परीक्षाओं को और बेहतर बनाने के लिए UPPSC करेगा बड़े बदलाव
फर्जी अभ्यर्थियों पर शिकंजा, इलेक्ट्रॉनिक नकल पर रोक और निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए UPPSC नई तकनीक अपनाने जा रहा है

जंतर-मंतर पर हुए Gen Z के प्रदर्शन के बाद देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज हुई है. इसका असर उत्तर प्रदेश की भर्ती संस्थाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने अपनी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कई अहम बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है. आयोग की कोशिश अब सिर्फ नकल रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी की पहचान से लेकर आवेदन, परीक्षा, उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन और अंतिम मेरिट तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने की है.
आयोग की प्रस्तावित व्यवस्थाओं में आधार आधारित प्रमाणीकरण, हर परीक्षा कक्ष में माइक्रो सिग्नल जैमर, डिजिटल मूल्यांकन, प्रश्नवार कॉपी जांचने की व्यवस्था और आवेदन पत्रों की AI आधारित स्क्रूटनी प्रमुख हैं.
इसके अलावा सीधी भर्ती के लिए नई नियमावली लागू कर चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों का निश्चित वेटेज तय किया गया है. यानी UPPSC अब भर्ती प्रक्रिया के हर उस हिस्से को बदलने की कोशिश कर रहा है, जहां फर्जीवाड़े, नकल, मूल्यांकन में असमानता या मानवीय दखल की गुंजाइश रह जाती है.
आधार से होगा प्रमाणीकरण
UPPSC फिलहाल अभ्यर्थियों की पहचान के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन यानी OTR प्रणाली का इस्तेमाल करता है. परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक सत्यापन, आइरिस स्कैनिंग और प्रवेश पत्र पर दर्ज विवरण का मिलान किया जाता है. आयोग अब पहचान की इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत करने जा रहा है.
इसके लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद अभ्यर्थी की पहचान को आधार डेटाबेस के माध्यम से सत्यापित किया जा सकेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने यानी डमी कैंडिडेट की संभावना काफी कम हो जाएगी.
इससे प्रवेश पत्र में छेड़छाड़ कर परीक्षा में शामिल होने या व्यक्तिगत विवरण में मामूली बदलाव कर एक से अधिक आवेदन करने जैसी गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस अभ्यर्थी ने आवेदन किया है, परीक्षा केंद्र पर भी वही व्यक्ति मौजूद हो और उसकी पहचान को कई स्तरों पर सत्यापित किया जा सके.
OTR, बायोमीट्रिक और आइरिस के बाद आधार प्रमाणीकरण जुड़ने से अभ्यर्थी की पहचान की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी. हालांकि आधार आधारित प्रमाणीकरण को लागू करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी तैयारियां पूरी करनी होंगी.
आयोग की कोशिश है कि भर्ती प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि वह परीक्षा की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण हिस्सा बने.
नकल के इलेक्ट्रॉनिक रास्ते होंगे बंद
पहचान के साथ ही UPPSC परीक्षा कक्ष की इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा को भी मजबूत करने जा रहा है. आयोग की योजना प्रत्येक परीक्षा कक्ष में छोटे यानी माइक्रो सिग्नल जैमर लगाने की है. आयोग के सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी के अनुसार इन जैमर के जरिए ब्लूटूथ, वायरलेस ईयरपीस, माइक्रो कम्युनिकेशन डिवाइस और रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित दूसरे उपकरणों के सिग्नल को निष्क्रिय किया जा सकेगा.
इस व्यवस्था का मकसद नकल के उन तरीकों पर रोक लगाना है, जिनमें पारंपरिक तलाशी या निगरानी से बचकर छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. कान के भीतर लगाए जाने वाले छोटे ईयरपीस या दूसरे कम्युनिकेशन डिवाइस के जरिए बाहर बैठे व्यक्ति से संपर्क कर नकल करने की कोशिश अब मुश्किल होगी.
UPPSC की चुनौती इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक के इस्तेमाल के साथ नकल के तरीके भी बदल रहे हैं. मोबाइल फोन या बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पकड़ना अपेक्षाकृत आसान है लेकिन छोटे वायरलेस उपकरणों के जरिए होने वाली नकल को रोकना ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में परीक्षा कक्ष के स्तर पर ही सिग्नल को निष्क्रिय करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
यह बदलाव परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ निगरानी आधारित रखने के बजाय तकनीकी रूप से सक्रिय बनाने की कोशिश है. अभ्यर्थी की तलाशी, बायोमीट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ माइक्रो जैमर जुड़ने से आयोग कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा तैयार करना चाहता है.
प्रश्नवार होगा डिजिटल मूल्यांकन
UPPSC मुख्य परीक्षा की मूल्यांकन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. अभी सामान्य तौर पर एक परीक्षक को पूरी उत्तरपुस्तिका जांचने की जिम्मेदारी होती है. प्रस्तावित नई व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा. उत्तरपुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाएगा और प्रश्नवार जांच की व्यवस्था लागू की जाएगी.
इसके तहत उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर आयोग की डिजिटल प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा. इसके बाद अलग-अलग प्रश्नों के उत्तर संबंधित विषय के विशेषज्ञों के पास भेजे जाएंगे. मसलन, अगर प्रश्न संख्या-1 इतिहास से जुड़ा है तो इतिहास के विशेषज्ञ अलग-अलग उत्तरपुस्तिकाओं में केवल प्रश्न संख्या-1 के उत्तर जांचेंगे. इसी तरह दूसरे विषयों से जुड़े प्रश्नों का मूल्यांकन संबंधित विशेषज्ञ करेंगे.
आयोग का मानना है कि हर परीक्षक की विषयगत विशेषज्ञता अलग होती है. किसी परीक्षक की किसी खास विषय में मजबूत पकड़ हो सकती है, लेकिन पूरी उत्तरपुस्तिका के सभी प्रश्नों में समान स्तर की विशेषज्ञता होना जरूरी नहीं है. प्रश्नवार मूल्यांकन से इस समस्या को दूर करने की कोशिश होगी.
नई व्यवस्था में परीक्षक को संबंधित प्रश्न का मॉडल उत्तर भी उपलब्ध कराया जाएगा. प्रत्येक प्रश्न के अंक डिजिटल माध्यम से सीधे सिस्टम में दर्ज होंगे. इससे मूल्यांकन के बाद अंकों को जोड़ने या मैन्युअल रूप से दर्ज करने की प्रक्रिया भी कम होगी और परिणाम तैयार करने में लगने वाला समय घट सकता है.
हालांकि आयोग इसे सीधे सभी परीक्षाओं में लागू करने के बजाय पहले किसी छोटी परीक्षा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आजमाने की तैयारी कर रहा है. अगर प्रयोग सफल रहता है तो इसे मुख्य परीक्षाओं की मूल्यांकन व्यवस्था में व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है.
आवेदन से मेरिट तक नियम भी बदले
UPPSC सिर्फ परीक्षा केंद्र और कॉपी जांचने की प्रक्रिया नहीं बदल रहा, बल्कि भर्ती के नियमों में भी एकरूपता लाने की कोशिश कर रहा है. आयोग ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती नियमावली-2025 लागू कर दी है. इसके तहत सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों का निर्धारित वेटेज जोड़कर अंतिम मेरिट तैयार की जाएगी.
नई व्यवस्था के तहत लिखित परीक्षा 450 अंकों की और इंटरव्यू 50 अंकों का होगा. लेकिन अंतिम मेरिट इन दोनों के साधारण योग से नहीं बनेगी. लिखित परीक्षा में मिले अंकों का 75 प्रतिशत और इंटरव्यू के अंकों का 25 प्रतिशत वेटेज लेकर अंतिम मेरिट तैयार की जाएगी.
इस बदलाव का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में एकरूपता लाना है. अलग-अलग विभागों में स्क्रीनिंग और भर्ती के नियम अलग होने के कारण कई बार चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं. नई नियमावली के बाद आयोग समान मानकों के आधार पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
लिखित परीक्षा को 75 प्रतिशत वेटेज देने से चयन में अभ्यर्थी के लिखित प्रदर्शन को प्रमुख आधार बनाया गया है, जबकि इंटरव्यू को 25 प्रतिशत वेटेज देकर उसकी भूमिका भी बरकरार रखी गई है. आयोग का मानना है कि निर्धारित वेटेज के आधार पर मेरिट तैयार होने से मूल्यांकन में पक्षपात की गुंजाइश कम होगी और चयन प्रक्रिया ज्यादा वैज्ञानिक बन सकेगी.
इसके साथ ही आयोग आवेदन पत्रों की डिजिटल स्क्रूटनी के लिए भी तकनीकी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रहा है. इसमें AI के इस्तेमाल की योजना है. आयोग पहले भी ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर चुका है, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली.
अब दोबारा इस दिशा में काम शुरू किया गया है और इसके लिए एजेंसी की तलाश की जा रही है. दरअसल, UPPSC जिस बदलाव की तरफ बढ़ रहा है, उसका दायरा परीक्षा केंद्र से कहीं आगे है. आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित करने से लेकर उसके परीक्षा कक्ष में प्रवेश, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सुरक्षा, उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन और अंतिम मेरिट तैयार करने तक हर चरण में तकनीक और तय नियमों की भूमिका बढ़ाई जा रही है.
जंतर-मंतर के प्रदर्शनों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसे का सवाल फिर सामने ला दिया है. ऐसे माहौल में UPPSC के ये बदलाव महज तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का विश्वास बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखे जा सकते हैं. हालांकि इन व्यवस्थाओं की असली परीक्षा इनके जमीन पर लागू होने के बाद होगी.
आधार प्रमाणीकरण, माइक्रो जैमर, डिजिटल मूल्यांकन और AI आधारित स्क्रूटनी अगर अपेक्षित तरीके से लागू होते हैं तो UPPSC की भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, मानकीकृत और तकनीक आधारित हो सकती है.