रेवंत रेड्डी से टकराव ने कैसे छीनी सुरेखा की मंत्री की कुर्सी

कोंडा सुरेखा की बेटी की तीखी टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से टकराव तक पहुंचा और आखिरकार उन्हें मंत्री पद गंवाना पड़ा

Surekha (C) rejected the basis of the action, arguing that her daughter Sushmitha’s (R) remarks on Revanth Reddy (L) were made independently.
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कोंडा सुरेखा (बीच में) और उनकी बेटी (दाएं)

तेलंगाना में  रेवंत रेड्डी के नेतृत्व को कांग्रेस हाईकमान से उस समय मजबूती मिली है, जब उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर 1,000 दिन पूरे किए. उसी दौरान हाईकमान ने मुख्यमंत्री से टकराव मोल ले रहीं कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने को हरी झंडी दे दी.

वारंगल ईस्ट से विधायक और ओबीसी नेता सुरेखा को दिसंबर 2023 में बंदोबस्ती, वन और पर्यावरण मंत्री बनाया गया था. उस समय कांग्रेस ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) को हराकर तेलंगाना में सत्ता हासिल की थी.

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 3 सितंबर को जारी बयान में कहा गया कि रेवंत रेड्डी ने सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया है. इस संबंध में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को सिफारिश भेज दी गई है. बाद में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के फैसले को मंजूरी दे दी.

रेवंत रेड्डी और सुरेखा पिछले कुछ दिनों से नई दिल्ली में थे. दोनों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की. सुरेखा इससे पहले बेंगलुरु में भी खड़गे से मिल चुकी थीं. अपना मंत्री पद बचाने के लिए सुरेखा ने आखिरी समय तक कई कोशिशें कीं. इनमें 28 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर रेवंत रेड्डी के घर जाना भी शामिल था.

मंत्रिमंडल से हटाया जाना तय होने के बाद सुरेखा ने हैदराबाद लौटकर रेवंत रेड्डी पर पलटवार किया. उन्होंने मीडिया से कहा, "मुझसे इस्तीफा देने के लिए कहा ही नहीं गया तो मैं इस्तीफा कैसे दूंगी?"

रेवंत रेड्डी के साथ सुरेखा के मतभेद पिछले कुछ समय से साफ नजर आ रहे थे. पिछले महीने परकाल में रेवंत रेड्डी ने सार्वजनिक रूप से विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी की 2028 के विधानसभा चुनाव में फिर से इसी सीट से उम्मीदवारी का समर्थन किया. इसके बाद दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया.

रेवंत रेड्डी के इस ऐलान से सुरेखा खेमे में नाराजगी बढ़ गई. दरअसल, सुरेखा और उनके पति कोंडा मुरली, जो विधान परिषद के पूर्व सदस्य हैं, अपनी बेटी सुस्मिता पटेल को 2028 में परकाला से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रहे हैं. सुरेखा ने 2009 से 2012 के बीच वारंगल जिले में स्थित परकाला की विधायक रह चुकी हैं.

सुस्मिता पटेल ने रेवंत रेड्डी पर तीखी टिप्पणी की और विवाद खड़ा हो गया. पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया. पटेल ने कहा कि वे हर हाल में परकाला से चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ प्रकाश रेड्डी या ‘रेवंत रेड्डी के दादा भी’ चुनाव लड़ सकते हैं.

रेवंत रेड्डी ने पार्टी के उन बड़े नेताओं के साथ भी काम किया है, जो खुले तौर पर उनके नेतृत्व का विरोध करते रहे हैं. इनमें मंत्री कोमटिरेड्डी वेंकट रेड्डी भी शामिल हैं. लेकिन अनुभवहीन सुस्मिता की आपत्तिजनक टिप्पणियों और मुख्यमंत्री के अधिकार को लेकर सुरेखा के रुख को पार्टी ने हद से ज्यादा माना.

मामला तब और बिगड़ गया, जब कोंडा दंपति ने अपनी बेटी की टिप्पणियों की आलोचना से इनकार कर दिया. उन्होंने इसे एक वयस्क व्यक्ति की निजी राय बताया. 19 अगस्त को सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर राज्य कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की.

मामला जब दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचा तो रेवंत रेड्डी ने कहा कि हाईकमान का फैसला अंतिम होगा. इसके जवाब में सुरेखा ने मांग की कि रेवंत रेड्डी को भी कारण बताओ नोटिस दिया जाए. उनका तर्क था कि रेवंत रेड्डी ने दावा किया है कि वे अगले कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे.

3 सितंबर को सुरेखा ने रेवंत रेड्डी पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कांग्रेस हाईकमान पर उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करने का दबाव बनाया. सुरेखा ने कहा, "मुझे हटाने का फैसला मेरा पक्ष जाने बिना ही ले लिया गया." उन्होंने कहा कि वे विधायक के तौर पर अपने निर्वाचन क्षेत्र की ‘सेवा करती रहेंगी’.

यह सुरेखा का पहला राजनीतिक टकराव नहीं है. वे पांच बार विधायक रह चुकी हैं और वारंगल क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों श्यामपेट, परकाला और अब वारंगल ईस्ट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. अतीत में उनके युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और BRS के साथ भी मतभेद रहे हैं.

2009 में अविभाजित आंध्र प्रदेश में परकाला से चुनाव जीतने के बाद सुरेखा कांग्रेस सरकार में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (YSR) मंत्रिमंडल में शामिल हुईं. उन्हें महिला विकास और बाल कल्याण मंत्री बनाया गया. 2009 में YSR के निधन के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी के साथ चली गईं. जगन मोहन रेड्डी ने YSRCP का गठन किया था.

सुरेखा ने 2013 में दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए YSRCP छोड़ दिया और BRS में शामिल हो गईं. 2014 में वे वारंगल ईस्ट से विधायक चुनी गईं. 2018 में उन्होंने BRS छोड़कर फिर कांग्रेस का दामन थाम लिया.

एक अन्य वरिष्ठ और नाराज कांग्रेस नेता, जिनसे रेवंत रेड्डी ने किनारा किया, वे चिन्ना रेड्डी हैं. वे अविभाजित आंध्र प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी मीडिया विज्ञप्ति में कहा गया कि तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष के तौर पर चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है. उनकी जगह वरिष्ठ नेता के. केशव राव की बेटी गडवाल विजयलक्ष्मी को नियुक्त किया गया है.

अब रेवंत रेड्डी के सामने मंत्रिमंडल की तीन सीटें भरने की चुनौती है. इनमें से दो पद काफी लंबे समय से खाली हैं और इन पर कई मजबूत दावेदारों की नजर है.

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