चुनाव से पहले बजट मैनेजमेंट में जुटी योगी सरकार
2027 चुनाव से पहले योगी सरकार की नजर मौजूदा बजट खर्च की रफ्तार और अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों की वित्तीय व्यवस्था, दोनों पर है

कैबिनेट मीटिंग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों के खर्च की तैयारी शुरू कर दी है.
सरकार दिसंबर में प्रस्तावित विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में वित्तीय वर्ष 2027-28 के पहले तीन से चार महीनों के लिए ‘वोट ऑन अकाउंट’ यानी लेखानुदान पेश करने की तैयारी कर रही है.
इसका मकसद नई सरकार के गठन तक वेतन, पेंशन और पहले से चल रही विकास परियोजनाओं जैसे जरूरी खर्च के लिए धन की व्यवस्था बनाए रखना है. इसके साथ ही चुनाव से पहले अगर किसी बड़ी परियोजना, नई घोषणा या अन्य जरूरत के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता सामने आती है तो इसी सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट लाने का विकल्प भी सरकार के सामने रहेगा.
हालांकि अभी वित्त विभाग को इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रस्ताव या संकेत नहीं मिला है. वित्त विभाग की यह तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने वाली सरकार ही वित्तीय वर्ष 2027-28 का पूर्ण बजट पेश करेगी.
इसका मतलब है कि दिसंबर में पेश होने वाला लेखानुदान मौजूदा सरकार को अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में खर्च चलाने की अनुमति देगा, जबकि चुनाव के बाद नई सरकार अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक पूरे साल का बजट नए सिरे से तैयार करेगी.
नई मांगों को जगह नहीं
8 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश में वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों से वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट प्रस्ताव 30 नवंबर तक भेजने को कहा है. सरकार की ओर से साफ किया गया है कि लेखानुदान में नई मांगों का पूरा कार्यक्रम शामिल नहीं होगा.
अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार के मुताबिक सरकार 2027-28 के पहले तीन से चार महीनों के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करने की तैयारी कर रही है. इसमें वेतन और पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए जरूरी खर्च की व्यवस्था होगी. 30 नवंबर तक विभागों से मांगे गए प्रस्ताव इसी तैयारी में इस्तेमाल किए जाएंगे.
उत्तर प्रदेश सरकार फरवरी 2026 में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक के सबसे बड़े बजट के रूप में करीब 9.12 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश कर चुकी थी. इसके बाद अगस्त 2026 में करीब 59 हजार करोड़ रुपए का पहला अनुपूरक बजट भी विधानसभा में पेश किया गया.
अब दिसंबर में दूसरा अनुपूरक बजट लाने की संभावना पर भी नजर रहेगी. हालांकि इसका फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले कुछ महीनों में किन विभागों और परियोजनाओं को अतिरिक्त धन की आवश्यकता पड़ती है.
खासकर चुनाव से पहले यदि सरकार की ओर से कोई नई योजना, बड़ी परियोजना या अतिरिक्त वित्तीय घोषणा की जाती है तो उसके लिए अनुपूरक बजट की जरूरत पड़ सकती है. फिलहाल वित्त विभाग के स्तर पर दूसरे अनुपूरक बजट को लेकर कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया है.
पहले भी अपनाया गया था यही रास्ता
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिसंबर 2021 में 2021-22 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया था. इसके साथ ही 2022-23 के शुरुआती चार महीनों के लिए लेखानुदान भी विधानसभा से पारित कराया गया था.
इससे पहले अखिलेश यादव सरकार ने भी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले इसी तरह की वित्तीय प्रक्रिया अपनाई थी. 21 दिसंबर 2016 को तत्कालीन सरकार ने 2016-17 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया था. साथ ही 2017-18 के पहले पांच महीनों के लिए लेखानुदान की मांग रखी गई थी, ताकि नई सरकार बनने तक प्रतिबद्ध सरकारी खर्च चलता रहे.
हालांकि 2027 के चुनाव से पहले प्रस्तावित लेखानुदान को केवल मौजूदा सरकार की वित्तीय प्रक्रिया के तौर पर देखना अधूरा होगा. उत्तर प्रदेश में चुनावी वर्ष में पूर्ण बजट की जगह कुछ महीनों के खर्च के लिए लेखानुदान लाने की व्यवस्था पहले भी अपनाई जा चुकी है. फर्क यह है कि इस बार राज्य का बजट आकार पहले की तुलना में काफी बड़ा है और सरकार के सामने चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं तथा योजनाओं पर खर्च की गति बनाए रखने की चुनौती भी है.
छह महीने में 60% खर्च का लक्ष्य
दिसंबर के लेखानुदान की तैयारी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट खर्च की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. 27 सितंबर की शाम वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों की वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की.
समीक्षा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के कुल बजट का आकार 9,99,056.48 करोड़ रुपए बताया गया. यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 1,58,474.15 करोड़ रुपए अधिक है. इसमें विकास योजनाओं के लिए 5,01,957.09 करोड़ रुपए का प्रावधान है.
बैठक में बताया गया कि अब तक शासन स्तर से 5,15,918.44 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं. यह कुल बजट का 51.6 प्रतिशत है. इनमें योजनाओं से जुड़ी 2.13 लाख करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं. इसके मुकाबले प्रदेश में अब तक 2,83,870.11 करोड़ रुपए का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है.
मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष की पहली छमाही खत्म होने के मद्देनजर अगले दो महीनों में कम से कम 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और कुल आवंटित बजट के मुकाबले कम से कम 60 प्रतिशत वास्तविक खर्च सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया है.
विभागवार आंकड़ों में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग का बजट खर्च के मामले में बेहतर प्रदर्शन रहा. विभाग ने अपने बजट के मुकाबले 54 प्रतिशत खर्च किया है. ऊर्जा विभाग के 73,348.56 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 41,541.93 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं.
बेसिक शिक्षा विभाग के 82,245.68 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 65,982.04 करोड़ रुपए यानी 80.2 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं. इस विभाग में वास्तविक खर्च 31,718.92 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है. गृह विभाग में 43,891.37 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 40,502.28 करोड़ रुपए यानी 92.2 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं, जबकि वास्तविक खर्च 14,712.68 करोड़ रुपए है.
लोक निर्माण विभाग के 45,270.69 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 27,375.91 करोड़ रुपए यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हुई हैं और 14,178.60 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 39,906.52 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 25,557.48 करोड़ रुपए यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं और 10,286.50 करोड़ रुपए का खर्च दर्ज किया गया है.
यानी एक तरफ सरकार अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों के लिए लेखानुदान की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में बजट को जमीन पर उतारने की गति बढ़ाने में जुटी है. मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्रियों के साथ नियमित समीक्षा और वित्त विभाग को लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं.
सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान क्रेडिट कार्ड, बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और केंद्र की सहायता से चलने वाली योजनाओं के लिए लंबित धनराशि हासिल करना भी शामिल है.
मुख्यमंत्री ने गांववार और किसानवार मैपिंग कर पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने को कहा है. इसी तरह एमएसएमई विभाग को उत्तर प्रदेश के जीआई टैग वाले उत्पादों की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.
केंद्र की मदद से चलने वाली योजनाओं में लंबित राशि और स्वीकृतियों के लिए विभागीय मंत्रियों को संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे समन्वय करने को कहा गया है. इन दोनों वित्तीय कवायदों को साथ रखकर देखें तो दिसंबर का विधानसभा सत्र खास महत्व रखेगा. एक ओर 2027-28 के शुरुआती महीनों का खर्च चलाने के लिए लेखानुदान की तैयारी होगी, दूसरी ओर मौजूदा वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त जरूरत होने पर दूसरे अनुपूरक बजट का रास्ता खुला रहेगा.
फिलहाल दूसरा अनुपूरक बजट आएगा या नहीं, यह तय नहीं है. लेकिन 30 नवंबर तक विभागों से बजट प्रस्ताव मांगने और मौजूदा बजट खर्च को तेजी से आगे बढ़ाने की कवायद से इतना स्पष्ट है कि सरकार ने चुनावी वर्ष की वित्तीय तैयारी शुरू कर दी है.