झारखंड चुनावः सरयू राय ने कहा फैक्स से भेजा इस्तीफा, राज्यपाल ने कहा नहीं मिला ?
क्या वाकई झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास को यह डर सता रहा है कि सरयू राय की बर्खास्तगी राय को हीरो बना देगी?

राज्य में भाजपा से बागी हुए सरयू राय मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. वे ताल ठोकरकर ट्वीट कर रहे हैं, ‘‘उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमितशाह को अब पता चलेगा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती.’’ सरयू राय की माने तो वे राज्यपाल को इस्तीफा भेज चुके हैं. लेकिन राजभवन से मिली सूचना के मुताबिक सरयू राय ने अब तक झारखंड मंत्रिपरिषद से इस्तीफा नहीं दिया है. राज्यापाल को किसी भी माध्यम से सरयू राय का इस्तीफा नहीं मिला है. उधर सरयू राय के एक करीबी सूत्र की माने तो इस्तीफा राज्यपाल को भेजा जा चुका है. वे कह रहे हैं कि सरयू राय ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को फैक्स करने के साथ ही मीडिया में इसे सार्वजनिक भी कर दिया है. दरअसल तकनीकी पहलुओं को गिनाकर यह लोग इसलिए सरयू राय को बर्खास्त नहीं कर रहे हैं क्योंकि अभी चुनाव चल रहे हैं और इस तरह की बर्खास्तगी से सरयू राय हीरो बन सकते हैं और भाजपा की भद पिटेगी वो अलग.’’ खबर यह भी है कि फैक्स या ई-मेल से भेजा गया इस्तीफा राज्यपाल स्वीकार नहीं करता. खबरें यह भी चल रही हैं कि कहीं सरयू राय खुद ही तो नहीं फिलहाल पार्टी के सदस्य बने रहना चाहते हैं? लेकिन इस बात से सरयू राय ने साफ इनकार कर दिया. उन्होंने हाल ही में इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान कहा भी था कि अब उनकी जीत हो या हार, वे किसी भी हालत में पार्टी दोबारा ज्वाइ नहीं करेंगे.
उधर, सूत्रों की माने तो पार्टी के नियम के मुताबिक जब पार्टी का कोई सदस्य पार्टी के ही किसी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ता है तो वह खुद-ब-खुद निलंबित हो जाता है.’’ सरयू राय ने राज्यपाल को इस्तीफा फैक्स कर दिया है बावजूद इसके उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया क्यों? खबरों की माने तो ‘‘असल में मुख्यमंत्री रघुबर दास जी चुनाव में व्यस्त हैं. इसलिए इस मसले के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं.’’
क्या है इस्तीफे का नियम
मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद राजभवन मुख्यमंत्री सचिवालय को इस संबंध में सूचित करता है. मुख्यमंत्री सचिवालय से अनुशंसा मिलने के बाद इस्तीफा मंजूर करता है. राजभवन से इस मामले में संबंधित लोगों को भी सूचित किया जाता है. इसके बाद इसका बकायदा गजट नोटिफिकेशन होता है.
कांग्रेस ने कहा भाजपा में घबराहट
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, भाजपा हार के डर से घबराई हुई है. जिन लोगों पर बहुत पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए उन पर चुनाव होने के बाद दबे पांव कार्रवाई की जा रही है. भाजपा की इस दबी-छिपी कार्रवाई से पता चलता है कि अभी तक हुए दो चरणों के चुनाव में उसकी हालत खराब है. सरकार की हालत ऐसी हो गई है कि सरयू राय द्वारा राज्यपाल को इस्तीफा दिए जाने के बावजूद अब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया.
कार्रवाई में इतनी देर क्यों?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने राज्य में दो चरण का चुनाव बीत जाने के बाद 10 दिसंबर को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का हवाला देते हुए सरयू राय समेत 20 नेताओं को 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया. लक्ष्मण गिलुवा को इस कार्रवाई के लिए भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने 9 दिसंबर को आदेश जारी किया था.
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