बजट के जरिये किसानों को लुभाने की वित्त मंत्री की कोशिश
एमएसपी और एपीएमसी को लेकर आशंकित किसानों को बजट के प्रस्तावों के जरिये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लुभाने की कोशिश की है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह कभी नहीं सोचा कि उनके बजट प्रस्तावों को सुनने के बाद आंदोलनरत किसान पिघल जाएंगे, लेकिन उन्होंने किसानों की चिंताओं को कम करने का प्रयास जरूर किया है. बजट के जरिये उन्होंने देश के कृषि विद्वानों को दोबारा यह भरोसा देने का प्रयास किया है कि सरकार विभिन्न फसलों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर तय खरीद तंत्र से दूर नहीं जा रही है और न ही कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) नेटवर्क को समाप्त कर रही है.
दरअसल, पंजाब के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के किसानों की ये दो ही सबसे बड़ी आशंकाएं हैं जिनके लिए वे वैकल्पिक मार्केटिंग तंत्र स्थापित करने के लिए बने नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने इन राज्यों से खरीदी जाने वाली दो प्रमुख फसलों, गेहूं और धान, का जिक्र किया और इस बात का विशेष उल्लेख किया कि एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) सरकार का इन अनाजों की खरीद में ट्रैक रिकॉर्ड इसकी पूर्ववर्ती यूनाइटेड प्रोग्रेसिव सरकार के मुकाबले किस तरह बेहतर रहा है. सरकार ने 2013-14 के 33,874 करोड़ रु. के मुकाबले 2020-21 के सीजन में 75,050 करोड़ रु का गेहूं खरीदा. इस दौरान धान खरीद भी 63,928 करोड़ रु. के मुकाबले इस साल 1.72 लाख करोड़ रु. तक पहुंचने का अनुमान है. उन्होंने कहा सरकारी एजेंसियों ने पिछले साल 35.6 लाख किसानों से गेहूं खरीदा था जबकि इस साल 4.35 लाख किसानों से गेहूं खरीदा है. न सिर्फ इन दोनों फसलों बल्कि दाल और कपास की पैदावार करने वाले किसानों को भी इस बार फायदा हुआ है. केंद्र सरकार ने 40 गुना ज्यादा दलहन खरीद की (10,532 करोड़ रु.) और कपास के किसानों को भी 25,975 करोड़ रु. मूल्य का कपास भी खरीदा (2013-14 में 90 करोड़ रु. का कपास खरीदा गया था).
चूंकि अभी वैश्विक भावनाएं चीन के खिलाफ हैं और यह भारत के लिए टेक्सटाइल सेक्टर को प्रोत्साहित करने का बढ़िया मौका हो सकता है. जहां तक एपीएमसी की बात है तो वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि पिछले साल स्थापित एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड तक इनकी पहुंच होगी और 1,000 अतिरिक्त एपीएमसी मंडियां इलेक्ट्रिक नेशनल मार्केट या ई-नाम से जोड़ी जाएंगी. कुल 7,000 एपीएमसी में से करीब 1,000 डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है. पंजाब में 37 एकीकृत मार्केट हैं जबकि हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्रमश: 81 और 125 एकीकृत बाजार हैं. वित्त मंत्री ने 22,000 एपीएमसी विकसित करने का अपना संकल्प दोहराया.
हस्तांतरण के फार्मूले के तहत केंद्र सरकार को 42 प्रतिशत कर राजस्व राज्यों के साथ बांटना होगा, लेकिन सेस से अर्जित रकम वह अपने खजाने में रख सकेगी. सीतारमण ने बजट में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस की घोषणा को मूल कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी में पुनर्नियोजित किया है. नया सेस पेट्रो उत्पाद, आयातित शराब, सोना, चांदी, क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सनफ्लॉवर ऑयल, कच्चा खाने का तेल के साथ कोयला, लिग्नाइट, खास तरह के फर्टिलाइजर-मटर आदि पर लगाया जाएगा.
इन घोषणाओं से किसानों को किसी तरह की सांत्वना मिलती नहीं दिख रही है और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश प्रोत्साहित करने के संकेत भी नहीं दिखते. सुप्रीम कोर्ट ने फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड ऐंड कॉमर्स (प्रमोशन ऐंड फेसिलिटेशन) ऐक्ट 2020 और फार्मर्स एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस ऐंड फार्म सर्विसेज ऐक्ट 2020 के अमल पर रोक लगा दी है. कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी कानूनों के अमल को 18 महीने तक रोकने की पेशकश की है. लेकिन अनिश्चितता के माहौल में निजी पूंजी निवेश फिलहाल होता नहीं दिखता.
इस बीच निर्मला सीतारमण टमाटर-प्याज-आलू योजना में, 22 तरह की जल्द खराब होने वाली उपज को, शामिल कर चुकी हैं तथा इसका नाम भी बदलकर ऑपरेशन ग्रीन किया जा चुका है. इस योजना के तहत इन फसलों के उत्पादन वाले कलस्टर में धन मुहैया कराया जाएगा और इन्हें बाजार से जोड़ा जाएगा. पिछले 20 महीनों में कुछ राज्यों ने इन जल्द खराब होने वाली उपज को एपीएमसी मंडी से बाहर बेचने की मंजूरी दी है. इसके अलावा वित्त मंत्री ने रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 10,000 करोड़ रु. आवंटित किए हैं जबकि माइक्रो इरिगेशन का कोष बढ़ाकर दोगुना कर दिया है.
अनुवादः मनीष दीक्षित
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