दान की गिनती से मीडिया मैनेजमेंट तक, राम मंदिर में कैसे हो रहे बड़े बदलाव?
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद राम मंदिर में दान की गिनती से लेकर तमाम व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है

राम मंदिर में बैंक और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मचारी भी तैनात हैं
अयोध्या में राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज में कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं. एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाए जाने के बाद इन बदलावों को संस्थागत रूप देने की कोशिश तेज हुई है.
राम मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित की जाने वाली धनराशि का प्रबंधन ट्रस्ट के लिए एक बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी है. मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनके चढ़ावे में नकदी, सिक्के तथा अन्य सामग्री शामिल होती है. इस धनराशि की गिनती, छंटाई, बंडलिंग और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में कई कर्मचारियों की भागीदारी रहती है.
ऐसे में गणना कक्ष की सुरक्षा और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है. जून में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद गणना कक्ष की व्यवस्था की समीक्षा की गई. जांच के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आने के बाद सुरक्षा, निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया.
गणना कक्ष में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अब बिना जेब वाली एक जैसी केसरिया यूनिफॉर्म अनिवार्य की गई है. इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें नकदी या सिक्कों को कपड़ों की जेब में रखने की आशंका कम हो और कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी आसान हो सके. गणना कक्ष में प्रवेश करने और बाहर निकलने पर कर्मचारियों की सुरक्षा जांच भी की जाएगी. प्रवेश द्वार पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
गणना कक्ष के अंदर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी कैमरे ठीक से काम करते रहें. इस तरह सुरक्षा व्यवस्था को केवल प्रवेश द्वार तक सीमित रखने के बजाय गणना की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने की कोशिश की जा रही है.
संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाइल फोन ले जाने पर रोक भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है. मंदिर के गर्भगृह और अन्य प्रतिबंधित स्थानों पर कर्मचारियों को अपने निजी सामान बाहर छोड़ने होंगे. इससे अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रतिबंधित क्षेत्रों में निजी वस्तुओं के प्रवेश पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
दान की गिनती के लिए अभी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के माध्यम से कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं. मौजूदा व्यवस्था में बैंक, ट्रस्ट और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गणना की प्रक्रिया दो शिफ्ट में संचालित होती है. इसमें बैंक के 10, ट्रस्ट के चार और आउटसोर्सिंग एजेंसी के 22 कर्मचारियों की भागीदारी बताई गई है.
वहीं गणना कक्ष की एक शिफ्ट में आउटसोर्सिंग एजेंसी और बैंक के लगभग 12 से 15 कर्मचारी नोटों की गिनती, बंडलिंग और छंटाई का काम करते हैं. अब इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की संख्या घटाने और मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है. एसबीआई की ओर से ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सीईओ को इस संबंध में प्रस्ताव की जानकारी दी जा चुकी है.
योजना के तहत नोटों की गिनती के लिए काउंटिंग मशीन और मूल्य के अनुसार नोट अलग करने के लिए शॉर्टिंग मशीन लगाई जाएगी. सिक्कों की गिनती और छंटाई के लिए भी मशीनें लगाने पर विचार किया जा रहा है. मशीनों के इस्तेमाल से गणना की गति बढ़ाने, मानवीय दखल कम करने और गिनती में होने वाली गलतियों की आशंका घटाने में मदद मिल सकती है.
हालांकि मशीनें लगाने के साथ उनकी निगरानी, नियमित जांच और मशीन से निकले आंकड़ों का मिलान भी जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि गणना और बैंक में जमा होने वाली राशि के बीच अंतर न रहे.
गणना कक्ष का स्थान बदलेगा
चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था में बदलाव केवल सुरक्षा जांच और मशीनें लगाने तक सीमित नहीं है. ट्रस्ट गणना कक्ष को भी नए स्थान पर स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है. फिलहाल यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) में अस्थाई रूप से गणना का काम किया जा रहा है.
प्रस्ताव के अनुसार गणना कक्ष को मंदिर के परकोटे के बेसमेंट में स्थानांतरित किया जाएगा. जिस स्थान पर इसे ले जाने की तैयारी है, वहां अभी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का कार्यालय है. कार्यालय खाली होने के बाद उस जगह को गणना के काम के अनुकूल तैयार किया जा रहा है.
योजना के मुताबिक अगले वर्ष तक गणना कक्ष को नए स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता है. इससे गणना के लिए स्थाई स्थान उपलब्ध होगा और सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने का अवसर मिलेगा. हालांकि स्थान बदलने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नकदी की आवाजाही, कर्मचारियों के प्रवेश, सीसीटीवी निगरानी और बैंक तक धनराशि पहुंचाने की प्रक्रिया में किसी तरह की ढिलाई न रहे.
गणना कक्ष की व्यवस्था में सुधार के साथ ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों का पूरा ब्योरा जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू की है. मंदिर और ट्रस्ट के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों से शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी, वर्तमान पद और जिम्मेदारियों से संबंधित जानकारी मांगी गई है. इस जानकारी का दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है ताकि कर्मचारियों का डेटाबेस अपडेटेड रखा जा सके.
इस पहल के जरिये ट्रस्ट के भीतर किस कर्मचारी की क्या भूमिका है, इसे स्पष्ट किया जाएगा. सीईओ की ओर से कर्मचारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने पर जोर दिया गया है. इससे किसी काम में गड़बड़ी होने पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी.
बड़े धार्मिक परिसरों में अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के कर्मचारियों के बीच समन्वय एक अहम प्रशासनिक जरूरत है. राम मंदिर में भी बैंक, ट्रस्ट और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं.
ऐसे में काम के बंटवारे, निगरानी और रिपोर्टिंग की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है. कर्मचारी के पद, उसके अधिकार और उसकी जिम्मेदारी का रिकॉर्ड होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी प्रक्रिया में चूक कहां हुई.
पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड
राम मंदिर में बदलाव की प्रक्रिया केवल नकदी के प्रबंधन तक सीमित नहीं है. ट्रस्ट ने रामलला की सेवा करने वाले पुजारियों के पहनावे, व्यवहार और दैनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं. इसका उद्देश्य मंदिर की पूजा व्यवस्था में एकरूपता बनाए रखने और गर्भगृह में अनुशासन सुनिश्चित करने से जुड़ा है.
नए ड्रेस कोड के तहत पुजारियों को पीले रेशमी 'अचल' और 'उत्तरीय' पहनने के निर्देश दिए गए हैं. अचल को धोती और उत्तरीय को शरीर के ऊपरी हिस्से पर ओढ़े जाने वाले वस्त्र के रूप में बताया गया है. जन्माष्टमी से शुरू की गई इस व्यवस्था में पहले इस्तेमाल होने वाले 'चौबंदी' पहनावे की जगह नया परिधान निर्धारित किया गया है.
पुजारियों को गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी. उनसे सोशल मीडिया पर मंदिर के बारे में ऐसे बयान देने से भी बचने को कहा गया है, जिनसे गलतफहमी पैदा हो सकती है. इसके अलावा भक्तों के साथ विनम्र व्यवहार करने और सेवा के दौरान अपनी निर्धारित जगह पर रहने के निर्देश दिए गए हैं.
यदि किसी पुजारी को सेवा के दौरान अपनी तय जगह छोड़नी पड़ती है तो उसे शिफ्ट इंचार्ज को इसकी जानकारी देनी होगी और कारण बताना होगा. पूजा के दौरान अनावश्यक बातचीत, समूह में चर्चा और मजाक-मस्ती पर भी रोक लगाई गई है. किसी घटना या विवाद की स्थिति में पुजारियों से शांत रहने और संबंधित अधिकारियों से सलाह लेकर कार्रवाई करने को कहा गया है.
गर्भगृह में बाहरी वस्तुओं के प्रवेश को लेकर भी नियम तय किए गए हैं. ट्रस्ट के एक सदस्य के अनुसार मंदिर से मिलने वाले भोग प्रसाद के अलावा किसी अन्य वस्तु को गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी. दर्शन या प्रसाद के लिए आने वाले पुजारियों के परिवार के सदस्यों और परिचितों को विशेष सुविधा देने की व्यवस्था भी निर्धारित की गई है.
ऐसी मदद आचार्य या उनकी देखरेख में दी जा सकेगी. यदि कोई पुजारी अपनी ओर से नियमों से अलग जाकर किसी को विशेष सुविधा देता है, तो उसकी जिम्मेदारी उसी पर होगी. यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े धार्मिक स्थलों पर सामान्य श्रद्धालुओं और विशेष परिचितों के साथ व्यवहार को लेकर समान नियम बनाए रखना प्रशासनिक चुनौती हो सकता है.
निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से विशेष सुविधाओं को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर नियमों से अलग लाभ न मिले. मंदिर में सफाई और पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की निगरानी को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं.
सफाई सहायकों को सोने, चांदी और अन्य धातुओं के बर्तनों को सौंपने से पहले और वापस लेने के बाद उनकी गिनती करनी होगी. इससे मूल्यवान वस्तुओं के हस्तांतरण के दौरान रिकॉर्ड बनाए रखने और किसी कमी की स्थिति में उसका पता लगाने में मदद मिल सकती है.
ट्रस्ट प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर स्वागत करने की व्यवस्था पर भी काम कर रहा है. यह पहल मंदिर में दर्शन और प्रसाद वितरण से जुड़ी सेवाओं में एकरूपता लाने के प्रयास का हिस्सा है. इस तरह पूजा व्यवस्था, कर्मचारियों के व्यवहार, वस्तुओं की निगरानी और श्रद्धालुओं के स्वागत तक अलग-अलग पहलुओं को निर्धारित नियमों के दायरे में लाने की कोशिश हो रही है.
प्रवक्ता और मीडिया इंचार्ज की नियुक्ति की तैयारी
राम मंदिर के प्रबंधन में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव मीडिया से संवाद की व्यवस्था को लेकर है. चढ़ावे की चोरी के विवाद के बाद ट्रस्ट मंदिर से संबंधित सूचनाओं और सवालों के जवाब देने के लिए अधिक व्यवस्थित तंत्र तैयार करना चाहता है. इसी उद्देश्य से एक प्रवक्ता और एक मीडिया इंचार्ज की नियुक्ति की योजना बनाई गई है.
शुरुआत में ट्रस्ट केवल एक प्रवक्ता नियुक्त करने पर विचार कर रहा था, लेकिन बाद में दो अलग-अलग पदों की जरूरत महसूस की गई. प्रस्तावित व्यवस्था में प्रवक्ता मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े नीतिगत, धार्मिक तथा कानूनी मामलों पर अधिकृत रूप से पक्ष रखेगा.
दूसरी ओर, मीडिया इंचार्ज रोजमर्रा के मीडिया प्रबंधन, प्रेस विज्ञप्ति जारी करने, पत्रकारों के साथ समन्वय, मान्यता से जुड़े मामलों और सोशल मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगा. इस व्यवस्था के पीछे मंदिर से संबंधित सूचनाओं की बढ़ती जरूरत एक प्रमुख कारण है.
जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम मंदिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के केंद्र में रहा है. मंदिर में दर्शन व्यवस्था, निर्माण कार्य, विशिष्ट व्यक्तियों के दौरे, दान की राशि और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित सवाल लगातार उठते रहे हैं. ऐसे में केवल एक या दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के माध्यम से सभी सवालों का जवाब देना मुश्किल हो सकता है.
अब तक ट्रस्ट की ओर से मीडिया के सवालों का जवाब देने में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और तत्कालीन ट्रस्टी अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रही है. नई व्यवस्था में इन जिम्मेदारियों को अलग-अलग पदों पर बांटने का प्रस्ताव है, ताकि नीतिगत मामलों पर अधिकृत प्रतिक्रिया और रोजाना की मीडिया जरूरतों के बीच स्पष्ट अंतर रहे.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रवक्ता और मीडिया इंचार्ज के पदों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के नाम ट्रस्ट तक पहुंचे हैं. संभावित नामों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है. सीईओ उम्मीदवारों के अनुभव, पृष्ठभूमि, संगठन में उनकी भूमिका और मीडिया से जुड़े कामकाज की समझ का आकलन कर रहे हैं.
संघ और वीएचपी से जुड़े दो वरिष्ठ पदाधिकारियों की सीईओ से मुलाकात होने की भी जानकारी सामने आई है. इन पदों पर नियुक्ति के लिए 2 दिसंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि अंतिम नियुक्ति और नामों पर औपचारिक निर्णय ट्रस्ट की स्वीकृति पर निर्भर करेगा.
नियुक्ति के बाद यह स्पष्ट करना भी जरूरी होगा कि प्रवक्ता और मीडिया इंचार्ज के अधिकारों की सीमा क्या होगी और संवेदनशील मामलों में बयान जारी करने की अनुमति किस स्तर से मिलेगी.ट्रस्ट की बैठक में मंदिर निर्माण के दूसरे चरण की प्रगति और दान की राशि के ऑडिट की समीक्षा भी प्रस्तावित है.
इससे संकेत मिलता है कि प्रबंधन संबंधी बदलावों के साथ वित्तीय निगरानी और निर्माण कार्यों की समीक्षा भी एजेंडे का हिस्सा है. ट्रस्ट के सामने अब चुनौती यह है कि नए नियम केवल निर्देशों तक सीमित न रहें बल्कि मंदिर के दैनिक संचालन में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें.