सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी पश्चिम बंगाल से नदारद
पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचे कांग्रेस के ये तीनों नेता.

पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग शनिवार को होने जा रही है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी राज्य में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंचे. इस रणनीति की असली वजह यह है कि केरल में कांग्रेस, लेफ्ट के खिलाफ लड़ रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में वह लेफ्ट के साथ मिलकर चुनाव मैदान में है. सूत्रों का कहना है कि 6 अप्रैल (केरल में वोटिंग) तक कांग्रेस पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार नहीं करेगी.
पश्चिम बंगाल में शनिवार को 30 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं. बांकुड़, झारग्राम,पुरूलिया तथा पश्चिम और पूर्वी मिदनापुर जिले जो जंगल महल के नाम से जाना जाता है. वहां शनिवार को वोटिंग होगी. इन 30 में से 6 सीटों पर कांग्रेस तो अन्य 24 सीटों पर लेफ्ट और फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दकी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस के तीनों प्रमुख नेता चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ इसलिए नहीं गए हैं कि केरल में वह लेफ्ट के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं, बल्कि अहम वजह यह भी है कि कांग्रेस यह नहीं चाहती है कि राज्य में मुकाबला त्रिकोणीय बने. राजनीतिक मामलों के जानकार शंखदीप दास कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी एक तीर से कई शिकार करना चाह रहे हैं. कांग्रेस यह अच्छी तरह से जानती है कि मुख्य मुकाबला टीएमसी और भाजपा में है. ऐसे में यदि वह चुनाव मैदान में लेफ्ट फ्रंट के साथ मजबूती से लड़ती है तो फिर त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा की राह आसान होगी. मुस्लिम वोट में बंटवारा होगा जिससे टीएमसी को नुकसान होगा. साथ ही यदि कांग्रेस-लेफ्ट के साथ पूरी ताकत से बंगाल में चुनाव लड़ती है फिर केरल में भाजपा को यह कहने में आसानी होगी कि दोनों दल साथ हैं, जिससे केरल में भाजपा को लाभ मिल सकता है.
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