भाजपा की राजनीतिक यात्राओं से अलग-थलग दिख रहीं वसुंधरा राजे आखिर क्या करने वाली हैं?
राजस्थान में भाजपा की 'परिवर्तन यात्रा' शुरू होने से एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पार्टी नेताओं के बिना देवदर्शन यात्रा करके कई तरह की अटकलों को हवा दे दी है

सितंबर की 2 तारीख से भाजपा राजस्थान में अपनी परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली है लेकिन उससे एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की देवदर्शन यात्रा ने पार्टी नेतृत्व को सकते में ला दिया है. राजनीतिक हलकों में वसुंधरा राजे की इस यात्रा को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. वसुंधरा राजे की नाराजगी की वजह यह है कि उन्हें राजस्थान में तीन माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई है.
भाजपा की ओर से 2 दिसंबर से चारों दिशाओं से जो चार परिवर्तन यात्राएं शुरू होने वाली हैं उनमें भी वसुंधरा राजे को कोई खास जिम्मा नहीं मिला है. पार्टी के किसी भी केंद्रीय और स्थानीय नेता को साथ लिए वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा की. राजसमंद के चारभुजा मंदिर, नाथद्वारा के श्रीनाथ मंदिर और बांसवाड़ा के त्रिपुर सुंदरा मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना की.
चारभुजा मंदिर में पूजा करने के बाद वसुंधरा राजे ने मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा, "मैं जब भी कोई बड़ा काम करती हूं तो चारभुजा मंदिर के दर्शन करके और उनका आशीर्वाद लेकर निकलती हूं.’’ वसुंधरा राजे आखिर कौनसा बड़ा काम करने वाली हैं, इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डंडिया का कहना है, "वसुंधरा राजे राजस्थान में भाजपा की इकलौती नेता हैं जिनकी मास अपील है, उन्हें चाहकर भी इग्नोर नहीं किया जा सकता. देवदर्शन यात्राओं के जरिए वसुंधरा राजे ने पार्टी आलाकमान को अपनी ताकत दिखा दी है.’’
पिछले 20 साल में यह पहला मौका होगा जब वसुंधरा राजे को पार्टी में इस तरह किनारे किया गया है. 2003 के बाद से राजस्थान में हुए सभी चुनाव और यात्राओं की जिम्मेदारी वसुंधरा राजे को मिलती रही है. पार्टी की ओर से जो तैयारियां की जा रही हैं उनके अनुसार वसुंधरा राजे के अलावा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ चारों यात्राओं में बराबर भागीदारी करेंगे. मिलापचंद डंडिया का कहना है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे का कद इन नेताओं से काफी बड़ा है, इस कारण भी वे इनके साथ चलने में परहेज कर रही हैं.
भाजपा ने इस बार यह साफ कर दिया है कि वह राजस्थान में किसी एक चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि हर संभाग के अलग-अलग चेहरे होंगे. हालांकि, वर्ष 2003 से राजस्थान में वसुंधराराजे भाजपा का मुख्य चेहरा रही हैं.
राजस्थान में वसुंधरा राजे की अब तक की राजनीतिक यात्राएं
26 अप्रैल 2003 का दिन था. राजस्थान में पारा 48 डिग्री को छू रहा था. ऐसा लग रहा था मानो आसमान से आग बरस रही हो. एक साल पहले ही राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभालने वाली वसुंधरा राजे ने प्रदेश में 153 सीटों के भारी-बहुमत वाली तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ परितर्वन यात्रा की शुरुआत के लिए यही दिन मुकर्रर किया था.
राजसमंद जिले के चारभुजा मंदिर से परिवर्तन यात्रा को रवाना करने के लिए उस दिन तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत केंद्र और राज्य के कई आला भाजपा नेता जुटे थे. भीषण गर्मी को देखते हुए लालकृष्ण आडवाणी व अन्य नेताओं ने राजपरिवार से जुड़ी वसुंधरा राजे को यात्रा कुछ दिन टालने का सुझाव दिया लेकिन, वसुंधराराजे ने यात्रा जारी रखी. इसके बाद उन्होंने सात माह में करीब 13 हजार किलोमीटर की यात्रा की और 32 जिलों के 200 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंची.
इस यात्रा की खास बात ये रही कि वसुंधरा राजे जिस भी क्षेत्र में गई उन्होंने वहां की परंपरागत पोशाक धारण की. वसुंधरा राजे का यह लुक जनता को बेहद पसंद आया. माना जाता है कि इस परिवर्तन यात्रा का ही असर था कि 2003 के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में 153 सीटों वाली कांग्रेस 56 सीट पर सिमट गई और भाजपा ने 120 सीटें जीतकर राजस्थान में अपनी सरकार बनाई.
इसके 10 साल बाद 2013 में एक बार फिर अप्रैल की उसी झुलसा देने वाली गर्मी में वसुंधराराजे ने प्रदेश की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ अपनी दूसरी यात्रा निकाली जिसे सुराज संकल्प यात्रा का नाम दिया गया. 4 अप्रैल 2013 को राजसमंद जिले के चारभुजा मंदिर से ही इस यात्रा का आगाज हुआ. इस बार भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने यात्रा को रवाना किया. 21 जुलाई 2013 तक करीब 7 हजार किलोमीटर और 109 दिन तक चली इस यात्रा के बाद हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा को प्रचण्ड बहुमत मिला. राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों में 163 पर जीत हासिल कर वसुंधराराजे दूसरी बार मुख्यमंत्री बनीं.
इसके बाद 2018 में जब राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार थी तो अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए उन्होंने एक ओर यात्रा निकाली जिसे गौरव यात्रा का नाम दिया गया. राजसमंद जिले के चारभुजा मंदिर से ही यह यात्रा निकाली गई. भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस यात्रा को रवाना किया. करीब 4 हजार किलोमीटर और 29 जिलों के 126 विधानसभा क्षेत्रों में यह यात्रा पहुंची. यात्रा का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजमेर में किया.
19 दिन चलेंगी भाजपा की परिवर्तन यात्राएं
भाजपा की चार दिशाओं से चार परिवर्तन यात्राएं 19 दिन चलेंगी और प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों तक पहुंचेंगी. पार्टी के केंद्रीय नेता इन यात्राओं में कहां-कहां शिरकत करेंगे यह तो तय हो गया है लेकिन एन वक्त तक राजस्थान के नेता कहां और क्या भूमिका निभाएंगे यह तय नहीं हो सका.
दो सितंबर को सवाई माधोपुर जिले के त्रिनेत्र गणेश मंदिर से पहली यात्रा शुरू होगी. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह यात्रा भरतपुर और कोटा संभाग के 47 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी. पूर्व मंत्री अरूण चतुर्वेदी को इस यात्रा का संयोजक बनाया गया है.
दूसरी यात्रा तीन सितंबर को डूंगरपुर जिले के आदिवासी महाकुंभ बेणेश्वर धाम से शुरू होगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हरी झंडी दिखाकर परिवर्तन रथ को रवाना करेंगे. यह यात्रा 52 विधानसभा सीटों को कवर करेगी. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष चुन्नी लाल गरासिया को इस यात्रा का संयोजक बनाया गया है. बताया जा रहा है कि इस यात्रा का नेतृत्व पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी करेंगे.
तीसरी परिवर्तन यात्रा चार सितंबर को जैसमलेर जिले की धार्मिक नगरी रामदेवरा से शुरू होगी. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में निकलने वाली इस यात्रा को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह यात्रा 51 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी. इस यात्रा के लिए भाजपा नेता राजेंद्र गहलोत को संयोजक बनाया गया है. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस यात्रा के मुख्य चेहरा होंगे.
चौथी यात्रा हनुमानगढ़ जिले के तीर्थ स्थल गोगामेड़ी से पांच सितंबर को रवाना होगी. भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की अगवानी में निकलने वाली इस यात्रा को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह यात्रा 50 विधानसभा क्षेत्रों से होकर निकलेगी. इस यात्रा का संयोजक भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सीआर चौधरी को बनाया गया है. 25 सितंबर को जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस के अवसर पर उनके जन्म स्थान जयपुर जिले के धानक्या गांव में इस यात्रा का समापन होगा. समापन समाराहे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे.