गले की फांस न बन जाए यूपी में चीनी का बंपर उत्पादन
लॉकडाउन की परेशानियों के बीच उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए यह खबर राहत भरी भी हो सकती है और चुनौती भरी भी. मौजूदा पेराई सत्र के चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को बहुत पीछे छोड़ दिया है. यूपी के गन्ना एवं चीनी विकास मंत्री सुरेश राणा के अनुसार 12 मई तक प्रदेश में 121 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है. यह देश के चीनी उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत से अधिक है. जबकि किसी समय चीनी उत्पादन में अग्रणी रहने वाले महाराट्र में अभी तक सिर्फ 60 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है. महाराष्ट्र में पिछले साल 110 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था लेकिन इस बार बाढ़ और सूखे से वहां गन्ने की फसल चौपट हो गई.

लॉकडाउन की परेशानियों के बीच उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए यह खबर राहत भरी भी हो सकती है और चुनौती भरी भी. मौजूदा पेराई सत्र के चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को बहुत पीछे छोड़ दिया है. यूपी के गन्ना एवं चीनी विकास मंत्री सुरेश राणा के अनुसार 12 मई तक प्रदेश में 121 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है.
यह देश के चीनी उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत से अधिक है.
किसी समय चीनी उत्पादन में अग्रणी रहने वाले महाराष्ट्र में अभी तक सिर्फ 60 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है. महाराष्ट्र में पिछले साल 110 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था लेकिन इस बार बाढ़ और सूखे से वहां गन्ने की फसल चौपट हो गई.
यूपी में लॉकडाउन में भी गन्ना किसान और चीनी उद्योग अप्रभावित रहा.
यूपी में कुल 48 लाख गन्ना किसानों का ध्यान रखते हुए प्रदेश सरकार ने यूपी के चीनी मिलों की पेराई नहीं रोकी. 12 मई तक प्रदेश की चीनी मिलें 107.15 लाख टन गन्ने की पेराई कर चुकी हैं. जबकि पिछले वर्ष चीनी मिलों ने इसी अवधि तक 101.18 लाख टन गन्ने की पेराई की थी.
प्रदेश के गन्ना मंत्री के अनुसार इस इस बार चीनी मिल अब तक दो हजार करोड़ रुपए का गन्ना अधिक पेर चुकी हैं. सुरेश राणा के मुताबिक, "अब तक यूपी में जहां 121 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, वहीं महाराष्ट्र में महज 60 लाख टन ही चीनी का उत्पादन है. चीनी उत्पादक अन्य राज्यों कर्नाटक में 35 लाख टन, तमिलनाडु में 5.4 लाख टन, गुजरात में 9 लाख टन और देश के अन्य राज्यों में 32 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है."
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष देश में कुल चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत थी लेकिन इस बार यह अब तक 45 प्रतिशत से अधिक है.
हालांकि लॉकडाउन में रेस्तरां, होटल, शादी समारोह जैसे आयोजन बंद होने पर चीनी की खपत कम हुई है ऐसे में चीनी के बंपर उत्पादन से इसके दाम अचानक कम हो सकते हैं. जिसका नुकसान चीनी मिलों को होगा ओर परिणामस्वरूप किसानों को गन्ने का भुगतान के लिए परेशान होना पड़ सकता है.
चालू पेराई सत्र का गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान 14 हजार करोड़ रुपये के पार हो गया है. चीनी की बिक्री हो नहीं रही है. निजी मिलों के संगठन यूपी. शुगर मिल्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर मदद की गुहार लगाई है. इस पर गन्ना मंत्री ने कहा कि चालू पेराई सत्र का अब तक 56 प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान हो चुका है जो बाकी रह गया है, वह भी देर सबेर हो ही जाएगा.
प्रदेश में अब तक पिछले साल के मुकाबले किसानों से 1625 करोड़ रुपये का ज्यादा गन्ना खरीदा जा चुका है और पिछले साल के मुकाबले 5 लाख टन ज्यादा चीनी का उत्पादन किया जा चुका है.
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