राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर कांग्रेस में माथापच्ची
राज्य सभा में मौजूदा नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद राज्यसभा से हो रहे रिटायर. अब इस पद के लिए खड़गे और चिदंबरम हैं प्रबल दावेदार.

कांग्रेस पार्टी में राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष को चुनने के लिए माथापच्ची शुरू हो गई है. बजट सत्र के आखिरी दिन 15 फरवरी को मौजूदा नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. फिलहाल पूर्व वित्त और पूर्व गृहमंत्री रहे पी. चिदंबरम और पूर्व रेलमंत्री तथा लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता रहे मल्लिकार्जुन खड़गे नेता प्रतिपक्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.
गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर से राज्य सभा के लिए चुनकर आए थे. लेकिन राज्य के बंटवारे और विधानसभा भंग होने के बाद यहां से उनके दोबारा चुने जाने की गुंजाइश खत्म हो गई है. अप्रैल में राज्य सभा के लिए वेकैंसी हो रही है, लेकिन कांग्रेस के पास सिर्फ केरल से ही खाली हो रही सीट पर अपना प्रतिनिधि जिताने लायक ताकत है. ऐसे में अगर कांग्रेस आजाद को ही नेता प्रतिपक्ष बनाए रखना चाहती है तो उन्हें केरल से प्रत्याशी बनाया जा सकता है. चूंकि संसद का मानसून सत्र जून में होता है लेकिन इस बीच विभिन्न संवैधानिक और अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए नेता प्रतिपक्ष की सलाह ली जाती है. ऐसे में इस पद को तत्काल भरना कांग्रेस के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.
वैसे राज्य सभा में कांग्रेस पार्टी के उप-नेता आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल जैसे दिग्गज भी हैं लेकिन सभी ने परोक्ष और प्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पार्टी के कामकाज के रवैये को लेकर सवाल उठाए हैं. इसलिए सियासी रूप से, कांग्रेस आलाकमान के पैमाने पर ये नेता फिट बैठेंगे या नहीं यह बड़ा सवाल है. ऐसे में सिर्फ चिदंबरम और खड़गे ही इस पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. चूंकि इसी साल तमिलनाडु में ही विधानसभा चुनाव हैं इसलिए राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने को लेकर इस राज्य को तरजीह मिल सकती है और ऐसा होने पर चिदंबरम को फायदा मिल सकता है. खड़गे इसलिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के वह खास माने जाते हैं. 2014 से 2019 तक वह लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में कांग्रेस संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा बोलने में खड़गे सक्षम हैं, यह उनके लिए एडवांटेज है. चिदंबरम चूंकि हिंदी बोलने में प्रवीण नहीं है, इसलिए खड़गे को कांग्रेस पार्टी तरजीह दे सकती है.
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