TMC किस आधार पर ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग कर रही?
वोटर लिस्ट से नाम हटाने, SIR की प्रक्रिया और चुनावी डेटा के इस्तेमाल को लेकर TMC ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी की मांग की है

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फाइल फोटो)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हमला और तेज कर दिया है. ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर और चुनाव कराने के तरीके को लेकर ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है.
यह मांग ऐसे समय की गई है, जब देशभर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की चर्चा चल रही है. 24 सितंबर को कृष्णानगर से TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने पुलिस में शिकायत देकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की.
उन्होंने SIR की प्रक्रिया में आपराधिक गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाताओं के नाम हटाने, फॉर्म 6 में बदलाव, अपील और चुनावी डेटा पर एक जगह से कंट्रोल रखने जैसे मामलों में दूसरे चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना काम किया.
महुआ मोइत्रा ने जन प्रतिनिधित्व कानून, वोटर रजिस्ट्रेशन नियम और भारतीय न्याय संहिता के उल्लंघन का सहित सरकारी पैसे और पद के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया. उन्होंने एफआईआर दर्ज करने, जांच करने और सबूत सुरक्षित रखने की मांग की.
इसके एक दिन पहले अमेरिका में मेडिकल चेकअप कराने के बाद कोलकाता लौटे अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से अपनी पहली बातचीत में ज्ञानेश कुमार को चेतावनी दी और चुनाव आयोग प्रमुख के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की मांग की.
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "ज्ञानेश कुमार देश से भागने न पाएं इसके लिए उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए. जिस तरह उन्होंने BJP के लिए वोटर लिस्ट में हेरफेर किया और (बंगाल) का चुनाव चुराया, उसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए."
इसके कुछ घंटे बाद ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमला और तेज कर दिया. उन्होंने कहा, "मेरी पहली मांग है कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए." उन्होंने यह भी कहा कि TMC ने चुनाव से कई महीने पहले ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख दी थीं.
ममता ने दावा किया कि चुनाव आयोग को लेकर चल रहा मौजूदा विवाद उनकी पार्टी की उन पुरानी आशंकाओं को सही साबित करता है कि मतदाताओं के अधिकारों को व्यवस्थित तरीके से सीमित किया जा रहा है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की मदद करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा, ''ज्ञानेश कुमार के साथ सरकार और चुनाव आयोग में उन सभी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इन कदमों का समर्थन किया, इनमें संबंधित उपचुनाव आयुक्त, आईटी (सूचना प्रोद्योगिकी) अधिकारी, ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) और अन्य अधिकारी शामिल हैं.''
ममता बनर्जी के भाषण का एक बड़ा हिस्सा SIR पर था. उनका दावा है कि बंगाल में शुरुआत में 58 लाख वोटर इससे प्रभावित हुए थे और उन्होंने चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना का बार-बार जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा खन्ना BJP की IT अधिकारी की तरह काम कर रही थीं. ममता बनर्जी ने कहा, "AI सिस्टम के जरिए शुरुआत में 58 लाख लोगों के नाम सील कर दिए गए. इसके बाद 27 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए. हमने करीब 32 लाख आपत्तियां दर्ज कराईं." उन्होंने कहा कि बाद में 7 लाख और नाम हटा दिए गए.
उन्होंने आरोप लगाया, "अगर 27 लाख में 7 लाख जोड़ें तो यह संख्या 34 लाख होती है और जब 34 लाख को 58 लाख में जोड़ते हैं तो अकेले बंगाल में 92 लाख वोटर लिस्ट से बाहर हो जाते हैं."
ममता बनर्जी ने इस विवाद को EVM में हेरफेर के आरोपों से भी जोड़ा. उन्होंने अलीपुर में दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में लगी आग का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "इसके बाद EVM को हाइजैक कर लिया गया." उन्होंने सवाल उठाया कि जिस जगह EVM रखी गई थीं, वहीं पर आग कैसे लगी.
ममता बनर्जी ने अपना हमला और बढ़ाते हुए बंगाल की BJP सरकार और पुलिस-प्रशासन के कुछ हिस्सों पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "हम आजादी पसंद करने वाले लोग हैं, लेकिन आजादी के बाद भी हमें ऐसे जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है जैसे हमारे पास आजादी ही नहीं है." उन्होंने आरोप लगाया कि 14,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया गया और उन पर हमले किए गए.
उन्होंने आरोप लगाया कि चार महीनों में बंगाल में 65 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई दूसरे लोगों ने आत्महत्या की है. उन्होंने कहा, "किसी को तो इन लोगों की जिम्मेदारी लेनी होगी."
ममता बनर्जी ने पुरानी वोटर लिस्ट बहाल करने और उन राज्यों में नए चुनाव कराने की मांग की, जहां उनके आरोप के मुताबिक EVM में हेरफेर के जरिए वोटरों से उनके अधिकार छीन लिए गए. उन्होंने TMC के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अधिकार पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, "हमने विरोध किया इसलिए हमारा चुनाव चिह्न छीन लिया गया. जब हमारी पार्टी के प्रतिनिधि अधिकारियों से मिलने गए तो उन्हें चले जाने के लिए कहा गया. आप (चुनाव आयोग) देश, लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेह हैं, किसी एक पार्टी के राजनीतिक हितों के प्रति नहीं."
ममता बनर्जी ने इस विवाद को बड़े स्तर पर विपक्षी एकजुटता से जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "क्षेत्रीय दलों और इंडिया ब्लॉक की पार्टियों समेत सभी दल इस लड़ाई में एक साथ हैं." उन्होंने याद दिलाया कि TMC ने पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का नोटिस भी दिया था. उन्होंने कहा, "लेकिन अब मामला सिर्फ महाभियोग तक सीमित नहीं है, आपराधिक कार्रवाई जरूरी है."
उन्होंने राजनीतिक दलों, NGOs और उन नागरिकों से भी आगे आने की अपील की जो विरोध करने से हिचक रहे हैं. उन्होंने कहा, "मैं आपके साथ खड़ी रहूंगी. आप मुझ पर हमला कर सकते हैं, मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं या मेरे साथ अत्याचार कर सकते हैं, लेकिन मैं डरी नहीं हूं."
रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने इस टकराव को लोकतांत्रिक अधिकारों और आजादी की बड़ी लड़ाई के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए देश को एक नए आंदोलन की जरूरत है. उन्होंने अपने भाषण का अंत जय हिंद, वंदे मातरम और जॉय बांग्ला के नारों के साथ किया.
TMC और चुनाव आयोग के बीच टकराव में ताजा बयानों से तनाव और बढ़ गया है. अभिषेक बनर्जी की ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर की मांग और ममता बनर्जी की उनकी गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग ने चुनाव आयोग के खिलाफ पार्टी के आरोपों को सिर्फ संस्थागत जवाबदेही की मांग से कहीं आगे पहुंचा दिया है.
ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की और मीडिया तथा न्यायपालिका से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि लोगों को न्याय मिले. उन्होंने कहा, "मीडिया और न्यायपालिका की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. अगर हर कोई चुप रहता है और सिर्फ प्रमोशन और अपने निजी हितों के बारे में सोचता है तो लोगों की आवाज कौन उठाएगा?"