तिरुपति में करोड़ों के चढ़ावे की सुरक्षा कैसे होती है?

यहां चढ़ावे की मात्रा इतनी अधिक है कि मंदिर का प्रबंधन करने वाली संस्था तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को मंदिर के पास ही दो मंजिला पराकामनी यानी गिनती केंद्र बनाना पड़ा

तिरुपति बालाजी मंदिर के भीतर श्रद्धालु

अयोध्या के राम मंदिर में 7.9 करोड़ रुपए के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जारी है. साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि कौन-कौन से सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं अपनाए गए या उनका पालन नहीं हुआ. ऐसे में देश के दूसरे बड़े मंदिर यह भरोसेमंद मॉडल पेश करते हैं कि श्रद्धालुओं के इतने बड़े चढ़ावे का प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए.

आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर इसका एक प्रमुख उदाहरण है. यहां वित्त वर्ष 2025-26 में हुंडी से 1,738 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला. यानी औसतन हर दिन 4.75 करोड़ रुपए.

तिरुपति यात्रा की एक खास परंपरा है कि श्रद्धालु गर्भगृह में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने के बाद अपनी श्रद्धानुसार हुंडी (दान पात्र) में चढ़ावा चढ़ाते हैं. यह कपड़े से ढका हुआ पीतल का बड़ा पात्र होता है जिसे मंदिर के भीतर रखा जाता है.

हुंडी में सबसे ज्यादा नकद चढ़ावा आता है. इसके अलावा सिक्के, सोना, चांदी और हीरे भी चढ़ाए जाते हैं. जैसे ही कोई हुंडी भर जाती है, उसकी जगह खाली हुंडी रख दी जाती है. श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से हर दिन 12 से 18 हुंडियों का इस्तेमाल होता है.

चढ़ावे की मात्रा इतनी अधिक है कि मंदिर का प्रबंधन करने वाली संस्था तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को मंदिर के पास ही दो मंजिला पराकामनी यानी गिनती केंद्र बनाना पड़ा. यह फरवरी 2023 में शुरू हुआ. इससे पहले नोटों की गिनती और सिक्कों की छंटाई मंदिर परिसर के भीतर ही होती थी.

अब हर सुबह पिछले दिन के चढ़ावे से भरी और सील की गई हुंडियों को कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर से पराकामनी लाया जाता है. वहां वरिष्ठ अधिकारियों, सतर्कता (विजिलेंस) कर्मचारियों और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में उन्हें खोला जाता है.

इसके बाद चढ़ावे को पहली मंजिल पर ले जाया जाता है. वहां नोट गिनने वाली मशीनों की मदद से नकदी की गिनती होती है. पूरी प्रक्रिया टीटीडी के विजिलेंस कर्मचारियों की कड़ी निगरानी में होती है. हर गतिविधि की रियल टाइम मॉनिटरिंग स्क्रीन पर की जाती है. श्रद्धालु भी केंद्र की पहली मंजिल पर बने कांच के शीशों से हुंडियों को खाली करने और चढ़ावे की छंटाई व गिनती की प्रक्रिया देख सकते हैं.

पराकामनी में काम करने वाले करीब 80 प्रतिशत लोग श्रीवारी सेवक होते हैं. ये भगवान वेंकटेश्वर के श्रद्धालु होते हैं, जो तिरुमला में एक सप्ताह तक स्वैच्छिक सेवा देते हैं. वे श्रद्धालुओं की कतार संभालने, प्रसाद बांटने और पराकामनी में काम करने जैसी कई जिम्मेदारियां निभाते हैं.

हर दिन के अंत में नोटों को पैक करके बारी-बारी से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और यूनियन बैंक में जमा कराया जाता है. सिक्कों को उनके मूल्य के अनुसार अलग किया जाता है. उनकी गिनती नहीं होती बल्कि वजन के आधार पर उनकी अनुमानित कीमत तय की जाती है. इसके बाद उन्हें तिरुपति में नीचे स्थित दूसरे पराकामनी केंद्र भेजा जाता है. तय कार्यक्रम के अनुसार ये सिक्के रोजाना विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों में जमा किए जाते हैं.

विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने के कारण मंदिर में विदेशी मुद्रा का चढ़ावा भी काफी आता है. इसकी गिनती कर सप्ताह में दो दिन SBI में जमा कराया जाता है.

सोना, चांदी, हीरे और अन्य कीमती धातुओं को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है. हर महीने के पहले सप्ताह में मूल्यांकनकर्ता यानी एप्रेजर्स अधिकारियों की मौजूदगी में इनका मूल्यांकन करते हैं. इसके बाद इन्हें सील कर तिरुपति स्थित टीटीडी कोषागार भेज दिया जाता है.

पराकामनी की व्यवस्था से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, "हुंडी से मिलने वाले चढ़ावे को इकट्ठा करने, गिनने और जमा करने के मामले में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की व्यवस्था देश में सबसे बेहतर मानी जाती है. पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी और मानव निगरानी दोनों के तहत होती है. यहां तक कि पराकामनी से बाहर निकलते समय वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष आईपीएस अधिकारियों की भी तलाशी ली जाती है."

हालांकि अप्रैल 2023 में एक दुर्लभ घटना सामने आई थी. पराकामनी में तैनात कर्मचारी रवि कुमार पर आरोप लगा कि उसने डॉलर के कुछ नोट अपने अंडरगारमेंट में छिपाकर चोरी करने की कोशिश की. लेकिन विजिलेंस कर्मचारियों की सतर्कता और सीसीटीवी फुटेज की मदद से वह पकड़ा गया और अधिकारियों के हवाले कर दिया गया.

भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के अलावा टीटीडी तिरुपति और अन्य स्थानों पर स्थित दर्जनों संबद्ध मंदिरों का भी प्रबंधन करता है. इसकी संचालन समिति में एक अध्यक्ष और कई सदस्य होते हैं. प्रशासन की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के पास होती है जिन्हें कार्यकारी अधिकारी कहा जाता है. सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी के पास होती है जो एक आईपीएस अधिकारी होते हैं.

समय के साथ कदम मिलाते हुए टीटीडी ने हुंडी में आने वाले नकद चढ़ावे को छोड़कर लगभग सभी तरह के दान को धीरे-धीरे डिजिटल लेनदेन में बदलना शुरू कर दिया है. इससे चोरी या गड़बड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है. टीटीडी के एक अधिकारी जानकारी देते हैं, "योजना यह है कि पराकामनी में ऑटोमेशन का दायरा बढ़ाया जाए और मानवीय दखल को मौजूदा स्तर से घटाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया जाए."

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