लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कितने काम के हैं सपा के बागी?

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है. सपा से अलग राह पकड़ने वाले इन विधायकों की वजह से रायबरेली, अमेठी, आंबेडकर नगर, बदायूं समेत कई लोकसभा सीटों पर समीकरण बदल सकता है

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ सपा के बाग़ी विधायक
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ सपा के बाग़ी विधायक

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 27 फरवरी को हुआ चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले  सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के ताजा सहयोगी बने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस की चुनावी रणनीतिक कुशलता का भी इम्त‍िहान था. भाजपा को यूपी विधानसभा में अपनी संख्या के अनुसार सात सीटें जीतने की उम्मीद थी.

जबकि सपा को 3 सीटें मिलनी चाहिए थीं. बीजेपी ने नया दांव चलते हुए आठवां उम्मीदवार खड़ा किया, जिससे मुकाबला मजबूरन हुआ. 27 फरवरी की देर शाम जब नतीजे आए तो पता चला कि भाजपा के सभी आठ उम्मीदवार जीत गए, सपा के केवल दो उम्मीदवार ही जीत पाए. 

सेवानिवृत्त नौकरशाह और यूपी के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन अपने जीवन का पहला चुनाव हार गए. हाल ही में एनडीए में वापस गए जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के सभी नौ विधायकों ने भाजपा के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में वोट किया. बसपा के एकमात्र विधायक उमा शंकर सिंह ने भी सेठ को वोट दिया.

राज्यसभा चुनाव के मतदान वाले दिन सुबह से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी. मतदान के लिए जाने से ठीक पहले विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडे ने इस्तीफा दे दिया. कुछ ही देर में, विधान सभा परिसर में पार्टी के कार्यालय से मनोज पांडे को सपा का 'मुख्य सचेतक' के रूप में पहचानने वाली नेम प्लेट हटा दी गई. फिर, सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह ने घोषणा की कि वे मतदान में अपनी "अंतरात्मा की आवाज" के साथ जाएंगे. चार अन्य सपा विधायकों ने अपने साथी 'बागियों' की तरह भाजपा उम्मीदवारों, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेन्द्र सिंह के साथ विधानसभा परिसर में पहुंचकर अपनी मतदान प्राथमिकता का संकेत दिया. 

विधायकों की इस पालाबदली से परेशान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर विधायकों को "प्रलोभन" देने और जीतने के लिए किसी भी हद तक न रुकने का आरोप लगाया. अखि‍लेश ने इन बागी विधायकों पर कार्रवाई की बात भी कही. राजनीतिक विश्लेषक और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में इतिहास विभाग के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक सुशील पांडेय कहते हैं, “सपा के जिन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन किया है वह भगवा दल की एक सोची-समझी रणनीति का ही कमाल है. इन विधायकों के समर्थन से भाजपा को रायबरेली, आंबेडकर नगर जैसी हारी लोकसभा सीटों के अलावा अमेठी, प्रयागराज, फैजाबाद में जनाधार मजबूत करने में मदद मिलेगी. जिस तरह इन विधायकों ने पाला बदलने के बाद “श्रीराम” का जिक्र किया उससे इन्होंने सपा को हिंदू विरोधी साबित करने की कोशिश भी की है. यह अखिलेश यादव की पीडीए की रणनीति का काउंटर भी है.”

हारी हुई लोकसभा सीटें जीतने के लक्ष्य लेकर रणनीति बना रही भाजपा के लिए मनोज पांडेय बड़ी संपत्ति हैं. रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे पांडेय ने पिछली दो बार भाजपा उम्मीदवारों को सीधे मुकाबले में हराकर जीत हासिल की थी. सपा के भीतर मनोज पांडेय की नाराजगी पिछले कुछ समय से पार्टी से दिख रही थी. दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य के समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद और हिंदू विरोधी बयानों को लेकर वे आवाज उठा रहे थे. इस पर सपा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी. 

अब राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के बीच मनोज पांडेय ने सपा को बड़ा झटका दिया है. रायबरेली लोकसभा सीट का समीकरण मनोज पांडेय के भाजपा की तरफ झुकाव दिखने के बाद बदलता दिख रहा है. यहां की पांच विधानसभा सीटों में चार सपा के पास थीं. अब मनोज पांडेय के साथ आने से भाजपा को रायबरेली लोकसभा सीट पर मजबूती मिलेगी. उधर, रायबरेली में कांग्रेस की चुनौतियां भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी. अगर भाजपा ने रायबरेली से किसी हाइप्रोफाइल उम्मीदवार को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारने की रणनीति बनाई तो मनोज पांडेय यहां पर भगवा खेमे के उम्मीदवार के रूप में बडे दावेदार हो सकते हैं. 

पिछले वर्ष मई में स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान अमेठी की गौरीगंज नगर पालिका में भाजपा उम्मीदवार के पति की पिटाई करने के बाद विवादों में आए गौरीगंज से सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह का मन नौ महीने बाद बदल गया. राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने वाले राकेश प्रताप सिंह की पहचान अमेठी के जनाधार वाले नेता के रूप में होती है. उधर, अमेठी विधानसभा सीट से सपा विधायक महाराजी प्रजापति पिछले लंबे समय से स्थानीय सांसद और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री स्मृति इरानी से संपर्क में थीं. बताया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में वोट न देकर सपा विधायक महराजी प्रजापति ने भाजपा की ही मदद की है. 

इस तरह 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अमेठी की पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर जीत हासिल की थी. अब हारी हुई विधानसभा सीट गौरीगंज और अमेठी के सपा विधायकों द्वारा भाजपा का समर्थन करने से गांधी परिवार की गढ़ रही अमेठी सीट पर भगवा दल और भी मजबूत हुआ है. आंबेडकर नगर से विधायक और बसपा सांसद रितेश पांडे, जो अभी-अभी भाजपा में शामिल हुए हैं, के पिता राकेश पांडे भी उन सपा विधायकों की जमात में शामिल थे जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया. अब आंबेडकर नगर के सांसद रितेश पांडेय और विधायक राकेश पांडेय के समर्थन से इस मुश्क‍िल लोकसभा सीट पर भाजपा को फायदा मिलेगा. इससे गोंडा, अयोध्या, आंबेडकरनगर में ब्राह्मण नेता की भाजपा की तलाश भी पूरी होगी. 

जिन अन्य सपा नेताओं के बारे में माना जाता है कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग की है, उनमें चायल से विधायक और मारे गए गैंगस्टर-राजनेता राजू पाल की पत्नी पूजा  पाल भी हैं. वर्ष 2023 में अतीक अहमद की पुलिस सुरक्षा में मौत के बाद पूजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की थी. इसके बाद से इनके भाजपा के खेमे आने की चर्चाएं थीं. माना जा रहा है कि पार्टी अगला लोकसभा चुनाव इन्हें फूलपुर या कौशांबी से लड़वा सकती है. 

बुंदेलखंड के कालपी से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव निषाद पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीता था. विनोद चतुर्वेदी के भाजपा के साथ जुड़ने से भाजपा को लोकसभा चुनाव ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन बटोरने में आसानी होगी. वहीं जाटव नेता आशुतोष मौर्य, जो बदायूं की बिसौली सुरक्षित सीट से तीन बार विधायक रहे हैं, के क्रॉस वोटिंग करने के दूरगामी परिणाम होंगे. राज्यसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले आशुतोष मौर्य 26 फरवरी की रात को कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के लखनऊ स्थित आवास पर रुके थे. कयास लगाया जा रहा है कि आशुतोष मौर्य सपा छोड़ भाजपा में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है कि बदायूं में सपा को बड़ा झटका लग सकता है. सपा ने इस सीट से पूर्व घोषित उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को बदलकर शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया है. इससे पहले बदायूं के पूर्व सांसद सलीम शेरवानी भी सपा से इस्तीफा दे चुके हैं. इस तरह लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा बदायूं लोकसभा सीट पर साइकिल की घेराबंदी करने में जुट गई है. 

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