स्कूटी योजना के पीछे क्या है योगी सरकार का चुनावी गणित?

योगी सरकार 50 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देगी. शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के साथ इस योजना के 2027 चुनाव से जुड़े राजनीतिक मायने भी हैं

UP Rani Laxmibai Scooty Scheme
सांकेतिक तस्वीर

सीतापुर जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली प्रिया (परिवर्तित नाम) ने इस साल ग्रेजुएशन फाइनल ईयर की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की है. उसका सपना लखनऊ या जिला मुख्यालय में रहकर बीएड की पढ़ाई करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का है. लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई नहीं, बल्कि रोज 18 से 20 किलोमीटर का सफर है. गांव से कॉलेज तक सीधी बस नहीं मिलती. पिता किसान हैं और परिवार के लिए स्कूटी खरीदना संभव नहीं.

ऐसे में अक्सर उसे पड़ोसियों से लिफ्ट लेनी पड़ती है या फिर पढ़ाई छोड़ने का दबाव झेलना पड़ता है. अगर रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना समय पर लागू होती है और प्रिया मेरिट सूची में जगह बना लेती है, तो उसके लिए यह सिर्फ एक वाहन नहीं होगा, बल्कि उच्च शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नया रास्ता होगा. ठीक ऐसी ही हजारों छात्राओं को सामने रखकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने 21 जुलाई को इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम मंजूरी दी है. लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ छात्राओं के भविष्य में निवेश है या फिर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी?

पांच साल पुराने वादे को चुनाव से पहले मिला अमली जामा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने फरवरी 2022 में विधानसभा चुनाव के लिए जारी अपने 'लोक कल्याण संकल्प पत्र' में मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का वादा किया था. उस समय इसे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े चुनावी वादों में शामिल किया गया था. हालांकि योजना को जमीन पर उतरने में लगभग पांच साल लग गए. अब जबकि उत्तर प्रदेश 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है, सरकार ने इसे लागू करने के लिए करीब 400 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया है.

21 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई. इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में ग्रेजुएशन फाइनल ईयर पास करने वाली राज्य की शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को मुफ्त पेट्रोल स्कूटी दी जाएगी. अनुमान है कि पहले चरण में करीब 50 हजार छात्राएं इसका लाभ लेंगी. योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश की मूल निवासी छात्राओं को मिलेगा, जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपए से कम होगी. राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित कॉलेजों की छात्राएं इसके दायरे में आएंगी. सरकार ने सिर्फ स्कूटी देने तक खुद को सीमित नहीं रखा है. वाहन के साथ पंजीकरण, व्यापक बीमा, आईएसआई मार्क हेलमेट, आवश्यक एक्सेसरी और डिलीवरी के समय पांच लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा. स्कूटी की खरीद गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल से होगी ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी रहे.

महिला वोट बैंक पर नजर

सरकार इस योजना को महिला सशक्तीकरण और उच्च शिक्षा से जोड़कर पेश कर रही है. लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इसके चुनावी असर पर भी है. उत्तर प्रदेश में महिलाओं की मतदान भागीदारी लगातार बढ़ी है. पिछले कुछ चुनावों में महिला मतदाताओं ने BJP के पक्ष में अपेक्षाकृत अधिक समर्थन दिया है. इसी कारण योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में महिलाओं को केंद्र में रखकर कई योजनाएं लागू की हैं.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मिशन शक्ति, महिला हेल्प डेस्क, एंटी रोमियो स्क्वॉड, पिंक बस सेवा, महिला स्वयं सहायता समूहों का विस्तार और महिला सुरक्षा पर जोर जैसी योजनाओं ने महिला मतदाताओं के बीच योगी सरकार की अलग पहचान बनाई है. रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना उसी श्रृंखला की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह योजना सीधे उस वर्ग को संबोधित करती है जो अगले चुनाव तक पहली बार मतदान करने वाला होगा. ग्रेजुएशन पूरी करने वाली हजारों छात्राएं 2027 तक मतदाता बन चुकी होंगी.

लखनऊ के प्रतिष्ठ‍ित अवध गर्ल्स डिग्री कालेज की प्राचार्य प्रो. बीना राय कहती हैं, “राजनीतिक तौर पर यह केवल 50 हजार छात्राओं तक सीमित योजना नहीं है. प्रत्येक छात्रा के साथ उसका पूरा परिवार भी जुड़ा है. यदि एक लाभार्थी परिवार में औसतन चार से पांच मतदाता हैं तो इसका राजनीतिक प्रभाव लाखों मतदाताओं तक पहुंच सकता है.” यही वजह है कि चुनाव से करीब छह महीना पहले इस योजना का क्रियान्वयन शुरू होना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. योगी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसने अपने चुनावी वादे को आखिरकार पूरा किया है.

ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के लिए गेम चेंजर बन सकती हैं स्कूटी

उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में उच्च शिक्षा संस्थान जिला मुख्यालय या तहसील स्तर पर केंद्रित हैं. हजारों छात्राओं को रोजाना 15 से 40 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है. सार्वजनिक परिवहन की कमी, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और आर्थिक सीमाएं अक्सर लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूटने की वजह बनती हैं. सरकार का दावा है कि योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य छात्राओं के ड्रॉपआउट को कम करना और उच्च शिक्षा में उनकी निरंतरता बनाए रखना है. साथ ही ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (GER) बढ़ाना भी इसका लक्ष्य है.

राज्य में 36 राज्य विश्वविद्यालय, 50 निजी विश्वविद्यालय, 465 राजकीय और 7,827 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय संचालित हैं. पिछले शैक्षणिक सत्र में ग्रेजुएशन स्तर पर लगभग 27.79 लाख छात्राएं पंजीकृत थीं, जबकि 2025-26 सत्र में अंतिम वर्ष की करीब नौ लाख छात्राएं हैं. इनमें से शीर्ष पांच प्रतिशत यानी लगभग 50 हजार छात्राओं को इस योजना का लाभ मिलेगा. सरकार ने इलेक्ट्रिक स्कूटी के बजाय पेट्रोल स्कूटी चुनने के पीछे भी व्यावहारिक तर्क दिया है. ग्रामीण इलाकों में अभी चार्जिंग स्टेशन सीमित हैं, जबकि पेट्रोल पंप और सर्विस सेंटर अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हैं. यही कारण है कि कैबिनेट ने पेट्रोल स्कूटी देने का फैसला किया. योजना में दिव्यांग छात्राओं, निराश्रित बेटियों और शहीदों की बेटियों को मेरिट की शर्त से छूट देना भी सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे योजना का संदेश केवल मेधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संवेदनशील वर्गों तक भी पहुंचता है.

राज्यपाल की आपत्ति के बाद बदले नियम, बढ़ा दायरा

दिलचस्प बात यह है कि योजना का मौजूदा स्वरूप पहले से अलग है. शुरुआती प्रस्ताव में केवल 80 से 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को पात्र माना गया था. लेकिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अलीगढ़ के एक दीक्षांत समारोह में इस पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए इतने अधिक अंक हासिल करना अपेक्षाकृत कठिन होता है. यदि यही शर्त रखी गई तो योजना का लाभ मुख्य रूप से शहरी छात्राओं तक सीमित रह जाएगा. राज्यपाल की टिप्पणी के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने पात्रता मानदंड में बड़ा बदलाव किया. अब पूरे विश्वविद्यालय या कॉलेज की शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को पात्र माना जाएगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों की मेधावी छात्राओं को समान अवसर मिलने की संभावना बढ़ गई है.

योजना के क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय मेरिट सूची तैयार करेंगे. कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के सत्यापन के बाद सूची पोर्टल पर अपलोड होगी. इसके बाद जिलाधिकारी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा और चयनित वेंडर के माध्यम से स्कूटी आवंटित की जाएगी. प्रत्येक जिले में वितरण समारोह आयोजित होंगे. साथ ही शिकायत निवारण पोर्टल और सर्विस सेंटर की व्यवस्था भी की जाएगी. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस योजना पर कुछ सवाल भी उठेंगे. लगभग नौ लाख अंतिम वर्ष की छात्राओं में से केवल 50 हजार को ही योजना का लाभ मिलेगा. यानी बड़ी संख्या ऐसी भी होगी जो पात्र होने के बावजूद स्कूटी नहीं पा सकेगी.

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना ऐसे समय आई है जब सभी राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुके हैं. समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और युवा रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेर रही है, जबकि कांग्रेस भी महिलाओं और युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. ऐसे माहौल में योगी सरकार ने महिला मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाली छात्राओं को केंद्र में रखकर एक ऐसा कदम उठाया है, जिसका सामाजिक और राजनीतिक, दोनों तरह का संदेश है.

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