अतीक गैंग के शूटर और उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी तक कैसे पहुंची पुलिस?
पुलिस के मुताबिक अतीक गैंग का करीबी मोहम्मद अरमान उमेश पाल हत्याकांड के वक्त मौके पर मौजूद था. उसकी लंबे वक्त से तलाश की जा रही थी और फिर पता चला कि वह गया की जेल में बंद है

कोर्ट में पेशी के दौरान मोहम्मद अरमान
तीन साल से ज्यादा समय से गया सेंट्रल जेल में बंद मोहम्मद अरमान उर्फ अरमान बिहारी अब प्रयागराज पुलिस की हिरासत में है. उमेश पाल हत्याकांड में वांटेड अरमान को धूमनगंज पुलिस की टीम 4 अक्टूबर को गया से प्रयागराज लेकर पहुंची. 5 अक्टूबर को उसे एससी/एसटी सेशंस कोर्ट में पेश किया गया जहां उसकी ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली गई.
दिलचस्प यह है कि प्रयागराज पुलिस जिस अरमान की तलाश कर रही थी, वह किसी अज्ञात ठिकाने पर नहीं छिपा था. वह गया में एक दूसरे मामले में गिरफ्तार होकर जेल में बंद था. पुलिस को इसकी जानकारी मिलने के बाद 30 सितंबर को टीम गया जेल पहुंची. अरमान की ताजा तस्वीर और अंगूठे के निशान लिए गए.
इसके बाद 1 अक्टूबर को ट्रांजिट रिमांड के लिए अदालत में अर्जी दी गई. अब अरमान से पूछताछ उमेश पाल हत्याकांड की जांच में इसलिए अहम है, क्योंकि पुलिस के मुताबिक वह वारदात के दिन गुड्डू मुस्लिम के साथ था. इससे पहले वह साबिर और अतीक-अशरफ के करीबी लोगों के संपर्क में भी रह चुका था. ऐसे में पुलिस के लिए अरमान उस नेटवर्क की कई कड़ियों को जोड़ने वाला व्यक्ति है, जिसका एक सिरा अतीक-अशरफ तक जाता है और दूसरा आज भी फरार गुड्डू मुस्लिम और साबिर तक.
अतीक के करीबी घेरे तक कैसे पहुंचा
बिहार के गया का रहने वाला अरमान 2012 में प्रयागराज आया था. कैंटोनमेंट थाना क्षेत्र में उसने कबाब-पराठे की छोटी-सी दुकान खोली. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसकी पहचान गुड्डू मुस्लिम से हुई. उस समय गुड्डू थोक में चिकन सप्लाई का काम करता था. दोनों की नजदीकी बढ़ी तो अरमान ने दुकान अपने छोटे भाई इमरान को सौंप दी और गुड्डू के साथ रहने लगा.
इसके बाद उसकी पहचान अतीक अहमद के करीबियों से होने लगी. इनमें नफीस बिरयानी भी शामिल था, जिसे अतीक के भाई अशरफ का करीबी माना जाता था. पुलिस के अनुसार, नफीस की सिविल लाइंस स्थित दुकान पर अरमान अक्सर जाता था और वहीं उसकी मुलाकात साबिर से हुई. उस समय अतीक साबरमती और अशरफ बरेली जेल में बंद थे.
पुलिस के मुताबिक, परिवार और करीबी लोगों के साथ अरमान, गुड्डू मुस्लिम और साबिर भी अहमद भाइयों से मिलने जाते थे. इस तरह एक छोटे कारोबारी के रूप में प्रयागराज आया अरमान धीरे-धीरे अतीक परिवार के आसपास सक्रिय लोगों के संपर्क में पहुंच गया. यही उसका पहला महत्वपूर्ण कनेक्शन है.
पुलिस के मुताबिक, अरमान अतीक का कोई सार्वजनिक चेहरा नहीं था, बल्कि उन लोगों के जरिए नेटवर्क में आया, जो अतीक और अशरफ के सीधे संपर्क में थे. इसलिए उससे पूछताछ के जरिए पुलिस जेल में बंद अतीक-अशरफ और बाहर मौजूद उनके करीबियों के बीच संपर्क की प्रकृति को समझने की कोशिश कर सकती है.
उमेश पाल कांड
2023 की शुरुआत में अरमान की अतीक परिवार के साथ मौजूदगी और बढ़ी. 5 जनवरी को शाइस्ता परवीन BSP में शामिल हुईं और प्रयागराज मेयर पद की उम्मीदवार बनीं. पुलिस के मुताबिक, चुनावी गतिविधियों के दौरान गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान उनके साथ रहते थे. इसी दौर में उमेश पाल की हत्या की साजिश का आरोप सामने आया. 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल और उनके दो पुलिस सुरक्षाकर्मियों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई.
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं. पुलिस का आरोप है कि अरमान मोटरसाइकिल चला रहा था और गुड्डू मुस्लिम पीछे बैठा था. दोनों उमेश पाल के घर के बाहर पहुंचे और हमले के बाद फरार हो गए. मामले में अतीक के बेटे असद और शूटर मोहम्मद गुलाम समेत कई लोगों के नाम सामने आए.
13 अप्रैल 2023 को झांसी में पुलिस मुठभेड़ में असद और गुलाम मारे गए. लेकिन गुड्डू मुस्लिम और साबिर अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में अरमान की भूमिका जांच के लिए और अहम हो जाती है. पुलिस का कहना है कि अरमान वारदात के वक्त गुड्डू के साथ था और उससे पहले साबिर के संपर्क में भी था.
उमेश पाल हत्याकांड के बाद अरमान गया पहुंचा. पुलिस का कहना है कि कटारी तालाब के पास उसने 'भोलू अंडा वाले' नाम के व्यक्ति पर गोली चलाई. हत्या के प्रयास के इस मामले में उसने बाद में अदालत में सरेंडर कर दिया और गया सेंट्रल जेल चला गया. तीन साल से ज्यादा समय तक वह वहीं बंद रहा.
प्रयागराज पुलिस को जब पता चला कि उमेश पाल हत्याकांड का वांटेड आरोपी दूसरे मामले में गया जेल में बंद है, तो उसे प्रयागराज लाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
अब अरमान से पूछताछ में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी वारदात से पहले और बाद की गतिविधियां होंगी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि हत्या की तैयारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था, वारदात के बाद किसने उसकी मदद की और गया पहुंचने तक उसका नेटवर्क किस तरह सक्रिय रहा.
अतीक-अशरफ से जुड़े नेटवर्क को लेकर भी अरमान से पूछताछ अहम हो सकती है. पुलिस के मुताबिक, वह साबरमती और बरेली जेल में अतीक और अशरफ से मिलने जाने वाले लोगों के साथ रहा था. जांच एजेंसी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि इन मुलाकातों के दौरान कौन-कौन लोग संपर्क में थे और बाहर मौजूद लोगों के साथ उनका संवाद कैसे होता था.
इस मामले में शाइस्ता परवीन, अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और अतीक की बहन आयशा नूरी भी पुलिस की वांटेड सूची में हैं. लिहाजा, अतीक परिवार के करीबी लोगों से अरमान के संबंध भी पूछताछ का हिस्सा बन सकते हैं. अरमान के खिलाफ लगे आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और उसकी भूमिका का अंतिम निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर होगा.
लेकिन जांच के लिहाज से उसकी अहमियत साफ है. उमेश पाल हत्याकांड के कई प्रमुख किरदार अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि गुड्डू मुस्लिम और साबिर जैसे आरोपी फरार हैं. ऐसे में अरमान ऐसा व्यक्ति है, जो कथित तौर पर वारदात के दौरान गुड्डू के साथ था और उससे पहले अतीक-अशरफ के करीबी घेरे में सक्रिय रहा. यही वजह है कि गया जेल से प्रयागराज लाया गया अरमान यूपी पुलिस के लिए सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि हत्याकांड की कई बिखरी कड़ियों को जोड़ने का संभावित जरिया है.