UPPCS परीक्षा के लिए इस बार रिकॉर्ड आवेदन किस ट्रेंड को दिखा रहे?
UPPSC की तरफ से आयोजित होने वाली PCS-2026 के करीब 500 पदों के लिए रिकार्ड 8.90 लाख आवेदन आए हैं. 42 प्रतिशत वृद्धि के साथ पिछले एक दशक में एक साल के भीतर आवेदनों की यह सबसे बड़ी छलांग है

पिछले साल UPPCS परीक्षा के लिए 6,26,387 आवेदन आए थे
उत्तर प्रदेश में पढ़े-लिखे युवाओं के बीच सरकारी अधिकारी बनने की चाहत एक बार फिर नए स्तर पर पहुंचती दिख रही है. इसका सबसे बड़ा संकेत यूपी राज्य लोक सेवा आयोग (UPPSC) की उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल सिविल सर्विसेज यानी PCS-2026 परीक्षा के लिए आए रिकॉर्ड आवेदन हैं.
करीब 500 पदों के लिए लगभग 8.90 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया है. यानी औसतन एक पद के लिए करीब 1,780 दावेदार मैदान में हैं. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव गिरीश कुमार त्यागी के मुताबिक, PCS-2025 के 6,26,387 आवेदनों के मुकाबले इस बार करीब 2.64 लाख यानी 42.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उपलब्ध आंकड़ों में पिछले एक दशक में एक साल के भीतर आवेदनों की यह सबसे बड़ी छलांग है.
दिलचस्प यह है कि आवेदनों का यह उछाल किसी बड़े बैकलॉग के कारण नहीं आया है. आयोग PCS की भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से आयोजित कर रहा है. PCS-2026 की प्रारंभिक परीक्षा 6 दिसंबर को प्रस्तावित है और विभिन्न विभागों से अतिरिक्त मांग आने पर रिक्तियों की संख्या में बदलाव भी हो सकता है.
इसके बावजूद लाखों युवाओं का एक साथ PCS की ओर बढ़ना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी अधिकारी की नौकरी का आकर्षण इतना गहरा क्यों है?
पिछले वर्षों का आंकड़ा इस बदलाव को और स्पष्ट करता है. PCS के लिए 2018 में 6,35,844 आवेदन आए थे. 2019 में यह संख्या 5,44,664, 2020 में 5,95,696, 2021 में 6,91,173, 2022 में 6,02,974, 2023 में 5,65,459, 2024 में 5,76,154 और 2025 में 6,26,387 रही.
2026 में यही संख्या करीब 8.90 लाख पहुंच गई. यानी यह केवल एक परीक्षा की लोकप्रियता का मामला नहीं बल्कि सरकारी प्रशासनिक सेवा को लेकर युवाओं की लगातार बनी हुई आकांक्षा का संकेत है.
नौकरी की सुरक्षा के साथ अधिकार और पहचान
PCS जैसी नौकरी का आकर्षण केवल नियमित वेतन और नौकरी की सुरक्षा तक सीमित नहीं है. सरकारी अधिकारी बनने के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी, निर्णय लेने की भूमिका, सरकारी तंत्र में अधिकार और समाज में एक अलग पहचान जुड़ती है. यही वह पहलू है जो इसे निजी क्षेत्र की कई नौकरियों से अलग सामाजिक अर्थ देता है.
परिवारों के लिए भी यह उपलब्धि अक्सर केवल बेटे या बेटी की नौकरी नहीं रहती बल्कि पूरे परिवार की सामाजिक स्थिति में बदलाव के रूप में देखी जाती है.
जीबी पंत सोशल साइंस इंस्टीट्यूट की सोशल साइंटिस्ट और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना सिंह के मुताबिक, सरकारी अधिकारी की नौकरी रोजगार की सुरक्षा और नियमित आय के साथ सरकारी अधिकार से भी जुड़ी होती है.
उनके मुताबिक, यह पद परिवार को समाज और कम्युनिटी में देखने का नजरिया तक बदल सकता है. हिंदी भाषी क्षेत्रों में सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण के पीछे स्थिरता, सुरक्षा और सामाजिक रुतबा महत्वपूर्ण कारण हैं.
डॉ. सिंह के मुताबिक, एक ही प्रतियोगी परीक्षा के जरिए अपेक्षाकृत तेज सामाजिक तरक्की की संभावना भी युवाओं को सरकारी सेवाओं की ओर खींचती है. यानी PCS की तैयारी करने वाला युवा सिर्फ यह नहीं सोच रहा होता कि उसे नौकरी मिलेगी या नहीं. उसके सामने यह संभावना भी होती है कि चयन के बाद उसकी सामाजिक पहचान, परिवार की प्रतिष्ठा और जीवन की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है.
यही कारण है कि PCS की तैयारी कई परिवारों में वर्षों की योजना बन जाती है. छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर बड़े कोचिंग केंद्रों तक पहुंचने वाले युवाओं के पीछे अक्सर सिर्फ उम्मीदवार नहीं पूरा परिवार खड़ा होता है. एक कमरे में बैठकर कई साल तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला युवा अपने साथ परिवार की उम्मीदों को भी लेकर चलता है.
एक परीक्षा, परिवार की कई उम्मीदें
प्रयागराज स्थित ब्यूरो ऑफ साइकोलॉजी, UP के साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजकुमार राय के मुताबिक, युवाओं की करियर आकांक्षाएं परिवार और समाज की उम्मीदों से गहराई से जुड़ी होती हैं. वे कहते हैं, “कई युवाओं के लिए सरकारी पद सिर्फ रोजगार नहीं होता. वह स्थिरता, पहचान और कुछ हासिल करने का एहसास भी देता है. इससे यह भी प्रभावित होता है कि युवा खुद को किस तरह देखते हैं और उन्हें लगता है कि दूसरे उनके परिवार को किस नजर से देखेंगे.”
यही सामाजिक अपेक्षा प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को भी बढ़ा सकती है. डॉ. राय के मुताबिक, “जब कोई परीक्षा परिवार की उम्मीदों और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ जाती है तो उसकी तैयारी का भावनात्मक महत्व परीक्षा से कहीं अधिक हो जाता है. ऐसे में युवाओं के लिए जरूरी है कि वे अपने करियर लक्ष्य वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय करें और उचित मार्गदर्शन लें ताकि प्रतियोगिता अत्यधिक तनाव में न बदल जाए.”
प्रयागराज का ब्यूरो ऑफ साइकोलॉजी उत्तर प्रदेश का सरकारी संस्थान है जो साइकोलॉजिकल टेस्टिंग, एजुकेशनल गाइडेंस और काउंसलिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है. उसके विशेषज्ञ का यह आकलन इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकारी नौकरी का आकर्षण केवल आर्थिक नहीं है. इसके पीछे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारक भी काम करते हैं.
यही वजह है कि सरकारी अधिकारी बनना कुछ परिवारों में पीढ़ीगत सामाजिक उन्नति के रास्ते के तौर पर भी देखा जाता है. जिन परिवारों में पहले सरकारी प्रशासनिक सेवा तक पहुंच नहीं रही वहां बेटे या बेटी का PCS में चयन परिवार के सामाजिक आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला अनुभव बन सकता है. इसके उलट, पहले से प्रशासनिक या सरकारी सेवा से जुड़े परिवारों में भी PCS को प्रतिष्ठित करियर विकल्प माना जाता है.
आंकड़े बता रहे क्रेज की कहानी
PCS आवेदन का दशक भर का ट्रेंड बताता है कि यह आकर्षण किसी एक साल का उछाल नहीं है. 2018 में 6.35 लाख से अधिक आवेदन आने के बाद 2019 और 2020 में यह संख्या पांच से छह लाख के बीच रही. 2021 में यह बढ़कर करीब 6.91 लाख पहुंची.
इसके बाद 2022 में करीब 6.03 लाख, 2023 में 5.65 लाख, 2024 में 5.76 लाख और 2025 में 6.26 लाख आवेदन आए. 2026 में पहली बार यह संख्या करीब 8.90 लाख तक पहुंच गई.
इस बढ़ोतरी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि PCS की भर्ती नियमित रूप से होती रही है. इसलिए इसे केवल जमा हुई रिक्तियों की वजह से पैदा हुई उम्मीदवारों की भीड़ नहीं कहा जा सकता. बल्कि उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि सरकारी प्रशासनिक सेवा के प्रति आकर्षण अलग-अलग वर्षों में उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यापक बना रहा है.
PCS-2025 की मौजूदा भर्ती प्रक्रिया भी इसका दूसरा उदाहरण है. UPPSC ने 17 सितंबर को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किया, जिसमें 2,297 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए सफल घोषित किया गया.
कुल 814 रिक्तियों वाली भर्ती में 812 पदों पर मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए चयन होना है, जबकि दो पदों पर चयन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर होगा. मुख्य परीक्षा में 10,284 उम्मीदवार शामिल हुए थे.
PCS-2025 की शुरुआत 6,26,387 आवेदनों से हुई थी. प्रारंभिक परीक्षा के लिए 2,65,270 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे और 11,727 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए थे. मूल विज्ञापन में 200 पद थे लेकिन बाद में खाली पदों की संख्या बढ़ाई गई.
PCS-2025 का इंटरव्यू चरण अब शुरू होने जा रहा है. उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक 2,297 उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू 28 सितंबर से 24 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित किए जाएंगे.
सरकारी पद की चमक कायम
PCS के लिए आवेदनों का 8.90 लाख तक पहुंचना उस दौर में खास मायने रखता है जब युवाओं के सामने निजी क्षेत्र, स्टार्टअप, तकनीकी नौकरियों और दूसरे पेशेवर विकल्प भी मौजूद हैं. इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा ऐसी नौकरी की तैयारी में समय लगा रहे हैं, जिसका चयन अनुपात बेहद कम है.
यह बताता है कि नौकरी की गुणवत्ता को लेकर युवाओं की परिभाषा में वेतन के साथ स्थिरता, सामाजिक पहचान और अधिकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है.
सरकारी अधिकारी की नौकरी में नियमित आय और सेवा सुरक्षा के अलावा निर्णय लेने की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रभाव जुड़ा होता है. हिंदी भाषी समाज में सरकारी पद की यह सामाजिक प्रतिष्ठा परिवार की अपेक्षाओं को भी प्रभावित करती है. इसलिए एक उम्मीदवार की सफलता को अक्सर व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बढ़कर परिवार की उपलब्धि के रूप में देखा जाता है.
हालांकि 8.90 लाख आवेदन यह नहीं बताते कि इतने ही युवा PCS को अपना अंतिम करियर विकल्प मानते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या ऐसे उम्मीदवारों की भी होती है जो एक साथ कई सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. फिर भी PCS के आवेदन आंकड़ों में आया 42.1 फीसदी का उछाल यह जरूर दिखाता है कि प्रशासनिक पदों के प्रति आकांक्षा कमजोर नहीं हुई है.