बिहार सरकार ने मजदूरों को आने से रोका
1 मई को मजदूर दिवस के मौके पर गृहमंत्रालय ने मजदूरों को राज्यों की आपसी सहमति से आने-जाने देने के लिए गाइड लाइन जारी किया लेकिन अगले ही दिन मंत्रालय ने साफ कर दिया कि यह व्यवस्था सिर्फ उन्ही मजदूरों के लिए है जो फंसे हुए हैं. नतीजा यह हुआ कि अपने घर जाने के लिए निकले हजारों मजदूरों को वापस राहत शिविरों में जाना पड़ा.

लॉकडाउन की वजह से दुर्गति झेल रहे मजदूर की परेशानी कम होने की जगह बढ़ती जा रही है. हजारों की तादाद में सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल निकले मजदूरों को पुलिस और प्रशासन की प्रताड़ना से दो-चार होना पड़ा बल्कि सरकार के हाथों भी वह ठगा महसूस कर रहे हैं.
1 मई को मजदूर दिवस के मौके पर गृहमंत्रालय ने मजदूरों को राज्यों की आपसी सहमति से आने-जाने देने के लिए गाइड लाइन जारी किया लेकिन अगले ही दिन मंत्रालय ने साफ कर दिया कि यह व्यवस्था सिर्फ उन्ही मजदूरों के लिए है जो फंसे हुए हैं. नतीजा यह हुआ कि अपने घर जाने के लिए निकले हजारों मजदूरों को वापस राहत शिविरों में जाना पड़ा.
हालांकि इसके बाद बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, ओडिशा, झारखंड जैसे राज्यों के लिए अब तक 149 ट्रेनें चल चुकी हैं और बृहस्पतिवार को 14 और ट्रेन चलनी है लेकिन, कर्नाटक और तेलंगाना ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए रेलवे को जो पत्र लिखा था उसे वापस ले लिया है. उधर, बिहार ने केरल से चलने वाली 7 श्रमिक स्पेशल ट्रेन को बिहार आने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दी जिसकी वजह से इन ट्रेनों का परिचालन रद्द करना पड़ा.
रेलवे सूत्रों का कहना है कि बीते तीन दिनों में केरल के तिरूअनंतपुरम, एल्लपी और त्रिरुर स्टेशन से बिहार के लिए 7 ट्रेन चलने की व्यवस्था की गई थी लेकिन कागजातों की कमी की वजह से ट्रेनों को रद्द करना पड़ा.
विदित हो कि मंगलवार देर शाम तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने औपचारिक रूप से कहा था कि कई राज्यों के सीएम से उनकी बात हुई और वह प्रवासी मजदूरों को इतनी तादाद में लेने के लिए तैयार नहीं हैं.
संबंधित राज्य सरकार एक साथ इतने मजदूरों की कोरोना जांच कर उन्हे कैंप में रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी करने में जुटी है. बिना तैयारी इतने मजदूर यदि राज्य में पहुंचेंगे तो वहां की स्थिति खराब हो सकती है. कर्नाटक सरकार ने पहले ही प्रवासी मजदूरों से राज्य में रहने का निवेदन कर चुकी है. बीते बुधवार को कर्नाटक सरकार ने विशेष ट्रेन चलाने के लिए रेलवे को लिखे पत्र को वापस ले लिया था.
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