष शेट्टी में दुनिया के शीर्ष 10 शटलरों में शामिल होने की क्षमता है.
कर्नाटक के रहने वाले आयुष शेट्टी ने हाल ही में चीन के निंगबो में हुए बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में दिखा दिया कि क्यों लोग उसे तेजी से उभरता सितारा मानते हैं. तमाम बड़े और अनुभवी खिलाड़ियों को हराकर वह फाइनल तक पहुंच गया. इस उपलब्धि के साथ 20 साल के आयुष 61 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी के रूप में इस टूर्नामेंट के सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए.
हालांकि, आयुष ऐसा करके भी 1965 में बनाए दिनेश खन्ना के शानदार प्रदर्शन की बराबरी नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने अपना जोरदार खेल दिखाते हुए एक के बाद एक कई जीत हासिल करके एक मजबूत छाप छोड़ी. उन्होंने इस टूर्नामेंट में अपने से अच्छी रैंकिंग वाले चार खिलाड़ियों को हराया. इनमें सबसे बेहतरीन जीत सेमीफाइनल में इस वक्त के सबसे बेहतर रैंकिंग वाले खिलाड़ी कुनलावट विटिडसर्न से मिली थी.
6 फीट 4 इंच लंबे शेट्टी जूनियर स्तर से ही सुर्खियों में रहे हैं, जब उन्होंने 2023 में विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. पिछले साल उन्होंने यूएस ओपन जीता, जिससे यह साबित हो गया कि वे एक दमदार खिलाड़ी हैं. शेट्टी के बैडमिंटन के सफर की शुरुआत कर्नाटक के कारकाला के पास स्थित उनके पैतृक गांव सानूर से हुई, जहां उन्होंने अपने पिता को बैडमिंटन खेलते देखकर रैकेट पर हाथ आजमाना शुरू किया. शुरुआती दिनों में सीनियर शेट्टी उनके कोच बने.
हालांकि, सानूर में अपनी प्रतिभा निखारने के सीमित अवसर थे. ऐसे में अपने बेटे की खेल के प्रति जन्मजात प्रतिभा को पहचानते हुए, सीनियर शेट्टी युवा आयुष को बेहतर सुविधाओं और प्रशिक्षण के लिए कारकाला और मंगलौर भेजते थे. आखिरकार आयुष अपनी मां और बहन के साथ बेंगलुरु चले गए ताकि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ इस खेल की तैयारी कर सकें. शेट्टी पिछले छह वर्षों से प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं.
बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के बाद आयोजित एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में शेट्टी ने खुलासा किया कि उनका सपना है कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनें. उन्होंने इस टूर्नामेंट के बाद कहा, "तब मुझे अपने सपने पर उतना विश्वास नहीं था जितना अब है. मुझे इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी."
ऐसा लगता है कि वे ऐसा कर भी रहे हैं, क्योंकि सिंधु ने पिछले तीन हफ्तों में प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ी के रवैये की सराहना की है. शेट्टी और सिंधु इंडोनेशिया के कोच इरवानस्याह आदि प्रतामा के नेतृत्व वाले एक ही प्रशिक्षण समूह का हिस्सा रहे हैं. सिंधु ने X पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, “शारीरिक रूप से कोर्ट पर उनकी मजबूत उपस्थिति है. उनकी लंबाई उन्हें बेहतरीन पहुंच प्रदान करती है और उनके पास पहले से ही शक्तिशाली स्मैश मारने की कला है जो सामने वाले खिलाड़ियों को गंभीर दबाव में डाल सकती है.”
उन्होंने आगे लिखा, “उनका डिफेंस भी उतना ही जबरदस्त है. वे सामने वाले खिलाड़ी की शटल को अच्छी तरह से पढ़ते हैं. इतना ही नहीं रैलियों में दबाव को झेलने की स्वाभाविक क्षमता दिखाते हैं.” उन लंबे, कठिन और थका देने वाले अभ्यास सत्रों का असर साफ दिखाई दिया, जिसके चलते बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के बाद शेट्टी पुरुष एकल रैंकिंग में विश्व नंबर 18 पर पहुंच गए.
यह गति और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला पल शेट्टी के लिए बिल्कुल सही समय पर आया है, क्योंकि अब वे विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों को अपने अगले बड़े लक्ष्य के रूप में देख रहे हैं. उन्होंने मीडिया कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस सप्ताह मैं और अधिक आक्रामक रहा, जिससे यह पता चलता है कि मैं वास्तव में सभी मैच जीतना चाहता था."
आयुष शेट्टी बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में एक कमजोर दावेदार के रूप में आए थे. इससे पहले वे एक यूरोपीय दौरे भी गए थे, जहां उन्हें स्विस ओपन और ऑल इंग्लैंड से जल्दी बाहर होना पड़ा था. उन्होंने कहा कि साइकाएट्रिक की मदद से उन्हें कुछ दिनों पहले मिली हार के बावजूद अच्छा करने के लिए अपना आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिली.
शेट्टी का लंबा कद उनके लिए एक ताकत और कमजोरी दोनों साबित हो सकता है, जिसका फायदा विरोधी उठा सकते हैं. उन्होंने कहा, "जब मैं कोर्ट के दाहिनी ओर खेलता हूं, तो मैं बहुत तेज शॉट लगा सकता हूं. कोर्ट पर बहुत आगे रहकर खेलना आसान नहीं होता." शेट्टी ने कहा, “वे (एक्सलसन) वाकई बहुत मजबूत है और बहुत आगे (नेट के करीब) तक जाकर खेल सकते हैं और उनका डिफेंस भी बहुत बढ़िया है. इतनी कम हाइट के साथ वे यह सब कर पाते हैं, यह देखकर मुझे हैरानी होती है.”
इसके आगे शेट्टी ने कहा, “मैंने उनसे यही सीखा है. अगर मुझे बेहतरीन स्तर पर खेलना है तो मुझे भी ऐसा ही बनना होगा.” इस टूर्नामेंट के बाद शेट्टी का नाम सुर्खियों में छाया हुआ है, उन्हें भी पता है कि उम्मीदें बढ़ेंगी. इसका मतलब है कि अगर उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला करना है तो उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी.
बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप जैसे प्रदर्शन को लगातार दोहराने के लिए उन्हें और अधिक मजबूत और अधिक समझदार होने की जरूरत है. शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेलकर उन्हें हराने के बाद उन्हें जो कॉन्फिडेंस मिला है, वह भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों के लिए अच्छी बात है.