ब्रज की संस्कृति का आईना होगा छत्रपति शि‍वाजी महाराज म्यूजियम

मुगल म्यूजियम का नाम बदलने के बाद इसके डिजायन को भी बदलने की कार्यवाही शुरू हो गई है. मुगलिया अंदाज में बनाए जा रहे इस म्यूजियम को ब्रज की संस्कृति के अनुरूप ढाला जाएगा.

आगरा का न‍िर्माणाधीन मुगल म्यूजियम
आगरा का न‍िर्माणाधीन मुगल म्यूजियम

आगरा में ताजमहल से 1,300 मीटर दूर बन रहे मुगल म्यूजियम का नाम बदल कर छत्रपति शि‍वाजी महाराज म्यूजियम करने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले से इसके रुके हुए निर्माण को गति मिलने की उम्मीद जगी है. पिछले नौ महीने से म्यूजियम का निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है. दिसंबर, 2017 में इस म्यूजियम का काम पूरा होना था लेकिन बजट न मिलने से इसका काम रुक गया था. 15 सितंबर की देर शाम मुख्यमंत्री योगी ने आगरा मंडल की समीक्षा बैठक दौरान जैसे ही मुगल म्यूजियम का नाम शि‍वाजी के नाम पर रखने की घोषणा की अधि‍कारी हरकत में आ गए. अगले ही दिन आगरा जिला प्रशासन के अधि‍कारियों ने म्यूजियम परिसर में पहुंचकर जरूरी नापजोख शुरू कर दी थी.

मुगल म्यूजियम का नाम बदलने के बाद इसके डिजायन को भी बदलने की कार्यवाही शुरू हो गई है. मुगलिया अंदाज में बनाए जा रहे इस म्यूजियम को ब्रज की संस्कृति के अनुरूप ढाला जाएगा. संग्रहालय परिसर में शि‍वाजी की आदमकद प्रतिमा लगाई जाएगी. एक आर्ट गैलरी बनेगी जिसमें ब्रज की संस्कृति के महत्वपूर्ण आयामों को संजोते हुए शि‍वाजी के जीवनवृत्त की झांकी भी प्रस्तुत की जाएगी. नए बनने वाले शि‍वाजी म्यूजियम में छत्रपति शि‍वाजी की जीवनी पर आधारित एक शार्ट फि‍ल्म दिखाने की व्यवस्था भी की जाएगी.

आगरा जिला प्रशासन के अधि‍कारियों ने मुगल म्यूजियम के आर्किटेक्ट का काम देख रही कंपनी 'ऑस्कॉम' को जरूरी बदलाव करने की जानकारी दे दी है. अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने शि‍वाजी म्युजियम का बिजनेस प्लान बनाने के निेर्देश भी अधि‍कारियों को दिए हैं. संग्रहालय में सैलानियों के लिए किस तरह से व्यावसायिक गतिविधि‍यों को शुरू किया जा सकता है, इसका एक विस्तृत प्लान तैयार कराने का निर्देश पर्यटन विभाग के अधि‍कारियों को दिया गया है. आगरा के उपनिदेशक पर्यटन अमित श्रीवास्तव बताते हैं कि संग्रहालय में मुख्यालय स्तर पर बिजनेस प्लान तैयार कराया जा रहा है. इसी के अनुरूप म्यूजियम को व्यावसायिक गतिविधि‍यों से जोड़ा जाएगा. गरीबी उन्मूलन के लिए विश्व बैंक की मदद से चल रहे 'प्रो पुअर टूरिज्म डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट' के तहत म्यूजियम में हस्तशि‍ल्पि‍यों को भी स्थान देने की योजना है. इससे यहां आने वाले पर्यटक संगमरमर के काम, लेटर क्राफ्ट और अन्य शि‍ल्पों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे.

आगरा में फतेहाबाद रोड पर शि‍ल्पग्राम के नजदीक 5.9 एकड़ जमीन बन रहे म्यूजियम का निर्माण कार्य जून, 2016 में पूर्ववर्ती अखि‍लेश यादव सरकार ने शुरू कराया था. प्रीकास्ट तकनीकी पर यह यूपी का पहला सरकारी प्रोजेक्ट था. दिसंबर 2017 में म्यूजियम का काम पूरा होना था लेकिन मार्च, 2017 में सरकार बदलते ही बजट न मिलने के कारण इसे बना रही कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स काम की सीमा को आगे बढ़ाती रही. पहले इस म्यूजियम का निर्माण 130 करोड़ रुपए की लागत से होना था. इसी बीच जीएसटी लागू होने और काम में एसटीपी और चारदीवारी का निर्माण भी शामिल कर लिए जाने से इस प्रोजेक्ट की निर्माण लागत 186 करोड़ रुपए तक पहुंच गई. इस आधुनिकतम म्यूजियम पर 94 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं जबकि 92 करोड़ रुपए अभी बाकी हैं. पिछले नौ महीने से 70 फीसद बन चुके इस म्युजियम का निर्माण कार्य रुका हुआ है. म्यूजियम के भवन का ढांचा (बेसमेंट, भूतल और प्रथम तल) बनकर तैयार हो चुका है.

मार्च, 2017 में यूपी की सत्ता संभालने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुगलिया स्मारकों पर टेढ़ी नजर बनाए हुए हैं. “मुगल हमारे नायक नहीं” कह कर मुख्यमंत्री योगी इन स्मारकों पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं. यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद पर्यटन विभग ने अपनी पुस्तिका और कैलेंडर से ताजमहल को गायब कर‍ दिया था. इस पर विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी को कहना पड़ा था, “ताज हमारी धरोहर है और यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का जिम्मा सरकार का है.” भाजपा सरकार बनने के बाद आगरा के पूर्व विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने आगरा का नाम बदलने की मुहिम चलाई थी. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर शहर का नाम अग्रवन करने की मांग की थी. इसके बाद आगरा विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग ने इस दिशा में साक्ष्य जुटाने भी शुरू किए थे. बाद में काफी लोगों के विरोध के चलते यह मुहिम आगे नहीं बढ़ पाई थी.

पिछले वर्ष 21 सितंबर को आगरा पहुंचे पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी ने भी मुगल म्यूजियम के भवन पर सवाल खड़े किए थे. 16 जनवरी को लखनऊ में म्यूजियम के लिए बजट जारी करने को लेकर हुई बैठक में नीलकंठ तिवारी की आर्किटेक्ट फर्म 'ऑस्कॉम' को बिजनेस प्लान उपलब्ध कराने का निेर्देश दिया था जिससे कि म्यूजियम का संचालन और देखरेख की जा सके. पर्यटन विभाग के अधि‍कारी बताते हैं कि कंपनी ने बिजनेस प्लान नहीं मुहैया कराया इसी वजह से म्यूजियम के लिए धनराशि‍ नहीं जारी की गई.

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