नेमॉमः भाजपा के केरल के गढ़ की जंग

भगवा पार्टी ने 2016 के विधानसभा चुनाव में नेमॉम में सबसे पहली जीत हासिल की थी. यहां तीन दिग्गज प्रत्याशियों के बीच जबरदस्त जंग छिड़ी है.

नेमॉम से एनडीए उम्मीदवार कुम्मानम राजशेखरन
नेमॉम से एनडीए उम्मीदवार कुम्मानम राजशेखरन

केरल में आगामी 6 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होने वाला है. नेमॉन जितनी दिलचस्प टक्कर बहुत कम ही सीटों पर है. तिरवनंतपुरम के उपनगर में 19 लाख मतदाताओं वाले इस निवार्चन क्षेत्र में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुम्मानम राजशेखरन, कांग्रेस के के. मुरलीधरन और माकपा के वी. शिवनकुट्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. यह राज्य में चुनावी जंग की तीव्रता की बानगी भी पेश करता है—कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है.

नेमॉम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आया था जब भाजपा के दिग्गज नेता ओ. राजगोपाल 2016 में इस सीट से जीते, जिससे केरल विधानसभा में भगवा पार्टी को अपनी पहली सीट मिली. वाजपेयी मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके राजगोपाल ने माकपा के तत्कालीन विधायक वी. शिवनकुट्टी को 8,671 वोटों से हराया था. यह जीत ऐसे समय हासिल हुई थी जब पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) ने 91 सीटों के साथ जबरदस्त जीत हासिल की थी. लेकिन राजगोपाल की जीत से एलडीएफ और यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) भी हैरान रह गए थे. केरल में भाजपा की पहली सीट होने की वजह से इसे ‘केरल का गुजरात’ कहा जाने लगा था.

दिग्गजों की लड़ाई

यह निर्वाचन क्षेत्र 1957 से ही कभी यूडीएफ तो कभी एलडीएफ के हिस्से में जाता रहा है. 1982 में यहां से कांग्रेस के मुख्यमंत्री के. करुणाकरन पांच साल के लिए विधानसभा पहुंचे थे. पिछले एक दशक के दौरान भाजपा ने इस निर्वाचन क्षेत्र में तेजी से अपना जनाधार बढ़ाया. 2010 में स्थानीय निकाय के चुनाव में एक सीट जीतने से लेकर 2015 में 10 सीटें हासिल की और आखिरकार 2016 में विधानसभा सीट जीत गई. नेमॉम अब भाजपा का गढ़ बन गया है. पिछले साल दिसंबर में स्थानीय निकाय के चुनाव में 24 वार्डों में से उसे 14 पर जीत हासिल हुई. पिछले लोकसभा चुनाव में यह इकलौता विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र था जहां कांग्रेस के विजयी प्रत्याशी शशि थरूर भाजपा के प्रत्याशी कुम्मनम राजशेखरन से पिछड़ गए थे.

कांग्रेस ने के. करुणाकरन के बेटे मुरलीधरन को 2021 में उतारकर इस सीट को हासिल करने का संकेत दिया है. चार बार लोकसभा सांसद रह चुके मुरलीधरन दो बार विधानसभा चुनाव में जीते और 2001-04 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सफल प्रमुख—और तिरुवनंतपुरम में पार्टी का नया मुख्यालय बनवाया—के नाते वे राज्य की राजनीति से भली-भांति वाकिफ हैं. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, ‘‘मैं कांग्रेस के लिए नेमॉम जीतूंगा. मेरे पास चुनाव जीतने का विश्वास और रणनीति है.’’

पूर्व मुख्यमंत्री उम्मन चांडी को शुरू में नेमॉम से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन माना जाता है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता ए.के. ऐंटनी ने हस्तक्षेप करके अपने पूर्व राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी के बेटे को चुना. लेकिन यह कांग्रेस के लिए मुश्किल काम होगा. पिछले पांच साल से इसके कार्यकर्ता भाजपा के गढ़ में निष्क्रिय बैठे हैं. इसके विपरीत, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कुछ समय के लिए मिजोरम के राज्यपाल (2019 तक) रहे कुम्मनम पिछले दिसंबर से ‌इस निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय हैं. लेकन मौजूदा विधायक राजगोपाल को लगता है कि भाजपा को इस सीट को बचाए रखने के लिए संघर्ष करना होगा. राजगोपाल ने चुनाव के बाद से ही अपने पार्टी नेताओं से अलहदा रास्ता अपना रखा है. उन्हें चुनावी मैदान से अलग करने की वजह कुम्मनम के लिए चुनौती पैदा हो सकती है. राजगोपाल ने 15 मार्च को कुम्मनम से मुलाकात करके उन्हें बताया था कि मुरलीधर बहुत मजबूत प्रत्याशी हैं.

हिंदू वोट बैंक

इस निर्वाचन क्षेत्र में 67.1 फीसद मतदाता हिंदू हैं और वे जीत-हार का फैसला करेंगे. उनमें सबसे ज्यादा नायर 35.1 फीसद और एझावा 15 फीसद हैं. मुसलमान इस निर्वाचन क्षेत्र में दूसरे सबसे बड़े समुदाय (आबादी का 17.9 फीसद) हैं और ईसाई 15 फीसद हैं. चूंकि तीनों प्रत्याशी नायर समुदाय से हैं, लिहाजा नेमॉम में जंग अगड़ी जाति के हिंदुओं के बीच होगी. कुम्मनम की जीत अधिकांश हिंदू वोट हासिल करने पर होगी क्योंकि अल्पसंख्यक वोट एलडीएफ और यूडीएफ बांट लेंगे. आत्मविश्वास से लबरेज वी. शिवनकुट्टी कहते हैं, ‘‘लोगों को भाजपा और कांग्रेस के विश्वासघात का एहसास हो गया है. मैं पिछले 20 साल से नेमॉम के लोगों के साथ हूं. उन्हें फैसला करने दीजिए कि उनका नेतृत्व किसे करना चाहिए.’’ माकपा नेता का कहना है कि वे नेमॉम को भाजपा और यूडीएफ के चंगुल से मुक्त करने के मिशन पर हैं. नेमॉम की जंग हर हाल में तीखी होने वाली है. मतदाताओं को दिग्गजों की इस जंग के नतीजे का बेसब्री से इंतजार रहेगा.

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