UPCOS से बदलेगी आउटसोर्स नौकरी करने वालों की हालत?

20-40 लाख रुपए तक बीमा, समयबद्ध वेतन और सामाजिक सुरक्षा के वादे के साथ UPCOS से उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स नौकरियों को सुरक्षित और आकर्षक रोजगार विकल्प बनाने की कोशिश की जा रही है

यूपी में करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारी हैं (सांकेतिक फोटो)

उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार ने जिस उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS की शुरुआत की है, उसका सबसे बड़ा दावा यह है कि अब आउटसोर्स कर्मचारी और निजी एजेंसी के बीच सरकार एक मजबूत रेगुलेटरी सिस्टम या नियामक व्यवस्था के रूप में मौजूद होगी. 

2 सितंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPCOS के पोर्टल और वेबसाइट की शुरुआत की. सरकार के मुताबिक इसका सीधा लाभ 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा और उनके परिवारों को जोड़ें तो करीब 17 से 20 लाख लोग इसके दायरे में आएंगे. 

UPCOS को ऐसे समय में शुरू किया गया है जब सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग रोजगार का बड़ा माध्यम बन चुकी है. लेकिन इन नौकरियों की सबसे बड़ी समस्या हमेशा इनकी अस्थिरता, कम वेतन, वेतन में देरी, EPF-ESIC की स्थिति और निजी एजेंसियों पर निर्भरता रही है. 

ऐसे में सरकार का नया मॉडल युवाओं के लिए कितना आकर्षक होगा, इसका जवाब सिर्फ बीमा और सुविधाओं की लंबी सूची में नहीं बल्कि इस बात में छिपा है कि क्या यह नौकरी को कम असुरक्षित, बेहतर भुगतान वाली और पारदर्शी बना पाएगा.

करीब 20 लाख लोगों पर असर

UPCOS का पैमाना छोटा नहीं है. सरकार के अनुसार फिलहाल 3.5 लाख से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके लाभार्थी होंगे. परिवार के सदस्यों को मिलाकर इसका असर 17 से 20 लाख लोगों तक होगा. 

लखनऊ में बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुशील पांडेय कहते हैं, “इस आंकड़े का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह सिर्फ कर्मचारियों की संख्या नहीं है. एक आउटसोर्स कर्मचारी के पीछे औसतन कई आश्रित सदस्य होते हैं. यानी सरकार ने जिस सामाजिक सुरक्षा मॉडल की घोषणा की है, उसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव सीधे कर्मचारी से आगे उसके परिवार तक जाता है.” 

UPCOS से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत किया गया है (सांकेतिक फोटो)

नई व्यवस्था में सरकार ने निजी एजेंसी और कर्मचारी के बीच की पुरानी त्रिपक्षीय व्यवस्था को बदलने की कोशिश की है. अब विभाग अपनी मानव संसाधन जरूरत UPCOS को बताएगा. निगम जरूरत की समीक्षा कर एजेंसी तय करेगा और उसके बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. 

आधिकारिक UPCOS प्लेटफॉर्म के मुताबिक विभाग अपनी जरूरत, पदों की संख्या और पात्रता तय करेगा. इसके बाद संबंधित एजेंसी सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवार तलाशेगी और मांग के मुकाबले तीन गुना यानी 3X उम्मीदवारों का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा. 

फिर स्क्रीनिंग कमेटी योग्यता, अनुभव और पात्रता के आधार पर चयन करेगी. युवाओं के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है. क्योंकि आउटसोर्सिंग की पुरानी व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि भर्ती कौन करता है और किस आधार पर करता है. 

अगर नई व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड, निर्धारित मानदंड और स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए चयन होता है तो सिफारिश और मनमानी की गुंजाइश कम हो सकती है.

लेकिन यहां पहली चुनौती भी है. 3.5 लाख मौजूदा कर्मचारियों को नई डिजिटल व्यवस्था में लाना और भविष्य की भर्तियों को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखना दो अलग-अलग काम हैं. UPCOS की असली विश्वसनीयता भविष्य की भर्तियों में ही तय होगी.

सरकारी नौकरी से अभी भी दूरी

युवाओं को आकर्षित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वेतन की होगी. UPCOS की आधिकारिक वेबसाइट पर आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए चार वेतन स्तरों का उल्लेख है. इसमें सपोर्ट स्टाफ के लिए 18,000 से 20,000 रुपए और विशेषज्ञ पदों के लिए न्यूनतम 40,000 रुपए तक पारिश्रमिक का प्रावधान बताया गया है. 

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आउटसोर्स नौकरी को लंबे समय तक कम पारिश्रमिक और सीमित सामाजिक सुरक्षा वाली नौकरी के रूप में देखा गया है. अगर 18 से 20 हजार रुपए की शुरुआती श्रेणी वास्तव में लागू होती है और विशेषज्ञ पदों पर 40 हजार रुपए तक भुगतान सुनिश्चित होता है तो सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स युवाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है. 

UPCOS के तहत वेतन व्यवस्था सुधारने का दावा किया गया है (सांकेतिक तस्वीर)

सरकार ने वेतन भुगतान की समयसीमा भी तय की है. UPCOS के मुताबिक कर्मचारी का वेतन हर महीने की 5 तारीख तक सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचाने की व्यवस्था है. यानी सरकार दो मोर्चों पर बदलाव का दावा कर रही है. पहला, वेतन की राशि को व्यवस्थित करना और दूसरा, भुगतान में बिचौलियों की भूमिका कम करना. 

जानकार मानते हैं कि यहां भी एक बुनियादी सवाल है. 18-20 हजार रुपए का वेतन एक युवा के लिए तभी आकर्षक होगा जब नौकरी की निरंतरता, EPF, ESIC और दूसरी सुविधाएं नियमित रूप से मिलें.  

UPCOS इसलिए सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र से जुड़ी अपेक्षाकृत सुरक्षित आउटसोर्स नौकरी का विकल्प बन सकता है. स्थाई सरकारी कर्मचारी को मिलने वाली नौकरी की सुरक्षा, पदोन्नति और सेवा लाभ अभी भी इसकी तुलना में अलग हैं.

20 से 40 लाख का बीमा

UPCOS का सबसे बड़ा आकर्षण वेतन से ज्यादा सामाजिक सुरक्षा का पैकेज हो सकता है. सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए श्रेणी के अनुसार 20 से 40 लाख रुपए तक दुर्घटना बीमा का प्रावधान बताया है. इसके अलावा सरकार की ओर से घोषित पैकेज में EPF और ESIC की नियमित व्यवस्था शामिल है. 

आधिकारिक UPCOS पोर्टल भी कर्मचारी को अपने वेतन, EPF और ESIC रिकॉर्ड एक ही जगह देखने की सुविधा की बात करता है. यह सुविधा इसलिए अहम है क्योंकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि उनके वेतन से EPF या ESIC के नाम पर राशि काटी जा रही है. 

उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि राशि वास्तव में संबंधित खाते में जमा हुई या नहीं. UPCOS का डिजिटल मॉडल इसी निगरानी को संभव बनाने का दावा करता है. सरकार ने दुर्घटना के अलावा परिवार से जुड़े कई दूसरे लाभ भी बताए हैं. 

उपलब्ध विवरण के अनुसार आग लगने की स्थिति में 10 लाख रुपए तक, आपातकालीन दवाओं के लिए 5 लाख रुपए तक और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान है. बच्चों की शिक्षा और बेटियों की शादी के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है. कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को तत्काल 50 हजार रुपए देने का प्रावधान बताया गया है. 

UPCOS कर्मचारियों को प्राइवेट भर्ती एजेंसियों की मनमानी से बचाने का भी वादा करता है (सांकेतिक फोटो)

यानी सरकार UPCOS को सिर्फ कर्मचारी का वेतन दिलाने वाली संस्था नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा के एक पैकेज के रूप में पेश कर रही है. युवाओं के नजरिए से यह बड़ा बदलाव हो सकता है. क्योंकि 20-25 हजार रुपए के आसपास की नौकरी और 20-40 लाख रुपए के दुर्घटना बीमा के बीच का अंतर किसी युवा के परिवार के लिए बहुत बड़ा है. खासकर ऐसे परिवारों में जहां कमाने वाला सदस्य अकेला हो. 

लेकिन इस पैकेज की विश्वसनीयता का फैसला क्लेम के भुगतान की गति से होगा. दुर्घटना होने पर परिवार को 40 लाख रुपए का दावा मिलता है या कागजी प्रक्रिया में महीनों लगते हैं, यही तय करेगा कि बीमा वास्तव में सुरक्षा कवच है या सिर्फ घोषणा.
UPCOS की असली परीक्षा

UPCOS का सबसे बड़ा वादा है कि आउटसोर्स कर्मचारी को निजी एजेंसी की मनमानी से बचाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसी कंपनी को कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने की अनुमति नहीं होगी. सेवा समाप्त करने से पहले सरकार को जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना होगा. 

आधिकारिक UPCOS प्लेटफॉर्म में वेंडर मैनेजमेंट, स्मार्ट डिमांड मैनेजमेंट, सेवायोजन इंटीग्रेशन, अटेंडेंस एवं लीव ऑटोमेशन, वेतन एवं वैधानिक अनुपालन, पेमेंट ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसे मॉड्यूल बनाए गए हैं. 

युवाओं के लिए यह व्यवस्था आकर्षक इसलिए हो सकती है क्योंकि आउटसोर्स नौकरी की सबसे बड़ी कमजोरी रही है कि कर्मचारी को अपनी सेवा संबंधी जानकारी के लिए एजेंसी या विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अब अगर नियुक्ति से लेकर उपस्थिति, वेतन और सामाजिक सुरक्षा तक पूरा रिकॉर्ड डिजिटल हो जाता है तो जवाबदेही तय करना आसान होगा. 

UPCOS में शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति ऑनलाइन देखने की व्यवस्था भी है. निगम ने सहायता के लिए 10X5 हेल्प सपोर्ट और शिकायत निवारण प्रणाली का प्रावधान किया है. फिर भी युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल बना रहेगा: क्या यह नौकरी भविष्य बनाएगी? उत्तर अभी पूरी तरह साफ नहीं है. 

आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी विभाग में काम करेगा लेकिन नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होगा. उसकी नियुक्ति का आधार सरकारी पद नहीं, आउटसोर्स मानव संसाधन की आवश्यकता होगी. इसलिए UPCOS सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शिता के मामले में पुरानी व्यवस्था से बेहतर हो सकता है लेकिन यह स्थाई सरकारी रोजगार का विकल्प नहीं है.

यही कारण है कि UPCOS की सफलता को तीन आंकड़ों से मापा जाना चाहिए. पहला, 3.5 लाख कर्मचारियों में कितनों को समय पर वेतन मिला. दूसरा, कितने कर्मचारियों का EPF-ESIC नियमित रूप से जमा हुआ. और तीसरा, दुर्घटना या अन्य सामाजिक सुरक्षा दावों में परिवारों को कितनी जल्दी भुगतान मिला. 

अगर इन तीन मोर्चों पर सरकार अपने दावे को जमीन पर उतार देती है तो UPCOS लाखों युवाओं के लिए आउटसोर्स नौकरी की पुरानी छवि बदल सकता है. 

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