भाजपा के चुनावी अभि‍यान की धुरी बने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्र‍ियों के बीच योगी आदित्यनाथ देश भर में प्रचार के लिए भगवा दल के “स्टार कैंपेनर सीएम” के रूप में सबसे आगे हैं

मुरादाबाद में उज्ज्वल योजना की लाभार्थी के साथ मुख्यमंत्री योगी
मुरादाबाद में उज्ज्वल योजना की लाभार्थी के साथ मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुरादाबाद और रामपुर का दौरा करना रणनीतिक लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. दोपहर 11 बजे मुख्यमंत्री योगी जब मुरादाबाद के मूंढ़ापांडे एयरपोर्ट पर उतरे तो यह भगवा दल के लिए राजनीतिक रूप से दुरुह साबित हो रहे इलाके में बीते तीन महीने में उनका चौथा दौरा था. 

मुख्यमंत्री योगी ने मुरादाबाद के डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में प्रशिक्षु दारोगाओं की पासिंग आउट परेड की सलामी लेने के बाद सर्किट हाउस के पीछे आयोजित जनसभा में राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास के साथ 500 करोड़ रुपए से अधिक की योजनाओं की सौगात मुरादाबाद को दी. 

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने रामपुर जिले में स्वार स्थ‍ित महात्मा गांधी स्टेडियम से जिले के लिए 600 करोड़ रुपए से अधिक की विकास योजनाओं की नींव रखी. लोकसभा चुनाव की अधि‍सूचना लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुरादाबाद मंडल पहुंचना सत्तारूढ़ भाजपा के लिए काफी महत्पूर्ण है. 

असल में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मुरादाबाद की सभी छह लोकसभा सीटों (मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर और नगीना) पर हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस इलाके पर नजर रखे हुए हैं. हालांकि वर्ष 2022 के उपचुनाव में भाजपा ने रामपुर लोकसभा सीट जीत ली थी बावजूद इसके यह इलाका अभी-भी भाजपा खेमे के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. 

इससे पहले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस इलाके की सभी छह लोकसभा सीटें जीती थीं. दस वर्ष पहले की रिकॉर्ड जीत को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दोहराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद मंडल पर काफी ध्यान दिया है. चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा से पहले किसान दिवस, 23 दिसंबर 2023, को बिलारी में उनकी प्रतिमा का अनावरण करके किसानों और जाट मतदाताओं को साधने की पूरी कोशिश की थी. वहीं संभल के कंबोह ऐंचोड़ा में 19 फरवरी को श्री कल्कि धाम के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी शामिल हुए. कार्यक्रम से पहले 12 फरवरी को योगी यहां तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे. 

लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले यूपी में तूफानी दौरा कर योगी आदित्यनाथ ने 15 मार्च को सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, गोरखपुर, 14 मार्च को बलरामपुर, गोंडा, अयोध्या, आंबेडकर नगर, 13 मार्च को उन्नाव, फर्रुखाबाद, बरेली पहुंचकर बड़ी संख्या में विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करके भाजपा सरकार के विकास के एजेंडे को धार देने की कोशिश की. 

इस दौरान योगी ने बड़ी चतुराई से राजनीतिक संदेश भी दिए. 15 मार्च को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब गोंडा पहुंचे तो सभी नजरें जिले की सीमा में आने वाली कैसरगंज लोकसभा सीट से सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगी हुई थीं. भाजपा ने गोंडा लोकसभा सीट से अपने उम्मीदार की घोषणा करने के साथ कैसरगंज सीट पर को होल्ड में डाल दिया था. पहलवानों के साथ विवाद में फंसे बृजभूषण शरण सिंह के भाजपा के साथ रिश्तों के लिहाज से योगी की गोंडा में रैली काफी अहम थी. 

15 मार्च की दोपहर बाद अयोध्या से हवाई उड़ान भरने के बाद गोंडा पहुंचे सीएम योगी ने हेलीकॉप्टर से उतरकर सीधे टॉमसन कालेज में सभास्थल के मंच का रुख किया. यहां मंच पर टंगे बैनर में किसी पर भी बृजभूषण शरण सिंह का नाम और चित्र नहीं था. कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह से योगी ने दूरी बनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ का राजनीतिक संदेश दिया. 

वहीं बृजभूषण के सियासी वारिस उनके बेटे सदर विधायक प्रतीक भूषण की तारीफ की. गोंडा की रैली में योगी ने कहा, “वर्ष 2017 के पहले गोंडा की स्थिति क्या थी? 2015- 16 का सर्वे आया था तो गोंडा सबसे गंदा शहर था, तब मैंने प्रतीक भूषण से कहा था कि जनता ने आशीर्वाद दिया है, विधायक बने हैं तो गोंडा को स्वच्छ शहर के रूप में स्थापित करो. उन्होंने प्रयास किया, आज गोंडा स्वच्छ हो गया है.” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंच से प्रतीक भूषण के लिए कहे गए शब्दों के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. इस तरह योगी आदित्यनाथ अपनी हर रैलियों में भाजपा के घो‍षित उम्मीवार को मंच पर जगह देकर जनता से उन्हें विजयी बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार केंद्र की सत्ता में आसीन कराने का निवेदन करते हैं. 

यूपी की सभी 80 सीटें जीतने के लक्ष्य को लेकर लोकसभा चुनाव में जा रही भाजपा के चुनावी अभियान की सबसे मजबूत कड़ी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बन गए हैं. लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां बीते ढाई महीने में पश्चिम से पूरब तक अपने दौरों की झड़ी लगाकर सभी क्षेत्रों को में विकास योजनाओं की बरसात की है तो वहीं वहीं भाजपा ने भी इसी क्रम में बूथ पुनर्गठन से लेकर सम्मेलनों और अभियानों के जरिए योगी द्वारा बनाए गए माहौल को जमीन तक ले जाने की पूरी कोशिश की है. 

मुख्यमंत्री योगी के करीबी और प्रदेश भाजपा के मंत्री डा. चंद्रमोहन बताते हैं, “मुख्यमंत्री योगी जनवरी के पहले सप्ताह से ही यूपी में चुनाव पूर्व अभियान में जुट गए थे. मुख्ममंत्री ने न केवल पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में शिरकत कर कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए चुनाव जीत का मंत्र दिया, वहीं दूसरी ओर अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा सहित अन्य धार्मिक शहरों का बार-बार दौरा कर भाजपा सरकार के सांस्कृतिक एजेंडे को भी धार दी. विभिन्न विभाग में नवच‍यनितों को नियुक्त‍ि पत्र वितरित करने के साथ विभि‍न्न इलाकों में विकास योजनाओं के लोकार्पण और शि‍लान्यास के जरिए मुख्यमंत्री योगी ने डबल इंजन की सरकार के विकास के संकल्प को जाहिर करते हुए ‘मोदी की गारंटी’ के प्रति भी मंच से विश्वास दिलाया.” 

लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्र‍ियों के बीच देश भर में प्रचार के लिए भगवा दल के ‘स्टार कैंपेनर’ के रूप में सबसे आगे हैं. जानकारी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ देश के इकलौते मुख्यमंत्री हैं जिनकी बड़ी संख्या में चुनावी रैलियों की डिमांड करीब हर भाजपा शासित राज्यों से केंद्रीय नेतृत्व को प्राप्त हुई है. इतना ही नहीं तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों में भी योगी आदित्यनाथ भाजपा उम्मीवार के पक्ष में चुनावी रैलियों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले मुख्यमंत्री हैं. 

पिछले चुनावों के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. पिछले वर्ष दिसंबर में संपन्न हुए चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के विधान सभा चुनाव प्रचार में भी मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ज्यादा रैलियां की थीं. इन चारों राज्यों में योगी ने कुल 92 भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में 57 रैलियां की थीं. इनमें से 60 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी. इससे पहले कर्नाटक और गुजरात में भी सीएम योगी ने भी कुल 30 से ज्यादा चुनावी रैलियां की थीं. लखनऊ के डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुशील पांडेय बताते हैं, “यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह कड़ाई से कानून व्यवस्था का पालन कराया है उससे वे दूसरे राज्यों में एक ब्रांड के रूप में स्थापित हुए हैं. यूपी में अवैध ढंग से निर्मित अपराधियों की संपत्त‍ियों को जिस तरह से बुलडोजर से ढहाया गया, उससे योगी की दूसरे राज्यों में भी ‘बुलडोजर बाबा’ सरीखी छवि बन गई है. इसी छवि के चलते ही वह दूसरे राज्यों के चुनावी अभियान में सबसे ज्यादा डिमांड वाले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए हैं.”

रणनीतिक कुशलता के चलते योगी आदित्यनाथ भाजपा की चुनावी रणनीति के प्रमुख सूत्रधार बनकर उभरे हैं. 27 फरवरी को यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में मुख्यमंत्री योगी के चुनावी कौशल की भी परीक्षा थी. विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से भाजपा के सात उम्मीदवार आसानी से राज्यसभा चुनाव जीत सकते थे लेकिन पार्टी ने आठवां उम्मीदवार उतार कर चुनाव को रोचक बना दिया था. 

असल में सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी को सपा के विधायकों में फैले असंतोष की जानकारी मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने कमान संभाली. योगी की रणनीति से ही भाजपा अप्रत्याशित रूप से राज्यसभा चुनाव में अपना आठवां उम्मीवार भी जिताने में सफल हुई. इसका संकेत इसी से मिला कि सपा के जितने भी विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग की उन्होंने मतदान करने जाने से पहले मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात भी की थी. 

इतना ही नहीं वर्ष 2019 में यूपी में हारी हुई 16 लोकसभा सीटों पर भी भाजपा की रणनीति योगी के इर्दगिर्द ही घूम रही है. बीते छह महीनों के दौरान सीएम योगी ने इन सभी सीटों पर कम से कम एक बार रैली करके बड़ी संख्या में विकास योजनाओं की शुरुआत की है. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी किसी भी जिले में रैली करने जाने पर वहां के विपक्षी दलों के विधायकों के साथ भी बैठकें करते हैं. इससे दूसरे दलों में भी मुख्यमंत्री योगी की पैठ बढ़ी है. अब देखना हे कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘ब्रांड योगी’ का सिक्का भाजपा को कितना लाभ पहुंचाता है? 

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