सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का क्या है मामला?

सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की रकम दो साल में प्रति सप्ताह 45 लाख से बढ़कर 98 लाख हुई तब इसी अंतर ने पुराने चढ़ावे में हेराफेरी के सवाल खड़े किए

सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति की प्राण प्रतिष्ठा प्राण-प्रतिष्ठा साल 1801 में हुई थी

अब मुंबई का प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर चढ़ावा चोरी के विवाद में है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कथित चोरी की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

यह कदम महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के उस दावे के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे में से हर साल 18 करोड़ रुपए निकाल लिए जाते हैं. इन आरोपों के बाद शिवसेना का नेतृत्व करने वाले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी जांच की मांग की थी.

भगवान गणेश के इस मंदिर अंगारकी चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी जैसे शुभ दिनों में देश-विदेश से करीब 7 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. वीकेंड और मंगलवार को यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 3 लाख होती है.

इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा नवंबर, 1801 में हुई थी. सिद्धिविनायक की मूर्ति की खासियत यह है कि भगवान गणेश की सूंड दाईं ओर झुकी हुई है. मराठी में इसे ‘उजव्या सोंडेचा गणपति’ कहा जाता है. जबकि गणेश की ज्यादातर मूर्तियों की सूंड बाईं ओर मुड़ी होती है. 

भगवान गणेश की मूर्ति ढाई फीट ऊंची और दो फीट चौड़ी है. इसके दोनों ओर गणेश की पत्नियां रिद्धि और सिद्धि विराजमान हैं.

मंदिर ट्रस्ट का गठन और संचालन श्री सिद्धि विनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट (प्रभादेवी) अधिनियम, 1980 के तहत होता है. इसकी वार्षिक रिपोर्ट राज्य विधानमंडल में पेश की जाती है. ट्रस्ट मंदिर और लेखा कार्यालय में रखी हुंडियों के जरिए नकद चढ़ावा स्वीकार करता है. इसके अलावा चेक, डिमांड ड्राफ्ट और ऑनलाइन भुगतान के विकल्प भी हैं.

मंदिर के संचालन के अलावा ट्रस्ट मरीजों को चिकित्सा सहायता देता है और छात्रों तथा संस्थानों के लिए पुस्तक बैंक भी चलाता है.

वीकेंड और मंगलवार के दिन सिद्धिविनायक में श्रद्धालुओं की संख्या करीब तीन लाख तक पहुंचती है

श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर कहते हैं कि मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे में अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद उन्हें कथित गबन की जानकारी मिली. करीब दो साल पहले मंदिर को हर सप्ताह लगभग 45 लाख रुपए का चढ़ावा मिलता था, जो अब बढ़कर करीब 98 लाख रुपए हो गया है. यानी सालाना चढ़ावे में 18 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है.

सरवणकर ने कहा कि इस बढ़ोतरी से सवाल उठे और ट्रस्ट को संदेह हुआ कि पहले कम चढ़ावा मिलने की वजह चोरी हो सकती है. ट्रस्ट ने हाल ही में जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संपर्क किया था. 

इसके बाद ट्रस्ट के एक कर्मचारी को चढ़ावे की रकम चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. बताया जाता है कि जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आए, जिनमें कुछ कर्मचारी पैसे लेकर जाते हुए दिखाई दे रहे थे. 

पुलिस ने नौ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की. इनमें से आठ को गिरफ्तार किया गया और अब वे जमानत पर बाहर हैं. सरवणकर ने आरोप लगाया कि इस गबन में और भी लोग शामिल हो सकते हैं.

सरवणकर ने दावा किया कि इन कर्मचारियों की भर्ती उस समय हुई थी, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के एक वरिष्ठ नेता ट्रस्ट का हिस्सा थे. उन्होंने आरोप लगाया कि ये कर्मचारी नियमित रूप से शिवसेना (UBT) की शाखा में जाते थे.

सरवणकर ने एक और अनियमितता की भी बात स्वीकार की. दादर रेलवे स्टेशन पर कुछ टैक्सी चालक श्रद्धालुओं से सिद्धिविनायक में आसानी से दर्शन कराने के लिए 5,000 रुपए लेते थे. एजेंट, बिचौलिए और कर्मचारी भी इसी तरह पैसे लेते थे. उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन ने इस पर काफी हद तक रोक लगा दी है.

शिवसेना के पदाधिकारी और मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी राहुल लोंढे मौजूदा न्यासी मंडल को किसी भी तरह की गलती के लिए जिम्मेदार नहीं मानते. वे सवाल उठाते हैं, "अगर हम दोषी होते तो राज्य के कानून और न्याय विभाग को जांच की मांग करते हुए पत्र क्यों लिखते?"

लोंढे ने कहा कि ट्रस्ट ने उन 19 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जो कथित तौर पर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से पैसे लेते थे. उन्होंने बताया कि एक प्रवेश द्वार को भी बंद कर दिया गया है जहां से सुरक्षा कर्मचारी चुपके से लोगों को दर्शन के लिए ले जाते थे.

लोंढे के मुताबिक करीब दो साल पहले नए न्यासी मंडल के कार्यभार संभालने के बाद ट्रस्ट की आय और बजट में बढ़ोतरी हुई है. यह 2022-23 में 106 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 114 करोड़ रुपए, 2024-25 में 134 करोड़ रुपए और मार्च 2026 में 182 करोड़ रुपए हो गया. 

ट्रस्ट की अगले वित्त वर्ष में 250 करोड़ रुपए का बजट पेश करने की योजना है. इस साल अब तक सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने गरीब और जरूरतमंद मरीजों को 36 करोड़ रुपए की सहायता दी है.

चढ़ावे को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या के राम मंदिर में भी श्रद्धालुओं के चढ़ावा चोरी के आरोपों की हलचल देशभर में सुर्खियां बटोर रही है. इस मामले में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जारी जांच में करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के संकेत मिले हैं. इस तरह की घटनाएं न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा सकती हैं, बल्कि जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती हैं.

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं. 2024 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्रस्ट के कामकाज में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए थे. उस समय ट्रस्ट की अध्यक्षता शिवसेना (UBT) के नेता आदेश बांदेकर कर रहे थे.

2020 में ट्रस्ट की ओर से महाराष्ट्र सरकार की ‘शिव भोजन’ सब्सिडी वाली भोजन योजना के लिए 10 करोड़ रुपए और मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 5 करोड़ रुपए देने को लेकर विवाद हुआ था. उस समय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन सत्ता में था.

2018 में ‘श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार विरोधी कृति समिति’ के तहत श्रद्धालुओं के एक समूह ने ट्रस्टियों पर गबन का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया था कि जनवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच स्टडी टूर पर 12 लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए.

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