तस्करी के नए तरीकों से जांच एजेंसियों को कैसे चकमा दे रहे सोना तस्कर!

मुरादाबाद पुलिस ने नाटकीय ढंग से पेट में सोने के कैप्सूल छिपाकर ला रहे तस्करों के गैंग का पर्दाफाश किया. कस्टम विभाग की खामी का फायदा उठाकर पेट में छिपाकर लाया जा रहा सोना

अस्पताल में भर्ती तस्कर.
अस्पताल में भर्ती तस्कर.

यह शायद मुरादाबाद पुलिस के लिए भी अब तक का सबसे चौंकाने वाला केस होगा. वह इसलिए कि पुलिस ने कार्रवाई तो शुरू की थी, किडनैप हुए छह लोगों को छुड़ाने के लिए, लेकिन इस दौरान सोना तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हो गया.

यह मामला 23 मई की शाम को तब सामने आया जब दो वाहनों में सवार छह हथियारबंद अपराधियों ने मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राजमार्ग पर पुराने टोल प्लाजा के पास एक कार को रोका. अपहरणकर्ताओं में से एक ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और कार के अंदर इंस्पेक्टर की टोपी भी रखी हुई थी. 

उन्होंने सुरक्षा जांच के बहाने वाहन को रोका और फिर बंदूक की नोक पर उसमें बैठे सभी सात व्यक्तियों को बंधक बना लिया और उन्हें कुछ दूरी पर मौजूद एक सुनसान जंगली क्षेत्र में ले गए. अपहरणकर्ताओं को कथित तौर पर पहले से सूचना थी कि ये लोग अपने पेट में सोना तस्करी कर ला रहे हैं. अपहरणकर्ता सोने को निकालने के लिए इन बंधकों के पेट को चीरने की तैयारी करने लगे कि इसी बीच अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागे एक व्यक्ति‍ ने पुलिस को इत्तला कर दी. 

कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची तो अपहरणकर्ताओं ने गोलियां चला दीं, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक अपहरणकर्ताओं में से दो के पैर में गोली लगी और उन्हें पकड़ लिया गया. हालांकि चार अन्य संदिग्ध भागने में सफल रहे, जबकि सभी छह बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया. 

पुलिस सोने की तस्करी के संदेह की पुष्टि के लिए सऊदी से लौटने वाले इन छह लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए मुंधन पांडे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले आई. इन लोगों के पेट में कुछ भी असामान्य नहीं दिखा लेकिन जब पुलिस ने इन लोगों को जिला अस्पताल रेफर करने का फैसला किया तो ये आनाकानी करने लगे. 

इससे पुलिस का संदेह बढ़ गया और इसके बाद इनकी एक निजी डायग्नोस्टिक लैब में इनकी जांच कराई. पुलिस के मुताबिक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि इनमें से चार लोगों- अजहरुद्दीन, जुल्फिकार, मुतल्लवी और शाहन आलम के पेट में सोना छिपा हुआ था, जबकि दो अन्य मोहम्मद नावेद और जाहिद अली के पेट में सोना नहीं था. इसके बाद जिला अस्पताल में जांच की गई तो भी उनके पेट में सोना होने की पुष्टि हुई. 

मुरादाबाद के एसपी (शहर) कुमार रणविजय सिंह ने बताया, "सभी छह लोग रामपुर जिले के टांडा के रहने वाले थे और सऊदी अरब में काम करते थे. ये लोग 23 मई को दिल्ली पहुंचे थे. यहां से ये अपने होम टाउन जा रहे थे तभी उनका अपहरण कर लिया गया." 

तस्करों में रामपुर के टांडा के रहने वाले चार लोग शामिल हैं. डॉक्टरों ने इनके पेट से 24 घंटे के भीतर सोने के 27 कैप्सूल निकाल लिए हैं. इसके लिए एक खास पद्धति और दवाओं का सहारा लेकर मल के रास्ते सोने के कैप्सूल निकाले गए हैं. अभी एक तस्कर के पेट में दो कैप्सूल बाकी हैं. डॉक्टरों की टीम कैप्सूल निकालने में जुटी है. एक कैप्सूल का वजन करीब 35 ग्राम है. पुलिस के अनुसार अब तक करीब 945 ग्राम सोना बरामद हो चुका है.

जांच एजेंसियों को चकमा देकर पेट में सोना छिपा कर लाने का यह कोई नया मामला नहीं है. साल भर पहले ही अप्रैल 2024 की सुबह शारजाह से लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे रामपुर के टांडा क्षेत्र के ही 36 तस्करों को कस्टम विभाग ने पकड़ कर उनके कब्जे से करीब 3.2 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी सिगरेट बरामद की थी. पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये आरोपी पेट में सोना छिपाकर भी लाए थे. 

सभी को पकड़ा गया, लेकिन अगले दिन 29 आरोपी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर कस्टम की गिरफ्त से भाग निकले थे. इस सनसनीखेज फरारी के बाद पूरे कस्टम विभाग में हड़कंप मच गया था. कस्टम विभाग के तत्कालीन सहायक आयुक्त ए. के. सिंह ने सरोजनी नगर थाने में 36 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. रिपोर्ट में सोना व सिगरेट तस्करी के गंभीर आरोप लगाए गए थे. तस्करों की फरारी की घटना के बाद कस्टम विभाग ने बड़ीं कार्रवाई करते हुए आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था और मामले की आंतरिक जांच चल रही है.

फिर इसी वर्ष फरवरी 2025 में मुरादाबाद के टांडा मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद आलम को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई. परिजन उसे टांडा में एक निजी क्लिनिक पर लेकर पहुंचे. जांच में डॉक्टर को पेट में कुछ संदिग्ध दिखा, तो ऑपरेशन की सलाह दी गई. ऑपरेशन के दौरान आलम की मौत हो गई. उसके पेट में सोना होने की पुष्टि हुई थी.

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पेट के जरिए सोना तस्करी का तरीका जोखिम भरा है. सोने की छोटी गोलियों को निगलकर लाया जाता है. ये गोलियां पेट में लंबे समय तक रहें इसके लिए पहले लोगों को बाकायदा खानपान की ट्रेनिंग दी जाती है. कुछ ऐसी दवाएं भी दी जाती हैं जिससे सोने की गोलियां या कैप्सूल से पेट में दर्द न हों. 

इन सोने के कैप्सूल को घर पहुंचने के बाद शौच के जरिये निकाला जाता है. इसके लिए भी पहले दवाएं खानी पड़ती हैं. पुलिस को कुछ आरोपियों के घरों में इसके लिए विशेष जाली लगी टॉयलेट सीट भी मिली है,  ताकि मल के साथ जाने वाली गोलियां आसानी से अलग हो सकें. पेट में सोने के कैप्सूल एयरपोर्ट पर कस्टम की आम जांच में पकड़ में नहीं आते हैं. यह अल्ट्रासाउंड या हाईरिजॉल्यूशन एक्सरे में ही दिखाई पड़ते हैं. 

इसी का सहारा लेकर सोने के कैप्सूल को पेट में रखकर तस्करी के मामलों में इजाफा हुआ है. दुबई से सोना लेकर आ रहे तस्करों का अगर अपहरण नहीं होता तो वे अपने मंसूबे में तो कामयाब हो ही गए थे. इससे कस्टम एवं अन्य जांच एजेंसियों पर सवालिया निशान भी लग गए हैं. 

सोना तस्करी की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी बताते हैं, “तस्कर यह भी जानकारी रखते हैं कि कब किस एयरपोर्ट पर कौन अधिकारी ड्यूटी पर है, जिससे उन्हें पकड़ने से बचने में मदद मिलती है. यही कारण है कि हर बार नए चेहरे पकड़े जाते हैं, जबकि सरगना बच निकलते हैं. कैरियर दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ जैसे एयरपोर्ट पर उतरकर सोना सौंप देते हैं और फिर वापस खाड़ी देशों की उड़ान पकड़ लेते हैं.”  

अधिकारियों के मुताबिक पहले सोने की तस्करी के लिए तस्कर इंटरनेशनल फ्लाइट से उतरने के बाद डोमेस्टिक ( घरेलू) फ्लाइट पकड़ते थे. डोमेस्ट‍िक फ्लाइट में पहले से उनके साथी यात्रा कर रहे होते थे. जिन्हें वे सोना देकर आगे चले जाते थे. चूंकि घरेलू उड़ान में यात्र‍ियों यात्रियों की अधिक चेकिंग नहीं होती थी. इससे सोना तस्कर आसानी से निकल जाते थे, लेकिन बाद में उनकी यह चाल कस्टम विभाग की नजर में आ गई. इसके बाद तस्करों ने सोना पेट में लाने का तरीका ढूंढा. 

कुछ तस्करो ने नेपाल आने का भी तरीका अपनाया है. पेट में सोना रखकर तस्करी के मामले बढ़ने के बाद अब कस्टम विभाग भी उन अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने पर मंथन कर रहा है जिससे पेट में भी किसी भी तरह की संदेहास्पद वस्तु के मौजूद होने पर उसका आसानी से पता लगाया जा सके. वहीं पुलिस भी सोना तस्करों के सरगना को खोजने की हर संभव कोशि‍श में लगी है लेकिन नतीजा अभी भी सिफर ही है.

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