भाजपा कहेगी 'सच्चे हितैषी हम ही हैं' और मुसलमान मान जाएगें?

अल्पसंख्यकों के लिए भाजपा का पहला सम्मेलन उन्हें पार्टी के कामकाज के बारे में 'शिक्षित' करेगा.

पश्चिम बंगाल के नक्शे में भगवा रंग बढ़ाने की कवायद
पश्चिम बंगाल के नक्शे में भगवा रंग बढ़ाने की कवायद

यह पहली बार है जब भाजपा पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को लुभाना चाहती है. मुसलमानों की संख्या राज्य के मतदाताओं में तीस फीसदी है. यह जानते हुए कि ममता बनर्जी की ''मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति'' पर हमला करने के बावजूद हिंदू मतदाताओं के पर्याप्त वोट पार्टी को नहीं मिल रहे थे, भारतीय जनता पार्टी ने अब 'उदार' मुसलमानों तक पहुंचने का फैसला किया है.

19 फरवरी को पार्टी की राज्य इकाई मुस्लिम समुदाय के लिए एक राज्यस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी कर रही है, जिसका शीर्षक है-'नरेंद्र मोदी और अल्पसंख्यकों का विकास'.

मुस्लिम बुद्धिजीवियों, डॉक्टर, वकील और टेक्नोक्रेट्स जैसे पेशेवरों और अन्य लोगों के साथ धार्मिक नेताओं को इसमें हिस्सेदारी करने के लिए आमंत्रण भेजे गए हैं. वक्ताओं में पूर्व पत्रकार और राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता, प्रदेश भाजपा प्रमुख दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के विद्रोही नेता मुकुल रॉय शामिल होंगे.

भाजपा महास चिव देबाश्री रॉय चैधरी का कहना है कि यह मुसलमानों को उन सभी कामों के बारे में 'सूचित और शिक्षित' करने के लिए है, जो प्रधानमंत्री ने उन्हें 'सशक्त' बनाने के लिए किए हैं.

उदाहरणस्वरूप वे ''तीन तलाक से संबंधित ऐतिहासिक फैसले का हवाला देती हैं, जो लाखों गरीब मुस्लिम महिलाओं के लिए वरदान के रूप में आया है. न तो कांग्रेस और न ही किसी अन्य सरकार ने ऐसा करने की हिम्मत दिखाई, भले ही उन्हें मुसलमानों के दोस्त के रूप में देखा जा रहा हो.''

चौधरी कहती हैं कि समय आ गया है, जब मुसलमानों को यह पता चलेगा कि मोदी की अगुआई में भाजपा सरकार ने क्या हासिल किया है. वे 700 करोड़ रुपए की वार्षिक हज सब्सिडी की वापसी का उल्लेख करती हैं, जिसे अब मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा में लगाया जाएगा.

वे कहती हैं कि यह असली विकास है, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की तुष्टीकरण वाली नीति नहीं ''हम यह भी बताएंगे कि कैसे मोदी जी ने उत्तर प्रदेश में सैयद मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश का अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बनाया, जबकि पार्टी ने एक भी मुस्लिम को चुनाव का टिकट नहीं दिया था.''

चौधरी कहती हैं कि भगवा सम्मेलन में इस पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि कैसे भाजपा शासित राज्यों ने मुसलमानों की बेहतर ढंग से सेवा की है. जैसे गुजरात, जहां दस फीसदी सरकारी कर्मचारी मुस्लिम हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के शासन में बंगाल में सरकारी कार्यबल में मुसलमानों की भागीदारी मुश्किल से तीन फीसदी है. घोष कहते हैं कि मुसलमान बराबरी का हक चाहते हैं, खैरात, दान या तुष्टीकरण नहीं.

1 फरवरी को हुए उलुबेरिया लोकसभा उपचुनाव के नतीजे स्पष्ट करते हैं कि मुस्लिम मतदाताओं की उपेक्षा कर भाजपा को तृणमूल कांग्रेस को हराने की बात सोचनी भी नहीं चाहिए.

इस सीट पर 40 फीसदी मुस्लिम हैं और तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार 4,74,000 वोटों से जीता जबकि भाजपा दूसरे स्थान पर रही. हालांकि उसका मत प्रतिशत जरूर बढ़ा. भाजपा 19 फरवरी के इस आयोजन को इस साल मई-जून में होने वाले पंचायत चुनाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रही है.

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