चाइनीज माल से तौबा करेंगे यूपी के उद्योग
पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के फैलने का कारण चीन को मानते हुए यूपी में उद्योगपतियों ने चाइनीज माल का बहिष्कार करने की योजना बनाई है.

पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के फैलने का कारण चीन को मानते हुए यूपी में उद्योगपतियों ने चाइनीज माल का बहिष्कार करने की योजना बनाई है. वहीं, लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान पर भी उद्यमियों ने कदम बढ़ा दिए हैं. अनलॉक-1 में उद्यमी ‘वोकल फॉर लोकल' की योजना को पूरी तरह लागू करने पर आने वाली चुनौतियों और उससे निबटने का खाका बनाने में जुटे हैं. फैक्ट्री मालिकों ने चीन का माल मंगाना बंद कर दिया है.
पीएचडी चेंबर ऑफ कामर्स के यूपी चैप्टर के कोचेयरमैन मनीष खेमका बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में उद्योगपति देशी सामानों को ही कच्चा माल के रूप में उपयोग करने की योजना बना रहे हैं. इसकी शुरुआत गर्मी में सबसे ज्यादा बिकने वाले पंखे और कूलर से हुई है. पहले इन पंखों और कूलर में चीन की बनी बियरिंग लगती थी लेकिन इस बार बड़ी संख्या में उद्योगों ने देश की बनी बियरिंग का उपयोग किया है. इसी प्रकार चप्पलों में लगने वाले चीनी पॉलीमर का इस्तेमाल बंद किया जाएगा.
फर्नीचर इंडस्ट्री में भी बेंगलूरू का ही कच्चा माल खपने लगा है. हालांकि एल्युमिनियम की दीवार बनाने वाली फैक्ट्रियों को अभी स्वदेशी कच्चा माल न मिल पाने का मलाल है. इसको लेकर केंद्र तक समस्या की बात पहुंचाने की तैयारी है. गोरखपुर इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (गीडा) के उद्यमी चीन से सालाना करीब 50 करोड़ रुपये का कच्चा माल मंगाते हैं. कुछ उद्यमी सीधे सामान मंगाते हैं तो कुछ एजेंटों के माध्यम से. बदले हालात में कमोबेश सभी फैक्ट्री मालिकों ने चीन से रिश्ता तोड़ना शुरू कर दिया है.
कूलर, पंखा और सिलाई मशीन बनाने वाले एक प्रमुख उद्यमी सनूप कुमार साहू बताते हैं कि पहले बियरिंग चीन से मंगाते थे. चीनी बियरिंग सस्ती तो थी लेकिन टिकाऊ नहीं होती थी. अब स्वदेशी बियरिंग ही लगा रहे हैं. इसकी कीमत 20 से 25 रुपए ज्यादा जरूर है, लेकिन टिकाऊ है. उधर प्रदेश सरकार भी स्वदेशी तकनीक और सामानों का उपयोग बढ़ाने पर विचार कर रही है. सरकार ऐसे उद्योग जो आपन प्रोडक्ट केवल भारतीय सामानों से तैयार कर रहे हैं उन्हें इन्सेंटिव देने पर भी मंथन कर रही है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल बताते हैं कि संगठन विश्व का सबसे बड़ा ई-पोर्टल भारत ई-मार्केट के नाम से भारतीय पोर्टल तैयार कर रहा है. इसका हिस्सा देश के व्यापारी होंगे. इसके जरिए उद्योगों में स्वदेशी को बढ़ावा दिया जाएगा.
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