तो भयावह दृश्य होगा अपना घर का

अपना घर के संस्थापक डॉक्टर बी एम भारद्वाज इसे लेकर बेहद चौकन्ने हैं. वे कहते हैं, अगर एक भी कोरोना संक्रमित आ गया तो भारत में सबसे भयावह दृश्य अपना घर का होगा. हमारे 3100 बेसहारों व की जान पर बन आएगी.

बेसहारों को बचाने की कवायद
बेसहारों को बचाने की कवायद

देश में अनाथों की सेवा में लगी सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक राजस्थान के अपना घर ने कोरोना के संकट को देखते हुए नए अनाथों को लाने का काम रोक दिया है. खतरा यह है कि एक भी संक्रमित के आ जाने से यहां रह रहे 3,100 बेसहारों की जान जोखिम में फंस जाएगी.

अपना घर के संस्थापक डॉक्टर बी एम भारद्वाज इसे लेकर बेहद चौकन्ने हैं. वे कहते हैं, अगर एक भी कोरोना संक्रमित आ गया तो भारत में सबसे भयावह दृश्य अपना घर का होगा. हमारे 3100 प्रभुओं की जान पर बन आएगी. इसकी वजह यह है कि इन प्रभुओ की मानसिक या शारीरिक दशा ठीक नहीं. ऐसे में उन्हें नहलाने धुलाने और खिलाने पिलाने से लेकर रात को सुलाने तक बड़े ही संवेदनशील ढंग से संभालना पड़ता है. उन्हें सोशल दिस्तांसिंग की बात समझा पाना भी संभव न होगा.

राजस्थान समेत देश भर में संस्था के 37 सेंटर हैं जहां कुल 6500 अनाथ और बेसहारा लोगों की सेवा की जाती है. दूसरे केंद्रों पर भी नए प्रभूओं की आवक रोक दी गई है। खाने का संकट ना आए, इसके लिए महीने भर के लिए सूखे राशन का कोटा जमा कर लिया गया है, मसलन दालें, सोयाबीन, मुगौड़ी। संस्था की 150 गायों से मिलने वाला 200 लीटर दूध मौके पर बहुत काम आ रहा है.

अपना घर अपनी सेवा इकाइयों के जरिए रोज 1000 फेस मास्क तैयार कर अस्पतालों को मुहैया कर रही है. संकट लंबा खिंचा तो? इतने अनाथों का भरण पोषण? भारद्वाज कहते हैं, संभव ही नहीं कि उन पर ऐसा कोई संकट आए। ठाकुर जी का काम है, वही देखेंगे.

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