पश्चिम बंगाल में अमित शाह का क्षति नियंत्रण का प्रयास

केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य में भाजपा के सीट बंटवारे पर गुस्से को शांत करने के लिए उठाया कदम.

पश्चिम बंगाल के रानीबंध में 15 मार्च को एक सभा को संबोधित करते अमित शाह
पश्चिम बंगाल के रानीबंध में 15 मार्च को एक सभा को संबोधित करते अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पार्टी के सीट बंटवारे के खिलाफ प्रदर्शन से क्षति को रोकने के लिए केंद्रीय नेताओं को बंगाल भेज रहे हैं. यह खबर ऐसे समय पर आई है जब भाजपा आठ चरणों वाले चुनाव के आखिरी चार चरण के लिए 172 प्रत्याशियों की अगली सूची जारी करने वाली है.

इस महीने की 14-15 तारीख को पहले चार चरण के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के फौरन बाद 13 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता उम्मीदवारों को बदलने की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए. इनमें से ज्यादातर निर्वाचन क्षेत्र हुगली, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना, अलीपुरद्वार और कूच बिहार जिलों में हैं, जहां भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था या अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी. पार्टी कार्यकर्ता इस बात से नाराज हैं कि वफादार नेताओं की अनदेखी करके तृणमूल कांग्रेस से आने वाले नेताओं को टिकट दिया जा रहा है. इस मुद्दे पर वे सड़क पर उतर आए और हेस्टिंग के पार्टी कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया.

तीसरे और चौथे चरण के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद 15 और 16 मार्च को हालात इस कदर काबू से बाहर हो गए कि शाह को दिल्ली से गुवाहाटी जाते समय 15 मार्च की रात में कोलकाता में रुकना पड़ा. उन्होंने राज्य के नेताओं को झाड़ लगाई और कुछ मामले में तो लोगों के सामने.

लोगों के विरोध प्रदर्शन से शाह स्पष्ट रूप से नाराज थे. भाजपा के इस दिग्गज ने 294 विधानसभा वाले बंगाल में 200 से ज्यादा सीटें जीतने की भविष्यवाणी की है. उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी कि मतदान से महज दो हफ्ते पहले इस तरह की स्थिति पैदा हो जाएगी. भोर तक चली बैठक में शाह ने राज्य के नेतृत्व पर बरसते हुए पूछा कि कुछ प्रत्याशियों के नाम पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा भांपने में वे क्यों नाकाम हो गए. एक नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘‘राज्य के नेताओं ने असंतुष्ट समर्थकों के साथ बैठकर बात करने और उन्हें शांत करने का कोई प्रयास नहीं किया. अब यह फैसला किया गया है कि प्रत्याशियों के नाम की घोषणा से पहले पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के पांच प्रतिनिधियों से बातचीत करेगा.’’ एक वरिष्ठ नेता ने धैर्य रखने का आग्रह किया. उन्होंने भी नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘‘भाजपा अनुशासित पार्टी है. हमें 72 घंटे दीजिए, सारा हंगामा खत्म हो जाएगा.’’

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में एक महीने तक मतदान होगा, जैसा पहले कभी नहीं हुआ. ऐसा राज्य में अतीत में मतदान के दौरान हिंसा और चुनाव में घपले के आरोपों की वजह से किया गया है.

पार्टी के एक उपाध्यक्ष ने नाम न जाहिर करने की गुजारिश के साथ कहा, ‘‘हुगली में हमारा आधार बढ़ रहा है लेकिन दलबदलुओं को कुछ सीटें मिलने की वजह से गलत संकेत गया है कि मानो वे भाजपा की बी टीम बन गए हैं. प्रत्याशियों के चयन में भी गलतियां हुई हैं. सिंगुर से 89 वर्यीय रवींद्रनाथ भट्टाचार्जी को टिकट देने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि वे अपने दम पर कुछ कदम भी नहीं चल सकते. और स्वपन दासगुप्ता की मिसाल लीजिए. हमारे मजबूत गढ़ तारकेश्वर से उनकी उम्मीदवारी पर काफी दिल खट्टा हो रहा है. उनका वहां कोई जनाधार नहीं है. अगर प्रत्याशी नहीं बदला गया तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने वोट नोटा को देने की धमकी दी है.’’

कई पार्टी नेताओं के मुताबिक, पार्टी के भीतर कलह की वजह से कुछ सीटों पर विपरीत प्रभाव पड़ने का अंदेशा है. लेकिन अब प्रत्याशी बदलने से समस्या और पेचीदा हो जाएगी. इसकी वजह से दूसरी सीटों पर बगावत हो सकती है, जहां पार्टी समर्थक प्रत्याशी के चयन से नाखुश हैं. यही नहीं, नामांकन दाखिल में ज्यादा दिन नहीं होने की वजह से प्रत्याशी बदलने पर असहज स्थिति पैदा हो सकती है.

दिग्गज नेताओं या लोकप्रिय प्रत्याशियों की कमी भी चिंता का विषय है. अब तक चार सांसदों—स्वपन दासगुप्ता, लॉकेट चटर्जी, बाबुल सुप्रियो और निसिथ प्रमाणिक—को मैदान में उतारा गया है और शाह यह स्पष्ट करने के लिए कई अन्य को उतारने वाले हैं कि वे इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर जीतना चाहते हैं. और इसके लिए हर संभव संसाधन झोंकने के‌ लिए तैयार हैं.

पार्टी के सामने एक और समस्या भाजपा की रैलियों की संख्या में अचानक कमी होना है. यहां तक कि खतरा में शाह की रैली में लोगों की भीड़ नहीं जुटी और लोग कम होने की वजह से झाड़ग्राम की रैली रद्द करनी पड़ी. शाह ने इस तरह के खराब प्रदर्शन के लिए जवाब तलब किया है. यहां तक कि योगी आदित्यनाथ की रैलियों में भी उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट रही है.

राज्य के नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे उन सीटों पर ध्यान दें जहां केंद्रीय नेतृत्व प्रचार कर रहा है. यह चुनाव दिखावे का है, और तृणमूल शाह की रैलियों में खाली कुर्सियां दिखा रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही कहना शुरू कर दिया—‘‘जनगण दिछे ताली/बीजेपी र चेयर खाली (भाजपा की कुर्सियां खाली हैं क्योंकि लोग (तृणमूल के लिए) ताली बजा रहे हैं.’’

राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर एस. दत्ता गुप्ता का कहना है, ‘‘निश्चित रूप से इसका असर उन लोगों पर पड़ने वाला है जिन्होंने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि किसको वोट डालना है. और ऐसे लोगों की संख्या काफी है, 15 फीसद से ज्यादा. इसका उन लोगों पर भी असर पड़ सकता है जो सत्ता परिवर्तन की संभावना के मद्देनजर हाल के समय में भाजपा का पक्ष ले रहे थे.’’

***

Read more!