कर्नाटक में भाजपा की जीत और येदियुरप्पा का भविष्य
कर्नाटक उप-चुनाव में भाजपा की जबरदस्त जीत पार्टी के लिए जितनी खुशी की बात है, मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा के लिए भी यह उतना ही आनंदित होने का मौका शायद न हो

जीत अच्छी होती है. लेकिन सियासत में यही बात सबके लिए अच्छी हो यह जरूरी नहीं. खासकर उस दल के लिए कतई नहीं जिसका टैग लाइन ही है, ‘पहले देश, फिर दल फिर व्यक्ति.’ जी हां. कर्नाटक उप-चुनाव में भाजपा की जबरदस्त जीत पार्टी के लिए जितनी खुशी की बात है उतनी ही आनंदित होने का अवसर यह चुनाव मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा के लिए भी हो यह जरूरी नहीं. चलिए जानते हैं कि कर्नाटक उप-चुनाव के नतीजों की भावी सियासत क्या गुल खिला सकती है.
बीते 5 दिसंबर को कर्नाटक विधानसभा की 15 सीटों के लिए उप-चुनाव हुए थे. उप-चुनाव इसलिए हुए क्योंकि जेडीएस-कांग्रेस के कई विधायक अपनी पार्टी से बगावत कर के भाजपा के पाले में चले गए जिस वजह से कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार कर्नाटक में गिर गई थी और येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में सरकार का गठन किया था. बाद में इन विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो इन्हे अयोग्य ठहराए जाने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को बरकरार रखा गया लेकिन इन बागी विधायकों को उप-चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई.
15 सीटों पर हुए उप-चुनाव में भाजपा 12 सीटों पर जीती. कांग्रेस सिर्फ 2 सीट जीत सकी जबकि एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई. कर्नाटक विधानसभा में विधायकों की संख्या 224 है. सरकार बनाने के लिए 113 विधायकों की जरूरत है. इन 12 सीटों पर जीत के बाद भाजपा की ताकत 105 से बढ़ कर 117 हो गई है, जो बहुमत से अधिक है. इस तरह से कर्नाटक में भाजपा की स्थिर सरकार का रास्ता साफ हो गया है. अब वहां सरकार की स्थिरता को लेकर कोई संकट नहीं है. लेकिन बतौर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की स्थिरता को लेकर कहना अब मुश्किल है.
भाजपा में 75 वर्ष की समय सीमा परोक्ष रूप से लागू है. इससे अधिक आयु के लोगों को सरकार या संगठन में कोई भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भाजपा नहीं दे रही है. येदियुरप्पा इसके अपवाद थे. शायद इसकी अहम वजह यह है कि कर्नाटक में येदियुरप्पा के कद का बड़ा नेता अभी भाजपा के पास नहीं है.
राज्य में बहुमत पाने के लिए भाजपा की यह मजबूरी थी कि वह येदियुरप्पा के नेतृत्व को स्वीकार करें. लेकिन अब जब भाजपा के पास बहुमत है तो फिर येदियुरप्पा भाजपा के लिए जरूरी भले हों लेकिन अपरिहार्य नहीं रह गए. सूत्रों का कहना है कि भाजपा बहुत जल्द ही उनकी जगह किसी दूसरे को सीएम बनाने की पहल नहीं करेगी लेकिन अगले 6 महीने या साल भर में येदियुरप्पा की जगह किसी और को सीएम पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है.
उम्र सीमा येदियुरप्पा के अनुकूल नहीं है. माना जा रहा है कि उन्हे राज्य में पीढ़ी परिवर्तन के लिए राजी किया जाएगा और शायद उन्हे राज्यपाल की जिम्मेदारी देकर सम्मान सहित उनकी जगह किसी और को सीएम बनाने की पहल भाजपा कर सकती है. वैसे भी राज्य में इस बात की चर्चा उसी वक्त से है जब से येदियुरप्पा सीएम बने है. चूंकि येदियुरप्पा ऐसे नेता हैं जो सारे फैसले खुद लेते हैं. लेकिन जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व उन पर हावी है उससे वह खुद को असहज महसूस करते रहे हैं.
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